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16-Feb-2026 08:37 AM
By First Bihar
Land for Job Scam : दिल्ली स्थित राउज एवेन्यू कोर्ट में आज चर्चित लैंड फॉर जॉब मामले की अहम सुनवाई होनी है। इस सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय जनता दल के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उनकी पत्नी एवं बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के भी अदालत में मौजूद रहने की संभावना है। दोनों रविवार शाम ही दिल्ली के लिए रवाना हो गए थे। इस मामले में लालू परिवार के कई सदस्यों समेत कुल 41 लोगों के खिलाफ आरोप तय किए जा चुके हैं, जिसके बाद अब मुकदमे की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
परिवार के कई सदस्य आरोपों के घेरे में
इस केस में लालू प्रसाद यादव के साथ उनके बेटे तेजप्रताप यादव और तेजस्वी यादव, बेटी एवं सांसद मीसा भारती तथा बेटी हेमा यादव को भी आरोपी बनाया गया है। अदालत ने सभी के खिलाफ आरोप तय करते हुए कहा है कि प्रथम दृष्टया मामले में गंभीर आरोप सामने आए हैं, जिनकी जांच ट्रायल के दौरान की जानी चाहिए। इस मामले में अब तक 52 आरोपियों को अदालत ने बरी कर दिया है, जबकि शेष आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाया जाएगा। अदालत के इस फैसले ने राजनीतिक हलकों में भी हलचल तेज कर दी है।
कोर्ट की कड़ी टिप्पणी
करीब 18 दिन पहले हुई सुनवाई के दौरान विशेष न्यायाधीश विशाल गोग्ने ने अपने आदेश में सख्त टिप्पणी की थी। अदालत ने कहा था कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि लालू प्रसाद यादव और उनका परिवार सरकारी नौकरियों के बदले जमीन और संपत्तियां हासिल करने की व्यापक साजिश में शामिल रहा।
अदालत ने कहा कि रेल मंत्री रहते हुए लालू प्रसाद यादव ने सरकारी नौकरियों को सौदेबाजी के माध्यम के रूप में इस्तेमाल किया और अपने परिवार के नाम संपत्तियां हासिल करने की योजना बनाई। अदालत के अनुसार, यह मामला सिर्फ अनियमित नियुक्तियों तक सीमित नहीं है, बल्कि संगठित आपराधिक साजिश की ओर संकेत करता है।
CBI के आरोपों पर अदालत की राय
इस मामले की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) कर रही है। अदालत ने CBI की चार्जशीट और दस्तावेजों पर विचार करते हुए कहा कि जांच एजेंसी ने ऐसे पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत किए हैं, जिनसे यह संकेत मिलता है कि मामले में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं और ट्रायल के दौरान इनकी विस्तृत जांच जरूरी है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि इस मामले में जमीन के ट्रांसफर, संपत्तियों की असामान्य कीमत, परिवार और करीबियों के नाम संपत्ति खरीदने तथा उससे जुड़े वित्तीय लेन-देन की जांच आवश्यक है। अदालत ने माना कि CBI द्वारा पेश किए गए दस्तावेज नौकरी और जमीन के बीच कथित लेन-देन की ओर संकेत करते हैं। हालांकि अदालत ने यह स्पष्ट किया कि आरोप तय होना किसी भी आरोपी को दोषी साबित नहीं करता। बचाव पक्ष को ट्रायल के दौरान अपने पक्ष में साक्ष्य प्रस्तुत करने और CBI के आरोपों को चुनौती देने का पूरा अवसर मिलेगा।
2004 से 2009 के बीच रची गई साजिश का आरोप
CBI के अनुसार यह कथित साजिश वर्ष 2004 से 2009 के बीच रची गई थी, जब लालू प्रसाद यादव देश के रेल मंत्री थे। आरोप है कि इस दौरान मुंबई, जबलपुर, कोलकाता, जयपुर और हाजीपुर समेत रेलवे के विभिन्न जोनों में बिहार के लोगों को ग्रुप-डी पदों पर नौकरी दी गई।
जांच एजेंसी का दावा है कि इन नियुक्तियों के बदले नौकरी पाने वाले व्यक्तियों या उनके परिवारों से जमीन ली गई। यह जमीन लालू परिवार के सदस्यों और एके इंफोसिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी के नाम ट्रांसफर कराई गई। बाद में इस कंपनी पर भी लालू परिवार के सदस्यों का नियंत्रण बताया गया है।
CBI का यह भी आरोप है कि अधिकांश मामलों में नौकरी देने से पहले ही जमीन ट्रांसफर कर दी गई थी और कई मामलों में गिफ्ट डीड भी तैयार की गई थी। जांच एजेंसी के अनुसार, लालू यादव के करीबी भोला यादव ने गांवों में जाकर लोगों से अपने परिजनों को नौकरी दिलाने के बदले जमीन देने की बात कही थी।
चार्जशीट में क्या कहा गया
CBI ने अदालत में दाखिल चार्जशीट में बताया है कि कुल 103 आरोपियों को नामजद किया गया था, जिनमें से पांच लोगों की मौत हो चुकी है। जांच एजेंसी का दावा है कि जिन लोगों ने जमीन ट्रांसफर की, उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें नकद भुगतान किया गया था। चार्जशीट में खास तौर पर मीसा भारती और हेमा यादव के खिलाफ भी आरोप दर्ज किए गए हैं कि उनके नाम पर नाममात्र की कीमत पर जमीन ट्रांसफर की गई।
आगे की कानूनी प्रक्रिया
अदालत द्वारा आरोप तय किए जाने के बाद अब इस मामले में ट्रायल शुरू होगा। ट्रायल के दौरान दोनों पक्ष अपने-अपने साक्ष्य और दलीलें पेश करेंगे। इसके बाद अदालत अंतिम फैसला सुनाएगी। कानूनी जानकारों के अनुसार यदि निचली अदालत में दोष सिद्ध होता है तो आरोपी उच्च अदालत में अपील कर सकते हैं। अदालत ने इस मामले में अभियोजन स्वीकृति से जुड़े मुद्दों पर CBI को प्रक्रिया तेज करने का निर्देश भी दिया है, ताकि ट्रायल में अनावश्यक देरी न हो। यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है और आने वाले दिनों में इसकी सुनवाई पर देशभर की नजरें बनी रहेंगी।