बिहार में खाकी की सौदेबाज़ी! शराब तस्करी का काला सच उजागर, वायरल वीडियो ने पुलिस-माफिया गठजोड़ की परतें खोली बिहार में खाकी की सौदेबाज़ी! शराब तस्करी का काला सच उजागर, वायरल वीडियो ने पुलिस-माफिया गठजोड़ की परतें खोली Bihar Politics: चोट जब दिल पर लगती है तो दर्द बेइंतेहा होता है.., क्यों इमोशनल हुईं रोहिणी आचार्य? Bihar Politics: चोट जब दिल पर लगती है तो दर्द बेइंतेहा होता है.., क्यों इमोशनल हुईं रोहिणी आचार्य? Bihar crime : बिहार में बेख़ौफ़ हुए अपराधी ! राजधानी से सटे इलाके में युवक की हत्या, इलाके में हडकंप NEET छात्रा मौत मामला: पटना हाईकोर्ट ने मामले में फिलहाल हस्तक्षेप से किया इनकार, दिया यह विकल्प NEET छात्रा मौत मामला: पटना हाईकोर्ट ने मामले में फिलहाल हस्तक्षेप से किया इनकार, दिया यह विकल्प Patna Airport : पटना से उड़ेगा इंटरनेशनल फ्लाइट, एयरपोर्ट पर लगेगा रडार; जानिए क्या है पूरी खबर Bihar Crime News: बिहार में UP के BPSC शिक्षक ने क्यों लगाया मौत को गले? वजह तलाश रही पुलिस Vijay Kumar Sinha: ‘दवा हो रहा है और उसका असर भी दिख रहा है’, CO की हड़ताल पर बोले डिप्टी सीएम विजय सिन्हा
02-Feb-2026 01:08 PM
By FIRST BIHAR
Bihar News: बिहार के गयाजी से ट्रैफिक पुलिस और ऑनलाइन चालान सिस्टम की गंभीर लापरवाही को उजागर करने वाला एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। वैशाली जिले के लालगंज निवासी आनंद प्रकाश की स्कॉर्पियो उस समय उनके घर पर खड़ी थी, लेकिन उसी नंबर पर गयाजी में बिना हेलमेट और बदतमीजी का 1500 रुपये का चालान काट दिया गया।
हैरानी की बात यह है कि स्कॉर्पियो चार पहिया वाहन है, जबकि चालान दो पहिया वाहन का दर्ज किया गया। आनंद प्रकाश को इस गलती की जानकारी तब हुई, जब वे वैशाली में अपनी गाड़ी का इंश्योरेंस और पॉल्यूशन सर्टिफिकेट बनवाने पहुंचे। सिस्टम में जांच के दौरान पता चला कि वाहन नंबर पर पुराना चालान लंबित है।
चालान भुगतान के बिना न इंश्योरेंस हो सका और न ही पॉल्यूशन प्रमाण पत्र। मजबूरी में उन्हें 155 किलोमीटर की दूरी तय कर गयाजी आना पड़ा। पीड़ित का कहना है कि चालान बीते वर्ष फरवरी का है, जबकि उस समय वे गयाजी आए ही नहीं थे। उनकी स्कॉर्पियो पूरे समय वैशाली में थी। इसके बावजूद बाइक से जुड़ा चालान उनके वाहन नंबर पर दर्ज कर दिया गया।
आनंद प्रकाश ने इसे आर्थिक और मानसिक प्रताड़ना बताया। मामले को लेकर ट्रैफिक डीएसपी मनोज कुमार से संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी। यह घटना ट्रैफिक व्यवस्था और ऑनलाइन चालान सिस्टम की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
रिपोर्ट- नितम राज, गयाजी