ब्रेकिंग न्यूज़

Bihar Budget Session : वित्त मंत्री विजेंद्र यादव थोड़ी देर में पेश करेंगे आम बजट, लाल सूटकेस लेकर पहुंचे सदन Patna News: पटना में स्नातक पैरामेडिकल छात्रों का प्रदर्शन, स्टाइपेंड व कैडर गठन की उठी मांग Patna News: पटना में स्नातक पैरामेडिकल छात्रों का प्रदर्शन, स्टाइपेंड व कैडर गठन की उठी मांग Patna bullet train : वाराणसी से पटना का सफर सिर्फ 1 घंटे में! बिहार को पहली बुलेट ट्रेन की सौगात, सिलीगुड़ी तक चलेगी Bihar News: बिहार पुलिस ने पेश की मानवता की मिसाल, नदी में छलांग लगाने जा रही महिला और उसके बच्चे की बचाई जान Patna traffic : पटना में जाम से मिलेगी राहत: ट्रैफिक पुलिस का नया मास्टरप्लान, यू-टर्न और कट होंगे बंद Bihar doctor salary hike : बिहार में डॉक्टरों का वेतन बढ़ा, रिमोट इलाकों में काम करने वालों को भी बढ़ेगा प्रोत्साहन राशि Bihar Crime News: आखिरकार एकसाथ कहां चली गईं इस गांव की पांच लड़कियां? परिजनों में मचा हड़कंप Bihar Crime News: आखिरकार एकसाथ कहां चली गईं इस गांव की पांच लड़कियां? परिजनों में मचा हड़कंप Bihar Legislative Council : बिहार विधान परिषद में स्वास्थ्य विभाग की बदहाली पर विपक्ष ने उठाया सवाल, कहा- आँख के इलाज के लिए जाता होता है दिल्ली, मंत्री का जवाब - आप खुद इलाज करवाने के लिए मुझसे करवाते हैं पैरवी

Bihar News: "न कोई चापाकल, न एक भी सरकारी नल" बिहार के इस गाँव में पेयजल की समस्या से लोग परेशान; प्रशासन पर लगे गंभीर आरोप

Bihar News: पश्चिम चंपारण के रामनगर प्रखंड के अवरहिया गांव में 500 लोग एक हैंडपंप पर निर्भर, महिलाएं रोज 2 किमी दूर जाकर लाती हैं पानी। प्रशासन पर लगे गंभीर आरोप..

Bihar News

17-Dec-2025 10:57 AM

By First Bihar

Bihar News: पश्चिम चंपारण जिले के रामनगर प्रखंड में स्थित अवरहिया गांव की स्थिति बेहद दयनीय है। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से सटा यह गांव करीब 80 घरों और 500 लोगों की आबादी वाला है, लेकिन यहां पानी की बुनियादी सुविधा का अभाव है। एक भी चापाकल या सरकारी नल नहीं होने से ग्रामीणों को रोज 2 किलोमीटर दूर नदी किनारे एकमात्र हैंडपंप से पानी लाना पड़ता है। यह समस्या राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों से भी बदतर लगती है, जहां पानी के लिए मीलों पैदल चलना आम है।


गांव के पुरुष साइकिल पर गैलन बांधकर पानी लाते हैं और इन्हें रोज 10 चक्कर लगाने पड़ते हैं। महिलाओं की हालत और खराब है, क्योंकि पुरुष मजदूरी पर बाहर जाते हैं तो घर की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ जाती है। सूरज निकलने से पहले वे नदी किनारे पहुंचती हैं, नहाने-धोने के बाद भारी बर्तन सिर पर उठाकर लौटती हैं। यह सिलसिला दिन भर चलता रहता है, जिससे स्वास्थ्य और समय दोनों प्रभावित होते हैं।


ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने कई बार प्रशासन से चापाकल या नल-जल योजना की मांग की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। प्रशासन का कहना है कि गांव विस्थापित परिवारों का है और टाइगर रिजर्व से सटा होने से वन विभाग की अनुमति जरूरी है। पुनर्वास का प्रस्ताव ग्रामीणों ने ठुकरा दिया। लेकिन सवाल है कि जल जीवन मिशन के दावों के बावजूद यह गांव पानी के लिए क्यों तरस रहा है?


यह स्थिति न केवल शारीरिक परेशानी की है, बल्कि महिलाओं और बच्चों की शिक्षा पर भी असर डाल रही है। प्रशासन को इस समस्या पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए, ताकि अवरहिया जैसे गांवों में बुनियादी सुविधाएं पहुंच सकें। उम्मीद है कि जल्द ठोस कदम उठाए जाएंगे और ग्रामीणों को इस मजबूरी से मुक्ति मिलेगी।