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03-Apr-2026 10:13 AM
By First Bihar
Bihar land : गोपालगंज जिले में जमीन कब्जाने वाले एक संगठित गिरोह का बड़ा खुलासा हुआ है। कुचायकोट थाना क्षेत्र के बेलवा गांव में फायरिंग और जबरन कब्जे की कोशिश के मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए भोला पांडेय उर्फ राकेश पांडेय समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले में कुचायकोट के जेडीयू विधायक अमरेंद्र कुमार पांडेय और उनके भाई सतीश पांडेय के खिलाफ भी गंभीर आरोपों के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई है। इस कार्रवाई के बाद जिले में भू-माफियाओं के नेटवर्क को लेकर हड़कंप मच गया है।
पुलिस अधीक्षक विनय तिवारी के अनुसार, यह गिरोह लंबे समय से फर्जी दस्तावेज तैयार कर भोले-भाले ग्रामीणों की जमीन हड़पने का काम कर रहा था। प्रारंभिक जांच और गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। एसपी ने साफ कहा कि इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच की जा रही है और इसमें शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे उसका राजनीतिक या सामाजिक प्रभाव कितना भी बड़ा क्यों न हो।
घटना 1 अप्रैल की बताई जा रही है। मीरगंज थाना क्षेत्र के सेमराव गांव निवासी जितेंद्र कुमार राय अपनी जमीन पर लगी गेहूं की फसल देखने के लिए बेलवा गांव पहुंचे थे। इसी दौरान भोला पांडेय अपने साथियों के साथ चार मोटरसाइकिलों पर वहां पहुंचा। सभी के हाथों में हथियार थे। आरोपियों ने पहुंचते ही गाली-गलौज शुरू कर दी और जमीन खाली करने का दबाव बनाने लगे। जब पीड़ित ने विरोध किया, तो आरोपियों ने फायरिंग शुरू कर दी, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई।
पीड़ित के अनुसार, हमलावरों ने जमीन पर बने पांच कमरों के ताले तोड़ दिए और कब्जा करने की कोशिश की। किसी तरह जान बचाकर वह और उनका सहयोगी वहां से भाग निकले और तुरंत पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आई और एसडीपीओ सदर वन के नेतृत्व में टीम मौके पर पहुंची। कुचायकोट थाना प्रभारी और अन्य पुलिसकर्मियों ने कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को हथियारों के साथ गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान भोला पांडेय, गुड्डू कुमार, दीपक कुमार और नीतीश कुमार के रूप में हुई है। इनके पास से मोबाइल फोन भी बरामद किए गए हैं, जिनकी जांच में कई अहम सुराग मिले हैं। पुलिस का मानना है कि ये आरोपी अकेले काम नहीं कर रहे थे, बल्कि इनके पीछे किसी प्रभावशाली ‘सफेदपोश’ व्यक्ति का संरक्षण है, जिसकी पहचान करने के लिए जांच जारी है।
एसपी विनय तिवारी ने बताया कि यह गिरोह एक सुनियोजित तरीके से काम करता था। पहले फर्जी कागजात तैयार किए जाते थे, फिर उसी आधार पर जमीन की फर्जी रजिस्ट्री और जमाबंदी कराई जाती थी। इसके बाद दबंगई और हथियारों के बल पर जमीन पर कब्जा कर लिया जाता था। उन्होंने कहा कि यह केवल एक मामला नहीं है, बल्कि संभव है कि इस तरह के कई और मामले जिले में सामने आएं।
पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि यदि किसी की जमीन पर इस तरह से कब्जा किया गया है या कब्जे की कोशिश हुई है और अब तक कार्रवाई नहीं हो पाई है, तो वे सीधे एसपी कार्यालय, एसडीपीओ कार्यालय या संबंधित थाना में आवेदन दें। सभी मामलों की जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और कब्जाई गई जमीन को मुक्त कराने का प्रयास किया जाएगा।
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने आर्थिक पहलुओं की भी जांच शुरू कर दी है। एसपी ने बताया कि डीएसपी साइबर को निर्देश दिया गया है कि आरोपियों की चल-अचल संपत्तियों का आकलन किया जाए। साथ ही, मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से भी जांच की जाएगी। इसके लिए प्रवर्तन निदेशालय (ED) को भी पत्र लिखने की तैयारी की जा रही है, ताकि अवैध तरीके से अर्जित संपत्ति को जब्त किया जा सके।
पुलिस का कहना है कि इस गिरोह का मुख्य उद्देश्य गरीब और कमजोर लोगों को निशाना बनाना था। उन्हें औने-पौने दाम पर जमीन बेचने के लिए मजबूर किया जाता था, और बाद में उसी जमीन को ऊंचे दाम पर बेचकर मोटा मुनाफा कमाया जाता था। इस पैसे का इस्तेमाल नेटवर्क को मजबूत करने और सामाजिक छवि बनाने में किया जाता था। फिलहाल पुलिस पूरे गिरोह की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।