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17-Sep-2025 07:26 AM
By First Bihar
Bihar Teacher News: बिहार के सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के वेतन को रोक दिया गया है। इसमें लगभग 40 हजार शिक्षक शामिल है, जो अपने वेतन का इंतजार कर रहे है। बताया जा रहा है कि टीआरई-3 के तहत विभिन्न जिलों में कक्षा एक से 12वीं तक के छह हजार शिक्षकों को चार माह से वेतन नहीं मिला है।
वहीं, लगभग पांच हजार प्रधानाध्यापक और 29 हजार प्रधान शिक्षकों को दो माह से तनख्वाह नहीं मिली है। त्योहारों का मौसम आ गया है। दुर्गापूजा से पहले शिक्षकों को वेतन मिलना बड़ी चुनौती है। इनको वेतन नहीं मिलने का कारण तकनीकी नियुक्ति न होना है।
दरअसल शिक्षकों के वेतन भुगतान में देरी का सबसे बड़ा कारण "तकनीकी नियुक्ति" प्रक्रिया का अधूरा रह जाना है। तकनीकी नियुक्ति के लिए शिक्षकों के शैक्षणिक और प्रशिक्षण प्रमाण-पत्र, बीपीएससी द्वारा चयन प्रमाणपत्र, आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक खाता विवरण आदि दस्तावेजों को ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर अपलोड करना आवश्यक है।
यह प्रक्रिया जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) कार्यालय की जिम्मेदारी होती है, लेकिन कई जिलों में अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही और प्रक्रियागत ढिलाई के चलते अभी तक दस्तावेज अपलोड नहीं हो सके हैं। इस कारण तकनीकी रूप से नियुक्ति अधूरी रह गई है, और वेतन भुगतान अटका हुआ है।
बता दें कि वेतन अटकने का दूसरा बड़ा कारण है एचआरएमएस (HRMS: Human Resource Management System) पर शिक्षकों का ऑनबोर्डिंग नहीं हो पाना। कई शिक्षकों की जन्मतिथि, नाम या मोबाइल नंबर में मामूली त्रुटियों के कारण सिस्टम उन्हें पहचान नहीं पा रहा है। इसके चलते PRAN (Permanent Retirement Account Number) भी जारी नहीं हो पा रहा, जो कि सरकारी वेतन प्रक्रिया में एक अनिवार्य पहचान संख्या है।
ऐसे भी कई शिक्षक हैं जो पहले टीआरई-1 या टीआरई-2 के तहत किसी जिले में कार्यरत थे, लेकिन टीआरई-3 के जरिए अपने पसंदीदा जिले में स्थानांतरित हो गए हैं। दुर्भाग्यवश, उनके पिछले जिलों से संबंधित दस्तावेज अभी तक नए जिलों को नहीं भेजे गए हैं, जिससे उनकी नई नियुक्ति और वेतन प्रक्रिया अधर में है।
वर्तमान में दुर्गापूजा, दीपावली, और छठ जैसे प्रमुख त्योहारों का मौसम शुरू हो चुका है। ऐसे में शिक्षकों के लिए वेतन न मिलना गंभीर आर्थिक संकट का कारण बन रहा है। कई शिक्षकों का कहना है कि वे उधार लेकर या ऋण के भरोसे घर चला रहे हैं। यह केवल एक प्रशासनिक समस्या नहीं बल्कि मानव संसाधन प्रबंधन की बड़ी विफलता बन चुकी है।
शिक्षकों ने सरकार से मांग की है कि ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर दस्तावेज अपलोडिंग की प्रक्रिया को शीघ्र पूरा किया जाए। HRMS पर डेटा सुधार कर उन्हें जल्द से जल्द ऑनबोर्ड किया जाए। PRAN नंबर जारी करने की प्रक्रिया को तेज किया जाए। जो शिक्षक जिला बदल चुके हैं, उनके पुराने दस्तावेजों को त्वरित कार्रवाई के तहत नए जिलों तक पहुंचाया जाए।
जानकारी के मुताबिक, राज्य सरकार ने सभी जिलों को निर्देश दिया है कि 20 सितंबर 2025 तक सभी लंबित तकनीकी नियुक्तियों और HRMS संबंधित प्रक्रियाओं को पूरा कर लिया जाए। यदि निर्धारित समय में कार्रवाई नहीं होती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।