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17-Feb-2026 07:59 AM
By First Bihar
Bihar Vidhan Sabha : बिहार विधानसभा के बजट सत्र का आज 11वां दिन काफी हंगामेदार रहने के आसार हैं। आरक्षण समेत कई अहम मुद्दों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है। एक तरफ जहां लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने दलित नेता रामविलास पासवान को लेकर राष्ट्रीय जनता दल पर हमला तेज कर दिया है, वहीं राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस आरक्षण की सीमा बढ़ाने के मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी में है। इन मुद्दों को लेकर सदन का माहौल गर्म रहने की संभावना जताई जा रही है।
सोमवार को भी सदन की कार्यवाही काफी गरमागरम रही थी। दूसरे सत्र के दौरान माहौल उस समय ज्यादा तनावपूर्ण हो गया जब राजू तिवारी और कुमार सर्वजीत के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। दोनों नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया, जिससे सदन में कुछ समय के लिए हंगामे की स्थिति बन गई।
राजू तिवारी ने अपने संबोधन के दौरान विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष सदन का आईना माना जाता है, लेकिन विपक्ष अपनी भूमिका सही तरीके से निभाने में असफल रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि नेता प्रतिपक्ष सदन में क्यों नजर नहीं आते और विपक्ष अपनी जिम्मेदारी से बच रहा है। उनके इस बयान पर विपक्षी दलों के विधायक आक्रोशित हो गए।
राजू तिवारी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कुमार सर्वजीत ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी सामाजिक न्याय की विचारधारा पर काम करती है और दलितों व वंचित वर्गों के अधिकारों की लड़ाई लड़ती रही है। सर्वजीत ने आरोप लगाया कि जब 12 जनपथ खाली था और जब रामविलास पासवान की मूर्ति हटाने की बात सामने आई थी, तब सत्ता पक्ष के नेताओं की चुप्पी सवाल खड़े करती है।
इस दौरान दोनों नेताओं के बीच बहस तेज होती चली गई और सदन का माहौल शोर-शराबे में बदल गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सभापति को हस्तक्षेप करना पड़ा, जिसके बाद किसी तरह सदन की कार्यवाही आगे बढ़ाई जा सकी।
विवाद के दौरान कुमार सर्वजीत ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने रामविलास पासवान को ‘बेचारा’ कहकर कोई अपमानजनक टिप्पणी नहीं की थी। उन्होंने कहा कि जब कोई महान व्यक्ति दुनिया से चला जाता है तो आम तौर पर यह कहा जाता है कि यदि वे जीवित होते तो समाज और दलितों के लिए और बेहतर कार्य कर सकते थे। उन्होंने मांग उठाई कि बिहार विधानसभा परिसर में रामविलास पासवान की प्रतिमा स्थापित की जानी चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके योगदान से प्रेरणा ले सकें।
सर्वजीत ने यह भी कहा कि दलित समाज के लोग इस मुद्दे को लेकर सड़क पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे हैं और सरकार को उनकी भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने पासवान को दलितों का बड़ा नेता बताते हुए कहा कि उनके विचारों और कार्यों को सम्मान देना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है।
आज सदन में इन मुद्दों को लेकर फिर से हंगामे की संभावना जताई जा रही है। आरक्षण की सीमा बढ़ाने की मांग, दलित सम्मान से जुड़े मुद्दे और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के चलते विधानसभा की कार्यवाही एक बार फिर गर्म रहने की उम्मीद है।