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18-Mar-2026 10:28 PM
By First Bihar
Chaitra Navratri: कल गुरुवार 19 मार्च से चैत्र नवरात्र की शुरुआत होने वाली है। कलश स्थापना के लिए दो शुभ मुहूर्त बताए गये हैं। पहला शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 52 मिनट से 7 बजकर 43 मिनट तक है। वही दूसरा शुभ मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 05 मिनट से दोपहर 12 बजकर 53 मिनट के बीच है।
बता दें कि गुरुवार 19 मार्च से शुरू होने वाले चैत्र नवरात्र इस बार 19 मार्च से लेकर 27 मार्च तक रहेगा। इस दौरान नवरात्र में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों का पूजा किया जाएगा। जिसकी शुरुआत चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि पर कलश स्थापना के साथ होगी। कलश स्थापना के बाद ही लोग उपवास और देवी की विधिवत पूजा शुरू करेंगे। घर में पूरे नौ दिनों तक सात्विकता और शुद्धि का ख्याल रखा जाएगा। अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्या पूजन के बाद पारण किया जाएगा।
देवी पुराण के अनुसार, माता रानी जब पालकी में बैठकर आती हैं, तो इसे देश-दुनिया के लिए अच्छा संकेत नहीं माना जाता है. मान्यता है कि देवी की यह सवारी रोग-बीमारियों के फैलने का संकेत देती है. धन, कारोबार या अर्थव्यवस्था के लिहाज से भी इसे अच्छा नहीं माना जाता है.
19 मार्च से शुरू हो रहे चैत्र नवरात्र में मां दुर्गा डोली या पालकी में सवार होकर आने वाली हैं। नवरात्र में देवी की सवारी वार के हिसाब से तय होती है. जब भी नवरात्र गुरुवार या शुक्रवार से शुरू होते हैं तो मां दुर्गा पालकी में सवार होकर आती हैं।
देवी पुराण के अनुसार, माता रानी जब पालकी में बैठकर आती हैं, तो इसे देश-दुनिया के लिए अच्छा संकेत नहीं माना जाता है. मान्यता है कि देवी की यह सवारी रोग-बीमारियों के फैलने का संकेत देती है. धन, कारोबार या अर्थव्यवस्था के लिहाज से भी इसे अच्छा नहीं माना जाता है। माता जब सोमवार-रविवार को पधारती हैं तो उनका वाहन हाथी होता है। शनिवार-मंगलवार को देवी घोड़े पर सवार होकर आती हैं। और गुरुवार-शुक्रवार देवी डोली या पालकी में बैठकर आती हैं। बुधवार को उनका वाहन नाव या नौका माना जाता है।
नवरात्र के 9 दिन 9 देवियों की पूजा
गुरुवार, 19 मार्च - मां शैलपुत्री
शुक्रवार, 20 मार्च - मां ब्रह्मचारिणी
शनिवार, 21 मार्च - मां चंद्रघंटा
रविवार, 22 मार्च - मां कूष्मांडा
सोमवार, 23 मार्च - मां स्कंदमाता
मंगलवार, 24 मार्च - मां कात्यायनी
बुधवार, 25 मार्च - मां कालरात्रि
गुरुवार, 26 मार्च - मां महागौरी
शुक्रवार, 27 मार्च - मां सिद्धिदात्री