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08-Feb-2026 09:43 AM
By First Bihar
Bihar new rail line : बिहार के मिथिला और कोसी क्षेत्र के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। दरभंगा के लहेरियासराय से सहरसा तक प्रस्तावित नई रेल लाइन को जल्द मंजूरी मिलने वाली है। केंद्र सरकार की ओर से इस परियोजना की औपचारिकताओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है और रेल मंत्रालय ने इसका प्रस्ताव नीति आयोग को भेज दिया है। आयोग से स्वीकृति मिलते ही यह महत्वाकांक्षी परियोजना अस्तित्व में आ जाएगी, जिससे न केवल बिहार बल्कि पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर भारत तक की रेल कनेक्टिविटी और अधिक मजबूत होगी।
दरभंगा के सांसद और रेलवे स्टैंडिंग कमिटी के सदस्य गोपालजी ठाकुर ने इस संबंध में जानकारी देते हुए कहा कि यह परियोजना लगभग 2376 करोड़ रुपये की लागत से पूरी की जाएगी। इस नई रेल लाइन की लंबाई करीब 95 किलोमीटर होगी। उन्होंने बताया कि इस मार्ग पर कुल 10 क्रॉसिंग स्टेशन और दो हॉल्ट स्टेशन बनाए जाएंगे, जिससे स्थानीय यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी।
इस रेल लाइन की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह होगी कि इस रूट पर कोसी नदी पर एक ऊंचा पुल बनाया जाएगा, जो इंजीनियरिंग के लिहाज से एक बड़ी उपलब्धि होगी। इसके अलावा 14 बड़े पुल, 41 छोटे पुल और 72 अंडरपास का निर्माण किया जाएगा, जिससे सड़क और रेल यातायात दोनों को सुगम बनाया जा सकेगा। इस तरह की व्यापक आधारभूत संरचना से न केवल यात्री सुविधाओं में सुधार होगा बल्कि माल ढुलाई की क्षमता भी बढ़ेगी।
सांसद गोपालजी ठाकुर ने बताया कि इस नई रेल लाइन के बन जाने से समस्तीपुर, खगड़िया और मानसी होकर जाने वाले मौजूदा मार्ग में लगभग 75 किलोमीटर की दूरी कम हो जाएगी। इससे यात्रा समय घटेगा, ईंधन की बचत होगी और रेल परिचालन अधिक कुशल बनेगा। साथ ही, पूर्वोत्तर भारत के लिए एक और वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध हो जाएगा, जिससे राष्ट्रीय रेल नेटवर्क और अधिक सुदृढ़ होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि यह रेल लाइन दरभंगा, बहादुरपुर, हायाघाट, बेनीपुर, अलीनगर, गौड़ाबौराम और कुशेश्वरस्थान विधानसभा क्षेत्रों के लोगों के लिए वरदान साबित होगी। इन इलाकों के लोगों को अब बेहतर यातायात सुविधा मिलेगी, जिससे शिक्षा, रोजगार, व्यापार और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच आसान हो जाएगी। खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए यह परियोजना जीवन स्तर में सुधार लाने का माध्यम बनेगी।
स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा
नई रेल लाइन के निर्माण से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा लाभ होगा। निर्माण कार्य के दौरान हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा, वहीं बाद में रेलवे से जुड़ी सेवाओं, पर्यटन और व्यापार को भी बढ़ावा मिलेगा। मिथिला और कोसी क्षेत्र कृषि प्रधान इलाके हैं, जहां से धान, मक्का, गेहूं, सब्जियां और अन्य कृषि उत्पाद देश के विभिन्न हिस्सों में भेजे जाते हैं। बेहतर रेल कनेक्टिविटी से किसानों को अपने उत्पाद बाजार तक पहुंचाने में सुविधा होगी और उन्हें उचित मूल्य मिल सकेगा।
इसके अलावा, सहरसा और दरभंगा जैसे शहरों को देश के प्रमुख महानगरों से जोड़ने में यह रेल लाइन अहम भूमिका निभाएगी। इससे छात्र-छात्राओं, नौकरीपेशा लोगों और व्यापारियों को आवागमन में सुविधा मिलेगी। पर्यटन की दृष्टि से भी मिथिला क्षेत्र का विशेष महत्व है, जहां कई धार्मिक और सांस्कृतिक स्थल स्थित हैं। बेहतर रेल सुविधा से पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होगी, जिससे स्थानीय रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
रणनीतिक दृष्टि से भी अहम
यह रेल लाइन रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कोसी क्षेत्र भौगोलिक रूप से संवेदनशील माना जाता है और यहां अक्सर बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाएं आती रहती हैं। ऐसे में एक वैकल्पिक और मजबूत रेल मार्ग का होना आपदा प्रबंधन के लिहाज से भी उपयोगी होगा। आपातकालीन परिस्थितियों में राहत सामग्री और बचाव दलों की आवाजाही आसान हो सकेगी।
साथ ही, पूर्वोत्तर भारत को शेष देश से जोड़ने के लिए यह रेल लाइन एक अतिरिक्त मार्ग प्रदान करेगी, जिससे मौजूदा रूट पर दबाव कम होगा और रेल नेटवर्क अधिक लचीला बनेगा। इससे राष्ट्रीय सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स दोनों के लिहाज से देश को मजबूती मिलेगी।
संभावित रूट और स्टेशन
प्रस्तावित नई रेल लाइन का संभावित रूट इस प्रकार है—
लहेरियासराय, देकुली, उघरा, खैरा, बिठौली, शंकररोहार, हावीडीह, सजनपुर, कन्हौली, जगदीशपुर, घनश्यामपुर, किरतपुर, जमालपुर, महिषी, बनगांव और अंत में सहरसा जंक्शन। इन सभी क्षेत्रों में रेलवे स्टेशनों और हॉल्ट के निर्माण से स्थानीय लोगों को सीधा लाभ मिलेगा।
जल्द मिलेगी अंतिम मंजूरी
रेल मंत्रालय द्वारा प्रस्ताव नीति आयोग को भेजे जाने के बाद अब सभी की निगाहें आयोग की मंजूरी पर टिकी हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही इस परियोजना को हरी झंडी मिल जाएगी और इसके बाद निर्माण कार्य शुरू होगा। सांसद गोपालजी ठाकुर ने विश्वास जताया है कि केंद्र सरकार बिहार के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है और यह परियोजना उसी दिशा में एक बड़ा कदम है।