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Bihar News: बिहार में ग्रामीण सड़कों की निगरानी अब जनता के हाथ, QR कोड से होगी सीधी शिकायत; गड़बड़ी पर नपेंगे इंजीनियर और ठेकेदार

Bihar News: बिहार में पीएमजीएसवाई सड़कों की निगरानी अब क्यूआर कोड से होगी। आम लोग मोबाइल से सड़क की खराबी की शिकायत कर सकेंगे, जिस पर एआई से जांच कर कार्रवाई होगी।

14-Jan-2026 07:55 AM

By FIRST BIHAR

Bihar News: अगर आपके गांव की सड़क खराब है, तो अब आपकी शिकायत दबेगी नहीं। बिहार सरकार ने ग्रामीण सड़कों की निगरानी के लिए एक नई और तकनीक आधारित व्यवस्था लागू कर दी है। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत बनी सड़कों पर अब क्यूआर कोड लगाए जा रहे हैं। सड़क में गड़बड़ी मिलने पर ठेकेदार, इंजीनियर और संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई तय मानी जा रही है।


इस नई व्यवस्था में आम लोगों को भी निगरानी का अधिकार दिया गया है। सड़क किनारे लगे सूचना बोर्ड पर क्यूआर कोड चस्पा किया गया है, जिसे कोई भी व्यक्ति अपने मोबाइल से स्कैन कर सकता है। स्कैन करते ही सड़क से जुड़ी पूरी जानकारी सामने आ जाएगी। यदि सड़क पर गड्ढे हैं या निर्माण में कोई खामी है, तो उसकी तस्वीर खींचकर सीधे विभाग को भेजी जा सकती है।


खास बात यह है कि आम लोगों द्वारा भेजी गई तस्वीरों का विश्लेषण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के माध्यम से किया जा रहा है। इससे शिकायतों की जांच तेज होगी और फर्जी शिकायतों पर भी रोक लगेगी। सही शिकायत पाए जाने पर दोषी ठेकेदारों और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।


फिलहाल यह व्यवस्था बिहार के 23 जिलों में लागू हो चुकी है। इसकी शुरुआत सिवान, सुपौल, जमुई, गया और मुंगेर जिलों से की गई थी, जिसे अब अन्य जिलों में भी विस्तार दिया गया है। शेष 15 जिलों में भी जल्द ही क्यूआर कोड आधारित निगरानी व्यवस्था शुरू की जाएगी।


जिलावार आंकड़ों की बात करें तो सबसे अधिक क्यूआर कोड गया जिले में लगाए गए हैं, जहां 74 सड़कों पर यह व्यवस्था लागू है। कटिहार में 60, मधेपुरा में 59, औरंगाबाद में 54, समस्तीपुर में 39 और रोहतास में 25 सड़कों पर क्यूआर कोड लगाए गए हैं। वहीं, पटना और दरभंगा में 19-19 सड़कों पर यह सुविधा उपलब्ध कराई गई है।


ग्रामीण कार्य विभाग ने सभी जिलों के इंजीनियरों को निर्देश दिया है कि हर सड़क पर रखरखाव से संबंधित सूचना बोर्ड लगाना अनिवार्य होगा। इसी बोर्ड पर ई-मार्ग पोर्टल से जनरेट किया गया क्यूआर कोड लगाया जा रहा है। सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ेगी और सड़कों की गुणवत्ता पर सीधी नजर रखी जा सकेगी। अब गांव की सड़क खराब हुई तो जिम्मेदार बच नहीं पाएंगे, क्योंकि निगरानी की सबसे बड़ी ताकत अब आम लोग होंगे।