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Bihar News: लाइट… कैमरा… एक्शन! बिहार बन रहा है फिल्म शूटिंग का नया हॉटस्पॉट, जानिए... क्यों आ रहे हैं फिल्मकार यहां

Bihar News: बिहार में इन दिनों "लाइट, कैमरा, एक्शन" की गूंज सुनाई दे रही है.अब 4 महीने में 14 फिल्मों की शूटिंग होने के लिए बिहार तैयार है. जानें... लोकेशन.

02-Jun-2025 10:41 AM

By First Bihar

Bihar News: लाइट… कैमरा… एक्शन। ये शब्द अब सिर्फ मुंबई की स्टूडियो तक सीमित नहीं रहे। बिहार की गलियों, घाटों और ऐतिहासिक विरासतों में भी इनकी गूंज सुनाई दे रही है। इसका श्रेय जाता है बिहार सरकार की नई फिल्म पॉलिसी को, जिसने राज्य को हिंदी, भोजपुरी, मैथिली, मगही और यहां तक कि अंग्रेजी फिल्मों के लिए भी एक लोकप्रिय शूटिंग डेस्टिनेशन बना दिया है।


पिछले 4 महीनों के भीतर ही बिहार में 14 फिल्मों की शूटिंग की अनुमति दी गई है। इनमें से कुछ की शूटिंग पूरी हो चुकी है और कुछ पर कार्य जारी है। शूटिंग नालंदा, नवादा, गया, पटना, बगहा, रोहतास, वैशाली, सीतामढ़ी, दरभंगा और जहानाबाद जैसे जिलों में हो रही है। हाल ही में बॉलीवुड अभिनेता पंकज त्रिपाठी की फिल्म "ओह माय डॉग (सेनापति)" की शूटिंग पटना की ऐतिहासिक गलियों और धरोहर स्थलों पर हुई। इसके अलावा, अभिनेता राजकुमार राव ने भी मई महीने में पटना का दौरा किया और यहां शूटिंग की इच्छा जताई।


4 महीनों के भीतर ही बिहार में 14 फिल्मों की शूटिंग में ये फिल्में शामिल है-
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1922 में बने इस महल की खूबसूरत नक्काशी और शाही वास्तुकला फिल्म निर्माताओं को आकर्षित कर रही है। जल्द ही इसे हेरिटेज होटल में बदलने की योजना है। 1786 में अनाज भंडारण के लिए बने इस गोलाकार भवन पर फिल्म निर्देशक कैमरे सेट कर रहे हैं। इसके ऊपर से पटना का विहंगम दृश्य दिखाई देता है। यह लोकेशन अब “पटना का मरीन ड्राइव” कहा जा रहा है और यहां कई हिंदी और भोजपुरी फिल्मों की शूटिंग हो रही है।


483 किलोमीटर लंबी हरी-भरी पहाड़ियों में अब नक्सलियों की जगह कैमरा और क्रू नजर आते हैं। यह क्षेत्र अब फिल्मों का नया आकर्षण केंद्र बन गया है। राजगीर की घाटियों में घोड़ा-कटोरा, ग्लास ब्रिज और वाइल्डलाइफ सफारी वाले क्षेत्र भी शूटिंग के लिए लोकप्रिय हो रहे हैं। यहां पर हिंदी फिल्म "टिया" की शूटिंग चल रही है, जिसमें जंगल की थीम को ध्यान में रखा गया है। फिल्मकार हैदर काज़मी द्वारा विकसित जहानाबाद फिल्म सिटी अब भोजपुरी और हिंदी फिल्मों की शूटिंग का केंद्र बन चुकी है। यहां "पेन ब्रश", "कन्या धन" जैसी फिल्मों की शूटिंग हो चुकी है। हैदर बताते हैं कि इस फिल्म सिटी को खड़ा करने में 12 साल का समय लगा। नालंदा विश्वविद्यालय का खंडहर यह दुनिया का पहला आवासीय विश्वविद्यालय रहा है। गुप्त साम्राज्य में निर्मित यह स्थल अब ऐतिहासिक फिल्मों की पसंद बन गया है।


बौद्ध धर्म का यह प्रमुख तीर्थस्थल महाबोधि मंदिर के कारण पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। यहां पर भी फिल्मों की शूटिंग बढ़ रही है। मनोकामना मंदिर परिसर, दरभंगा में पूरी तरह से फिल्माई गई फिल्म "रजनी की बारात" में उल्का गुप्ता ने मुख्य भूमिका निभाई है। फिल्म का निर्देशन दरभंगा के आदित्य अमन और निर्माण एपिफेनी एंटरटेनमेंट द्वारा किया गया है।


नई फिल्म नीति से राज्य में फिल्म निर्माण के क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़े हैं। इसके अलावा, फिल्म निर्माण से जुड़े पाठ्यक्रमों में बिहार के छात्रों को पुणे फिल्म संस्थान, सत्यजीत रे फिल्म संस्थान और राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में अध्ययन के लिए छात्रवृत्तियां प्रदान की जा रही हैं। बिहार की नई फिल्म प्रोत्साहन नीति राज्य में फिल्म निर्माण के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला रही है। यह नीति राज्य की सांस्कृतिक धरोहर को प्रदर्शित करने, रोजगार सृजन और फिल्म निर्माण के बुनियादी ढांचे के विकास में सहायक सिद्ध हो रही है।


राज्य सरकार 75% या उससे अधिक शूटिंग बिहार में करने पर 4 करोड़ रुपए तक की सब्सिडी दे रही है। पॉलिसी के तहत शूटिंग के लिए सिंगल विंडो क्लीयरेंस, टैक्स में छूट, और स्थानीय कलाकारों को प्राथमिकता मिल रही है। कला-संस्कृति विभाग की निदेशक IAS रूबी के मुताबिक, इस नीति से फिल्मकारों का विश्वास और रुझान बिहार के प्रति तेजी से बढ़ा है। बिहार अब कहानियों का राज्य ही नहीं, बल्कि लोकेशन का हब बनता जा रहा है। सरकारी नीतियों, विरासत स्थलों और प्राकृतिक सौंदर्य के मेल ने इसे भारतीय फिल्म उद्योग का नया सितारा बना दिया है।