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14-Jan-2026 02:38 PM
By First Bihar
PATNA: भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, संवेदनशील और न्यायसंगत बनाने की दिशा में बिहार सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। मगध प्रमंडल में अब किसी भी परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण से पूर्व सामाजिक प्रभाव आकलन (SIA) का कार्य बिहार प्रशासनिक सुधार प्रशिक्षण संस्थान (बिपार्ड), गया द्वारा किया जाएगा, जिसके लिए राज्यपाल की स्वीकृति से अधिसूचना जारी कर दी गई है।
उपमुख्यमंत्री सह मंत्री, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में पारदर्शिता, संवेदनशीलता और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मगध प्रमंडल में सामाजिक प्रभाव आकलन का दायित्व बिपार्ड, गया को सौंपे जाने से प्रभावित परिवारों एवं स्थानीय समुदायों की सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों का अधिक वैज्ञानिक और निष्पक्ष मूल्यांकन संभव हो सकेगा। इससे भूमि अर्जन, पुनर्वासन एवं पुनर्व्यवस्थापन से जुड़े निर्णय और अधिक न्यायसंगत, समयबद्ध और लोकहितकारी बनेंगे|
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर एवं पारदर्शिता अधिकार अधिनियम–2013 के तहत एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इसके तहत मगध प्रमंडल अंतर्गत जिलों में किसी भी परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामलों में सामाजिक प्रभाव आकलन (Social Impact Assessment – SIA) का कार्य अब बिहार प्रशासनिक सुधार प्रशिक्षण संस्थान (बिपार्ड), गया द्वारा किया जाएगा।
इस संबंध में विभाग द्वारा अधिसूचना जारी की गई है, जिसे राज्यपाल की स्वीकृति प्राप्त है। अधिसूचना के अनुसार यह व्यवस्था अधिनियम की धारा–4 के प्रावधानों के अंतर्गत की गई है, ताकि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में प्रभावित परिवारों एवं स्थानीय समुदायों पर पड़ने वाले सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय प्रभावों का समुचित आकलन सुनिश्चित किया जा सके।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव सी. के. अनिल द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया है कि पूर्व में एल.एन. मिश्रा आर्थिक अध्ययन एवं सामाजिक परिवर्तन संस्थान, ए.एन. सिन्हा समाज अध्ययन संस्थान, चंद्रगुप्त प्रबंधन संस्थान, आद्री तथा विकास प्रबंधन संस्थान को सामाजिक प्रभाव आकलन इकाई के रूप में अधिसूचित किया गया था। अब लोकहित में मगध प्रमंडल के लिए बिपार्ड, गया को भी इस सूची में सम्मिलित किया गया है।
गौरतलब है कि जुलाई 2025 में अपर मुख्य सचिव, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की अध्यक्षता में सभी अधिसूचित एसआईए इकाइयों के साथ एक विस्तृत समीक्षा बैठक हुई थी। इस बैठक में सामाजिक प्रभाव आकलन कार्य को मानक प्रक्रिया के तहत समयबद्ध ढंग से पूरा करने, भूमि के रकबे के आधार पर एसआईए शुल्क निर्धारण, जिलावार एजेंसी आवंटन तथा एसआईए रिपोर्ट की समय-सीमा तय करने पर सहमति बनी थी। साथ ही यह भी निर्णय लिया गया था कि जिलाधिकारी सीधे आवंटित एसआईए एजेंसी को कार्यादेश निर्गत करेंगे, जिससे भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब न हो।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि बिपार्ड, गया को शामिल किए जाने के साथ ही पूर्व में निर्धारित एसआईए एजेंसी चयन रोस्टर को आवश्यक सीमा तक संशोधित माना जाएगा और यह आदेश निर्गत की तिथि से प्रभावी होगा। सरकार के इस निर्णय से भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी, प्रभावित परिवारों की समस्याओं और अपेक्षाओं का बेहतर आकलन संभव होगा तथा पुनर्वासन एवं पुनर्व्यवस्थापन से जुड़े निर्णय अधिक संवेदनशील, न्यायसंगत और व्यावहारिक बनेंगे।