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14-Jan-2026 08:09 AM
By FIRST BIHAR
Bihar Air Pollution: बिहार के छोटे शहरों में वायु गुणवत्ता लगातार खराब बनी हुई है। राज्य के 10 छोटे शहरों में हवा में पीएम 2.5 (महीन धूलकण) की मात्रा तय मानक से अधिक पाई जा रही है। सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों में आरा, हाजीपुर, कटिहार, मोतिहारी, अररिया, बेगूसराय, बेतिया, बिहारशरीफ, मुजफ्फरपुर और बक्सर शामिल हैं। मंगलवार की सुबह भी आरा और हाजीपुर का राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक 200 से ऊपर दर्ज किया गया, जो खराब श्रेणी में आता है।
इस बीच पटना में किए गए एक अध्ययन की प्रारंभिक रिपोर्ट ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। रिपोर्ट के अनुसार, खुले नालों से निकलने वाली अमोनिया गैस भी हवा में पीएम2.5 बढ़ाने का एक बड़ा कारण बन रही है। इसका असर केवल राजधानी तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे शहरों में भी वायु प्रदूषण बढ़ाने में खुले नालों की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
आईआईटी बीएचयू द्वारा किए गए अध्ययन में पाया गया है कि खुले नालों से निकलने वाली अमोनिया गैस, वाहनों से निकलने वाले सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) के संपर्क में आकर पीएम2.5 का निर्माण कर रही है। इन दोनों गैसों के रासायनिक संयोजन से महीन कण बनते हैं, जिससे हवा में पीएम2.5 की मात्रा लगातार अधिक बनी रहती है। पटना में वायु प्रदूषण के स्तर में कुछ कमी जरूर आई है, लेकिन पीएम2.5 अब भी अक्सर मानक से ऊपर दर्ज किया जा रहा है। यही स्थिति राज्य के अन्य छोटे शहरों की भी है।
बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के अध्यक्ष डॉ. डी.के. शुक्ला ने बताया कि अध्ययन की प्रारंभिक रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ है कि पटना के खुले नालों से निकलने वाली अमोनिया गैस पीएम2.5 बढ़ाने में योगदान दे रही है। हालांकि, अंतिम रिपोर्ट अभी आना बाकी है।
उन्होंने कहा कि खुले नालों को ढकने या बंद करने से ही पीएम2.5 में प्रभावी कमी लाई जा सकती है। फिलहाल कई स्थानों पर खुले नालों को बंद करने का काम शुरू किया गया है। अंतिम रिपोर्ट आने के बाद विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर सरकार को सौंपी जाएगी।
विशेषज्ञों के अनुसार खुले नालों में मौजूद ऑर्गेनिक मटेरियल, गंदगी और कचरे के सड़ने से अमोनिया गैस निकलती है। धूप निकलने पर यह गैस हवा में तेजी से फैलती है। वहीं, शहरों की हवा में पहले से मौजूद वाहनों से निकलने वाला सल्फर डाइऑक्साइड इसके साथ मिलकर पीएम2.5 का निर्माण करता है, जिससे वायु प्रदूषण और गंभीर हो जाता है।
बता दें कि बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद और आईआईटी बीएचयू के बीच पटना में वायु प्रदूषण के कारणों की पहचान के लिए एक वर्ष के अध्ययन को लेकर समझौता हुआ था। यह अध्ययन अवधि अब पूरी हो चुकी है, हालांकि अंतिम रिपोर्ट आने में अभी लगभग दो महीने और लगेंगे। आईआईटी बीएचयू की टीम ने पटना के विभिन्न खुले नालों से सैंपल लेकर जांच की थी। प्रारंभिक रिपोर्ट में यह साबित हो चुका है कि खुले नालों से निकलने वाली अमोनिया गैस भी वायु में पीएम2.5 बढ़ने की एक अहम वजह है।