ब्रेकिंग न्यूज़

बिहार में अपराधियों के लिए अब कोई राह नहीं… डीजीपी विनय कुमार का बड़ा ऐलान: 13 फॉरेंसिक लैब चालू, DNA जांच का भी विशेष इंतजाम Bihar Transport News: परिवहन विभाग के 17 ADTO-MVI की बल्ले-बल्ले...प्रमोशन देकर बनाया गया DTO, लिस्ट देखें.... बिहार में 7 साल की मासूम का अपहरण, बदमाशों ने मांगी 5 लाख की फिरौती; प्रेम प्रसंग का एंगल भी आया सामने 32 साल पुराने केस में बिहार की कोर्ट का सख्त रूख, 11 पुलिसकर्मियों के खिलाफ जारी किया वारंट 32 साल पुराने केस में बिहार की कोर्ट का सख्त रूख, 11 पुलिसकर्मियों के खिलाफ जारी किया वारंट क्रेडिट कार्ड का बिल नहीं भरा तो क्या पुलिस करेगी गिरफ्तार? जानिए सच्चाई, वरना पड़ सकते हैं बड़ी मुसीबत में बिहार में रिश्तों का कत्ल: भूमि विवाद में चाचा ने पीट-पीटकर ले ली भतीजे की जान, तीन लोग बुरी तरह से घायल बिहार में रिश्तों का कत्ल: भूमि विवाद में चाचा ने पीट-पीटकर ले ली भतीजे की जान, तीन लोग बुरी तरह से घायल Bihar accident : GT Road पर बड़ा हादसा: हाइवा की टक्कर से बच्चों से भरी टोटो पलटी, कई घायल गैस की कमी पर सड़क जाम! रोहतास में उपभोक्ताओं का गुस्सा फूटा, रात 2 बजे से लाइन में खड़े लोगों ने सिलेंडर रख कर रोका मार्ग

Home / bihar / Bihar News : जाते -जाते CM नीतीश ने बिजली उपभोक्ताओं को दी बड़ी...

Bihar News : जाते -जाते CM नीतीश ने बिजली उपभोक्ताओं को दी बड़ी राहत ! अब अफसरों ने किया यह काम तो लगेगा 1000 रुपए का जुर्माना; पढ़ें पूरी खबर

बिहार सरकार ने बिजली उपभोक्ताओं को राहत देते हुए बड़ा फैसला लिया है। अब तय समय पर सेवा नहीं देने पर अधिकारियों पर रोजाना जुर्माना लगेगा, जिससे व्यवस्था में सुधार की उम्मीद है।

07-Apr-2026 10:25 AM

By First Bihar

Bihar News : बिहार में बिजली उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए मुख्यमंत्री Nitish Kumar ने अपने कार्यकाल के अंतिम चरण में एक बड़ा और सख्त फैसला लिया है। मंगलवार सुबह जारी निर्देश में उन्होंने बिजली विभाग के अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए स्पष्ट कर दिया कि अब लापरवाही किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अगर उपभोक्ताओं को समय पर सेवा नहीं मिलती है, तो संबंधित अधिकारियों पर प्रतिदिन 1000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा।


सरकार के इस फैसले का सीधा मकसद बिजली सेवाओं को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और उपभोक्ता-केंद्रित बनाना है। लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि बिजली कनेक्शन देने में अनावश्यक देरी होती है और आम लोगों को बार-बार दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री ने सख्त रुख अपनाते हुए समय-सीमा तय कर दी है, ताकि लोगों को राहत मिल सके।


नए आदेश के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में बिजली कनेक्शन अधिकतम 3 दिनों के भीतर देना अनिवार्य होगा। वहीं अन्य शहरी इलाकों में यह समय सीमा 7 दिन निर्धारित की गई है। ग्रामीण क्षेत्रों के लिए सरकार ने 15 दिन का समय तय किया है। यदि इन तय समयसीमाओं का पालन नहीं किया गया, तो संबंधित अधिकारी को हर दिन 1000 रुपये का आर्थिक दंड भुगतना पड़ेगा। इस कदम से विभागीय सुस्ती पर लगाम लगाने और कार्यप्रणाली में तेजी लाने की उम्मीद जताई जा रही है।


सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था से न केवल उपभोक्ताओं को समय पर सेवाएं मिलेंगी, बल्कि अधिकारियों में भी जिम्मेदारी का भाव विकसित होगा। साथ ही, यह निर्णय बिजली विभाग की छवि सुधारने में भी मददगार साबित हो सकता है, जो अक्सर देरी और लापरवाही के आरोपों से घिरा रहता है।


इसी के साथ राज्य में बिजली बिलिंग व्यवस्था में भी अहम बदलाव किया गया है। स्मार्ट प्रीपेड मीटर वाले उपभोक्ताओं के लिए ‘टाइम ऑफ डे’ (ToD) टैरिफ लागू कर दिया गया है। इस नई प्रणाली के तहत दिन के अलग-अलग समय में बिजली की दरें अलग-अलग होंगी, जिससे उपभोक्ताओं को अपने उपयोग के अनुसार खर्च नियंत्रित करने का अवसर मिलेगा।


नई व्यवस्था के अनुसार, सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक बिजली अपेक्षाकृत सस्ती रहेगी। इस दौरान बिजली का उपयोग करने पर उपभोक्ताओं को लगभग 20 प्रतिशत तक की छूट मिलेगी। वहीं शाम 5 बजे से रात 11 बजे तक का समय पीक आवर माना जाएगा, जिसमें बिजली दरें करीब 10 प्रतिशत अधिक होंगी। रात 11 बजे से सुबह 9 बजे तक सामान्य दरें लागू रहेंगी।


ऊर्जा विभाग का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य बिजली खपत को संतुलित करना और पीक समय में लोड कम करना है। इससे न केवल बिजली व्यवस्था पर दबाव कम होगा, बल्कि उपभोक्ताओं को भी अपनी आदतों में बदलाव कर बचत करने का मौका मिलेगा।


कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री का यह फैसला राज्य के लाखों बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। सख्त नियमों और नई तकनीकी व्यवस्था के जरिए सरकार ने यह संकेत दिया है कि अब सेवा में देरी और लापरवाही के लिए कोई जगह नहीं है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस फैसले का जमीनी स्तर पर कितना असर पड़ता है।