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17-Dec-2025 11:05 AM
By First Bihar
Bihar schools : बिहार में सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति को सुधारने के लिए राज्य सरकार ने एक बार फिर नई पहल शुरू की है। खास तौर पर उन विद्यालयों को लेकर सरकार गंभीर हुई है, जहां अब तक चहारदीवारी और पीने के स्वच्छ पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। शिक्षा विभाग ने सभी जिलों के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि ऐसे सरकारी स्कूलों को चिन्हित कर उनकी विस्तृत सूची जल्द से जल्द विभाग को भेजी जाए, ताकि वहां आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
शिक्षा विभाग की ओर से जारी इस आदेश का मुख्य उद्देश्य स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को किसी भी प्रकार की परेशानी और असुरक्षा से बचाना है। विभाग का मानना है कि चहारदीवारी नहीं होने से जहां एक ओर स्कूल परिसरों की सुरक्षा पर सवाल उठते हैं, वहीं पीने के पानी की सुविधा के अभाव में बच्चों के स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक असर पड़ता है। इसी को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है।
राज्य सरकार लगातार यह दावा करती रही है कि बिहार में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए बड़े स्तर पर काम किया गया है। सरकार के अनुसार, लगभग हर पंचायत स्तर पर उच्च माध्यमिक विद्यालय तक की व्यवस्था कर दी गई है और अधिकतर स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा चुकी हैं। बावजूद इसके, जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर पेश कर रही है। कई जिलों और ग्रामीण इलाकों से ऐसी शिकायतें सामने आ रही हैं, जहां आज भी स्कूल बिना चहारदीवारी के चल रहे हैं और बच्चों को पीने के लिए सुरक्षित पानी तक उपलब्ध नहीं है।
इन शिकायतों ने सरकार के बड़े-बड़े दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अभिभावकों और स्थानीय लोगों का कहना है कि सुविधाओं के नाम पर कई जगह केवल कागजी खानापूर्ति की गई है। कुछ स्कूलों में भवन तो बना दिया गया, लेकिन सुरक्षा और बुनियादी जरूरतों पर ध्यान नहीं दिया गया। कहीं शौचालय खराब हालत में हैं तो कहीं बिजली की व्यवस्था नहीं है। इन्हीं कारणों से शिक्षा विभाग को एक बार फिर समीक्षा कर नया आदेश जारी करना पड़ा है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी सरकारी विद्यालयों में पीने के लिए स्वच्छ पानी, कार्यशील शौचालय, बिजली की व्यवस्था और चहारदीवारी सुनिश्चित करना प्राथमिकता में है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, हाल के वर्षों में कई प्राथमिक और मध्य विद्यालयों को माध्यमिक या उच्च माध्यमिक विद्यालय में अपग्रेड किया गया है। अपग्रेडेशन के बाद छात्र-छात्राओं की संख्या तो बढ़ी, लेकिन कई जगह सुविधाएं उसी अनुपात में विकसित नहीं हो पाईं।
शिक्षा विभाग का कहना है कि जैसे ही जिलों से ऐसे स्कूलों की सूची प्राप्त होगी, वहां चरणबद्ध तरीके से सुविधाएं उपलब्ध कराने का काम शुरू कर दिया जाएगा। इसके लिए आवश्यक बजट और प्रशासनिक प्रक्रिया भी तेज की जा रही है। विभाग यह भी सुनिश्चित करना चाहता है कि भविष्य में किसी भी विद्यालय को बिना बुनियादी सुविधाओं के संचालित न किया जाए।
इस पूरे मामले पर बिहार के शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने कहा कि सरकार शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयासरत है। उन्होंने कहा, “विद्यालयों में सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिसके चलते छात्र-छात्राओं की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है। जिन विद्यालयों में अभी चहारदीवारी और पानी की व्यवस्था नहीं है, वहां इसे जल्द से जल्द उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं।”
हालांकि सरकार यह भी मानती है कि अभी भी कुछ विद्यालय ऐसे हैं, जो बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। ऐसे स्कूलों को चिन्हित कर उन्हें प्राथमिकता के आधार पर सुविधाएं देने की योजना बनाई गई है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह पहल ईमानदारी से लागू होती है, तो इससे न केवल स्कूलों की स्थिति सुधरेगी, बल्कि बच्चों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और पढ़ाई के माहौल पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा।
कुल मिलाकर, बिहार सरकार की यह नई पहल एक बार फिर शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत को सामने लाती है। अब देखने वाली बात यह होगी कि जिलों से मिलने वाली सूचियों के बाद सरकार कितनी तेजी और पारदर्शिता के साथ इन कमियों को दूर कर पाती है। यदि योजनाएं समय पर जमीन पर उतरती हैं, तो निश्चित रूप से बिहार के सरकारी स्कूलों की सूरत और शिक्षा का स्तर दोनों बेहतर हो सकते हैं।