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Bihar Home Department : गृह विभाग का बड़ा निर्देश: सभी पदाधिकारियों व कर्मियों को 15 फरवरी तक देना होगा चल-अचल संपत्ति का ब्योरा

बिहार सरकार के गृह विभाग ने प्रशासनिक पारदर्शिता को मजबूत करने के उद्देश्य से सभी पदाधिकारियों एवं कर्मियों को अपनी चल एवं अचल संपत्ति तथा दायित्वों का विवरण तय समयसीमा में जमा करने का निर्देश जारी किया है।

17-Dec-2025 07:55 AM

By First Bihar

Bihar Home Department : राज्य सरकार ने प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। गृह विभाग ने सभी पदाधिकारियों एवं अन्य कर्मियों को अपनी चल एवं अचल संपत्ति के साथ-साथ दायित्वों (देनदारियों) का पूरा विवरण निर्धारित समयसीमा के भीतर समर्पित करने का निर्देश जारी किया है। इस आदेश के तहत वर्ष की आखिरी तारीख 31 दिसंबर को आधार मानते हुए सभी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को 15 फरवरी तक अपनी संपत्ति विवरणी जमा करनी होगी।


इस संबंध में गृह विभाग के संयुक्त सचिव नवीन चन्द्र ने राज्य के शीर्ष पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को पत्र भेजा है। यह पत्र डीजीपी, सभी डीजी, बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग के सचिव, जेल आईजी, विशेष सुरक्षा दल के समादेष्टा, रेल एडीजी, अभियोजन निदेशालय और सैनिक कल्याण निदेशालय के निदेशक को संबोधित किया गया है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि गत वर्षों की भांति इस वर्ष भी अखिल भारतीय सेवा के सभी पदाधिकारियों तथा राज्य सरकार के अधीन सभी उपक्रमों में कार्यरत पदाधिकारियों व कर्मियों की चल-अचल संपत्ति का विवरण सार्वजनिक किया जाना अनिवार्य है।


गृह विभाग ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि संपत्ति विवरणी को 31 मार्च 2026 तक सार्वजनिक किया जाना है। इसके लिए समयबद्ध और सुव्यवस्थित प्रक्रिया अपनाने के निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी भी स्तर पर लापरवाही या देरी न हो। विभाग का मानना है कि संपत्ति विवरणी की नियमित घोषणा से न केवल प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ती है, बल्कि भ्रष्टाचार पर भी प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है।


निर्देशों के अनुसार, सभी निकासी एवं व्ययन पदाधिकारियों (DDO) की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया गया है। गृह विभाग ने स्पष्ट किया है कि फरवरी माह के वेतन की निकासी के समय संबंधित निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि जिन अधिकारियों और कर्मचारियों का वेतन निकाला जा रहा है, उनकी संपत्ति विवरणी पहले ही प्राप्त हो चुकी हो। इसके साथ-साथ यह भी अनिवार्य किया गया है कि यह विवरणी समय पर गृह विभाग को उपलब्ध करा दी जाए। यदि किसी कर्मी की संपत्ति विवरणी जमा नहीं होती है, तो उसके वेतन भुगतान में अड़चन आ सकती है।


गृह विभाग के इस निर्देश को प्रशासनिक सख्ती के रूप में देखा जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में कई मामलों में संपत्ति विवरणी समय पर जमा नहीं होने की शिकायतें सामने आई थीं। इसी को ध्यान में रखते हुए इस बार विभाग ने पहले से ही स्पष्ट समयसीमा और जिम्मेदारी तय कर दी है। इससे यह संदेश भी जाता है कि सरकार अब इस प्रक्रिया को केवल औपचारिकता के रूप में नहीं, बल्कि गंभीरता से लागू करना चाहती है।


विशेषज्ञों का मानना है कि चल-अचल संपत्ति का नियमित खुलासा सरकारी सेवा में ईमानदारी और विश्वास को मजबूत करता है। जब अधिकारी और कर्मचारी अपनी संपत्ति का पूरा विवरण सार्वजनिक करते हैं, तो इससे आम जनता का भरोसा प्रशासन पर बढ़ता है। साथ ही, यह व्यवस्था किसी भी प्रकार की अवैध संपत्ति या आय के स्रोतों की पहचान में भी सहायक साबित होती है।


गृह विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि संपत्ति विवरणी में अधिकारी या कर्मचारी के नाम पर मौजूद सभी प्रकार की चल संपत्ति जैसे नकद, बैंक जमा, शेयर, बॉन्ड, वाहन आदि तथा अचल संपत्ति जैसे मकान, जमीन, फ्लैट और अन्य संपत्तियों का उल्लेख अनिवार्य होगा। इसके अलावा, किसी भी प्रकार के ऋण, कर्ज या अन्य वित्तीय दायित्वों का विवरण भी देना होगा, ताकि संपत्ति और दायित्वों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।


इस निर्देश के बाद अब सभी विभागों में हलचल तेज हो गई है। कई विभागों ने आंतरिक स्तर पर कर्मचारियों को सूचना देना शुरू कर दिया है ताकि तय समयसीमा के भीतर संपत्ति विवरणी एकत्र की जा सके। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में गृह विभाग इस पूरे मामले की निगरानी करेगा और आवश्यकता पड़ने पर सख्त कार्रवाई भी की जा सकती है।


कुल मिलाकर, गृह विभाग का यह आदेश राज्य सरकार की पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन की नीति को दर्शाता है। समय पर संपत्ति विवरणी जमा करना अब केवल औपचारिक दायित्व नहीं, बल्कि अनिवार्य प्रशासनिक जिम्मेदारी बन चुका है। ऐसे में सभी पदाधिकारियों और कर्मियों के लिए यह जरूरी हो गया है कि वे तय तिथि से पहले अपने चल-अचल संपत्ति और दायित्वों का सही-सही विवरण उपलब्ध कराएं, ताकि किसी भी प्रकार की प्रशासनिक कार्रवाई से बचा जा सके।