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05-Feb-2026 08:40 AM
By First Bihar
Bihar Bhumi : बिहार में जमीन से जुड़े विवादों और कानूनी उलझनों को स्थायी रूप से समाप्त करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने स्पष्ट घोषणा की है कि राज्य में चल रहा विशेष भूमि सर्वेक्षण हर हाल में वर्ष 2027 तक पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि इस महत्वपूर्ण कार्य में अब किसी प्रकार की ढिलाई, लापरवाही या बहाना स्वीकार नहीं किया जाएगा।
2011 में शुरू हुई थी योजना, अब दिखेगा असर
विजय कुमार सिन्हा ने बताया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वर्ष 2011 में बिहार विशेष भूमि सर्वेक्षण योजना की शुरुआत की थी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य के भूमि अभिलेखों को अद्यतन करना, वास्तविक मालिकाना हक को स्पष्ट करना और वर्षों से चल रहे जमीन विवादों का समाधान करना था। लंबे समय से लंबित इस कार्य को अब सरकार तय समय सीमा में पूरा करने के लिए पूरी गंभीरता के साथ काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि भूमि सर्वेक्षण पूरा होने के बाद राज्य में जमीन से जुड़े मुकदमों में कमी आएगी और लोगों को अपनी जमीन के अधिकार को लेकर किसी प्रकार की अनिश्चितता का सामना नहीं करना पड़ेगा। इससे न केवल आम नागरिकों को राहत मिलेगी बल्कि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में भी पारदर्शिता आएगी।
पारदर्शी होगी पूरी प्रक्रिया
उपमुख्यमंत्री ने आम जनता को भरोसा दिलाया कि भूमि सर्वेक्षण की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से की जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी, त्रुटि या मनमानी सामने आती है तो नागरिक विभाग में लिखित शिकायत दर्ज करा सकते हैं। ऐसी शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी और दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार चाहती है कि यह सर्वे सुधार का माध्यम बने, न कि नए विवादों का कारण। इसलिए हर स्तर पर निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित की जा रही है।
पहले चरण में तेजी से हुआ काम
सरकारी आंकड़ों के अनुसार विशेष भूमि सर्वेक्षण के पहले चरण में 20 जिलों के 89 अंचलों में कार्य लगभग पूरा हो चुका है। किस्तवार का काम 99.92 प्रतिशत तक पूरा हो गया है, जबकि खानापुरी का कार्य 94.4 प्रतिशत तक संपन्न हो चुका है। इसके अलावा लगभग 31 प्रतिशत गांवों में अंतिम अधिकार अभिलेख प्रकाशित भी किए जा चुके हैं। यह उपलब्धि सरकार के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि लंबे समय से भूमि अभिलेखों के अद्यतन नहीं होने के कारण लोगों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था।
दूसरे चरण में भी तेजी
वहीं दूसरे चरण में भी कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। 36 जिलों के 444 अंचलों में हवाई सर्वेक्षण और ग्राम सभा की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। इस चरण में रैयतों से 2.70 करोड़ से अधिक स्वघोषणाएं प्राप्त हुई हैं, जो सर्वेक्षण प्रक्रिया को सफल बनाने में अहम भूमिका निभा रही हैं। सरकार का मानना है कि लोगों की भागीदारी से सर्वेक्षण प्रक्रिया अधिक प्रभावी और विश्वसनीय बनेगी। इसके लिए ग्रामीण स्तर पर जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं ताकि लोग सही जानकारी उपलब्ध करा सकें।
जमीन विवादों में आएगी कमी
भू-अभिलेख एवं परिमाप निदेशालय के अनुसार शुरुआती दौर में तकनीकी मार्गदर्शिका तैयार होने में देरी के कारण कार्य प्रभावित हुआ था, लेकिन अब प्रक्रिया ने रफ्तार पकड़ ली है। विभाग का दावा है कि सर्वेक्षण पूरा होने के बाद जमीन से जुड़े मुकदमों, धोखाधड़ी और भ्रम की समस्याओं में बड़ी कमी आएगी। भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण और सही सर्वेक्षण से राज्य में निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा। साथ ही किसानों और आम नागरिकों को अपनी जमीन से जुड़े अधिकार सुरक्षित करने में मदद मिलेगी।
राज्य सरकार का यह प्रयास बिहार में भूमि व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यदि यह योजना तय समय सीमा में पूरी हो जाती है तो इससे लाखों लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।
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