ब्रेकिंग न्यूज़

Bihar Jail Reform : सिर्फ सजा नहीं ! बिहार की जेलें बन रही हैं नई शुरुआत का केंद्र. जानिए क्या है नया और ख़ास Neet Ug Exam 2026: ओपन बोर्ड के छात्र अब दे सकेंगे NEET UG परीक्षा, योग्यता नियमों में बड़ा बदलाव; नोटिफिकेशन जारी BPSC TRE-3 teacher transfer : 100–500 किमी दूर पोस्टेड शिक्षकों के लिए राहत वाली खबर, इस महीने के बाद बदलेगी तस्वीर; मंत्री का एलान Nawada Road Accident : तिलक समारोह जा रहे चाचा-भतीजा समेत 3 की दर्दनाक मौत, बिजली पोल से टकराई बाइक IRCTC ID Block News : रेलवे ने बदले ऑनलाइन टिकट बुकिंग के नियम, कई यूजर्स पर गिरेगी गाज; 24 घंटे के लिए बंद हो सकती है आपकी ID NEET Student Case : पटना नीट छात्रा मौत मामले में जांच तेज, फॉरेंसिक और डिजिटल सबूतों की दोबारा पड़ताल शुरू; जानिए क्या है नया अपडेट ALP Bharti 2026: युवाओं के लिए रेलवे में सरकारी नौकरी का सुनहरा अवसर, इतने पोस्ट पर जल्द जारी हो सकता है नोटिफिकेशन; यहां पढ़े वैकेंसी डिटेल Namo Bharat Train : 'अब मिनटों में तय होगा दिल्ली से मरेठ तक का सफ़र ...', PM मोदी आज करेंगे नमो भारत के फुल स्ट्रेच का शुभारंभ Bihar Transport Department : बिहार में 27 जिलों में खुलेंगे नए ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन, अनफिट गाड़ियों पर कसेगा शिकंजा Bihar Gram Kachahari : ग्राम कचहरी को मिले इतने मामलों में सुनवाई का अधिकार, अब गांव में ही होगा न्याय — जानिए क्या है पूरी खबर

Bihar Gram Kachahari : ग्राम कचहरी को मिले इतने मामलों में सुनवाई का अधिकार, अब गांव में ही होगा न्याय — जानिए क्या है पूरी खबर

ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम कचहरी को 40 धाराओं की सुनवाई का अधिकार। स्थानीय स्तर पर त्वरित, सुलभ और प्रभावी न्याय व्यवस्था को मिल रही मजबूती।

Bihar Gram Kachahari : ग्राम कचहरी को मिले इतने मामलों में  सुनवाई का अधिकार, अब गांव में ही होगा न्याय — जानिए क्या है पूरी खबर

22-Feb-2026 08:39 AM

By First Bihar

Bihar Gram Kachahari : ग्रामीण क्षेत्रों में त्वरित और सुलभ न्याय सुनिश्चित करने में ग्राम कचहरी की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। स्थानीय स्तर पर विवादों के समाधान की यह व्यवस्था न केवल न्याय प्रक्रिया को सरल बनाती है, बल्कि गांव के लोगों को उनके ही क्षेत्र में त्वरित राहत भी उपलब्ध कराती है। ग्राम कचहरी ग्रामीण न्याय प्रणाली की वह इकाई है, जहां छोटे आपराधिक एवं दीवानी प्रकृति के मामलों का निपटारा स्थानीय स्तर पर किया जाता है।


ग्राम कचहरी को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की 24 संज्ञेय और 16 असंज्ञेय अपराधों की कुल 40 धाराओं से संबंधित मामलों की सुनवाई का अधिकार प्राप्त है। इन धाराओं के अंतर्गत आने वाले मामलों में स्थानीय स्तर पर सुनवाई कर निर्णय लिया जा सकता है। इससे एक ओर न्यायालयों पर बोझ कम होता है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों को लंबी कानूनी प्रक्रिया से राहत मिलती है।


पंचायती राज विभाग द्वारा यह कहा गया है कि व्यवस्था के अनुसार यदि कोई मामला ग्राम कचहरी के अधिकार क्षेत्र में आता है, तो उससे संबंधित सभी आवश्यक दस्तावेज और अभिलेख थाने को हरहाल में ग्राम कचहरी को उपलब्ध करवाना होगा ताकि सुनवाई की प्रक्रिया बाधित न हो। इससे यह सुनिश्चित होगा कि ग्राम कचहरी अपने अधिकारों का प्रभावी ढंग से प्रयोग कर सके और न्याय वितरण की प्रक्रिया पारदर्शी एवं व्यवस्थित बनी रहे।


विभाग ने यह कहा कि नाबालिगों से जुड़े मामलों में ग्राम कचहरी के स्तर पर विशेष संवेदनशीलता बरतने की जरूरत है। बच्चों से संबंधित विवाद या अपराध की स्थिति में यदि किसी सामाजिक संस्थाओं के साथ समन्वय बनाना है तो इसे बनाकर त्वरित कार्रवाई और समुचित सुनवाई किया जाए। ग्राम कचहरी का दायित्व है कि ऐसे मामलों में पीड़ित पक्ष को सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण प्रदान किया जाए।


विभाग ने यह भी कहा कि ग्राम कचहरी का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य गांवों में आपसी सौहार्द बनाए रखना भी है। कई बार छोटे विवाद समय रहते सुलझा दिए जाएं तो वे बड़े सामाजिक तनाव में परिवर्तित नहीं होते। स्थानीय प्रतिनिधियों और न्याय पंचायत के सदस्यों की सक्रिय भूमिका से पारिवारिक, जमीन, आपसी झगड़े और अन्य सामान्य विवादों का समाधान संभव हो पाता है। इससे ग्रामीण समाज में शांति और सामंजस्य को बढ़ावा मिलता है।


विभाग ने बताया कि वर्तमान में हर चीज़ के लिए तकनीकी संसाधनों के उपयोग पर भी बल दिया जा रहा है ऐसे में ग्राम कचहरी में भी इसका उपयोग हो ताकि इसकी कार्यप्रणाली अधिक प्रभावी और पारदर्शी बन सके। डिजिटल साक्ष्य, सीसीटीवी फूटेज एव अन्य डिजिटल अभिलेख को व्यवस्थित उपयोग किया जाए ताकि न्याय प्रक्रिया को मजबूत बनाते हैं। इससे सुनवाई की गुणवत्ता में सुधार होता है और निर्णय अधिक तथ्यात्मक आधार पर लिए जा सकते हैं।


ग्राम कचहरी की सशक्त भूमिका ग्रामीण स्वशासन की भावना को भी मजबूती देती है। यह व्यवस्था संविधान में निहित विकेंद्रीकरण के सिद्धांत को व्यवहारिक रूप प्रदान करती है। गांव के स्तर पर ही न्याय उपलब्ध होने से लोगों का विश्वास प्रणाली में बढ़ता है और वे अपने विवादों को कानूनी दायरे में रहकर सुलझाने के लिए प्रेरित होते हैं।