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03-Feb-2026 09:27 AM
By First Bihar
e-Registry Bihar : बिहार में जमीन से जुड़े दस्तावेजों की प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल होने जा रही है। नीतीश सरकार जून महीने से राज्य के निबंधन कार्यालयों में सुरक्षित 1908 से अब तक के रजिस्ट्री दस्तावेजों को ऑनलाइन उपलब्ध कराने जा रही है। इसका मतलब यह है कि अब लोग दादा-परदादा के जमाने के रजिस्ट्री पेपर निकालने के लिए कार्यालयों के चक्कर नहीं काटेंगे। यह कदम राज्य के मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग द्वारा उठाया गया है और स्कैनिंग प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, अगले तीन महीनों में 1908 से 1990 तक के दस्तावेजों की स्कैनिंग पूरी हो जाएगी। इसके बाद विभाग की आधिकारिक वेबसाइट https://nibandhan.bihar.gov.in पर 100 साल से पुराने दस्तावेज अपलोड कर दिए जाएंगे। उल्लेखनीय है कि 1990 से 2005 तक के रजिस्ट्री पेपर पहले ही स्कैन किए जा चुके हैं, जबकि 2006 के बाद की रजिस्ट्री प्रक्रिया पहले से कंप्यूटराइज्ड है।
ऑनलाइन दस्तावेज प्राप्त करने के लिए आवेदक को खाता नंबर, प्लॉट नंबर सहित आवश्यक जानकारी भरनी होगी। इसके बाद 600 रुपये का शुल्क ऑनलाइन जमा करना होगा। शुल्क जमा होते ही ई-रजिस्ट्री पेपर डाउनलोड किया जा सकेगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह डाउनलोड किया गया रजिस्ट्री पेपर सरकारी और निजी, दोनों प्रकार के कार्यों में पूरी तरह मान्य होगा।
राज्य के 141 निबंधन कार्यालयों में लगभग 6 करोड़ दस्तावेज सुरक्षित हैं। इन्हें चरणबद्ध तरीके से डिजिटल किया जा रहा है। वर्ष 1908 से 1990 तक के लगभग 82 वर्षों के दस्तावेजों की स्कैनिंग फिलहाल चल रही है। इस काम के लिए पांच चयनित एजेंसियां प्रमंडलवार काम कर रही हैं। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर राज्य और केंद्र सरकार संयुक्त रूप से खर्च वहन कर रही हैं।
पुराने दस्तावेजों के लिए मैनुअल आवेदन प्रक्रिया अब खत्म हो जाएगी। इससे लोगों को महीनों तक कार्यालयों के चक्कर काटने की समस्या से निजात मिलेगी। ऑनलाइन व्यवस्था के लागू होने के बाद जमीन विवाद, बैंक लोन, कोर्ट केस या पारिवारिक बंटवारे जैसे मामलों में रजिस्ट्री दस्तावेज निकालना आसान और पारदर्शी हो जाएगा।
ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया भी सरल है। आवेदक को विभागीय वेबसाइट पर नाम, ई-मेल आईडी और मोबाइल नंबर से लॉगिन करना होगा। इसके बाद आवश्यक विवरण भरकर शुल्क जमा करने पर रजिस्ट्री दस्तावेज तुरंत डाउनलोड किया जा सकेगा। इस डिजिटल पहल से बिहार में जमीन संबंधी दस्तावेजों की पहुंच हर किसी के लिए आसान और समय की बचत करने वाली बन जाएगी।
इस तरह, नीतीश सरकार का यह कदम नागरिकों के लिए पारदर्शिता और सुविधा बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव साबित होगा। अब 100 साल पुराने दस्तावेज भी महज एक क्लिक पर उपलब्ध होंगे, जिससे लोगों की सबसे बड़ी परेशानी खत्म हो जाएगी।