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RAILWAY UPDATE: 17 साल बाद फिर जगी उम्मीद: इस रेल लाइन परियोजना को मिली नई रफ्तार, सीमांचल में विकास की आस

बिहार के सीमांचल क्षेत्र के लिए बहुप्रतीक्षित जलालगढ़–किशनगंज रेल लाइन परियोजना एक बार फिर चर्चा में है। लंबे समय से ठंडे बस्ते में पड़ी यह योजना अब दोबारा सक्रिय होती दिखाई दे रही है।

16-Feb-2026 02:55 PM

By First Bihar

RAILWAY UPDATE: बिहार के सीमांचल क्षेत्र के लिए बहुप्रतीक्षित जलालगढ़–किशनगंज रेल लाइन परियोजना एक बार फिर चर्चा में है। लंबे समय से ठंडे बस्ते में पड़ी यह योजना अब दोबारा सक्रिय होती दिखाई दे रही है। इस पहल से कटिहार, किशनगंज और पूर्णिया समेत आसपास के जिलों में बेहतर रेल कनेक्टिविटी की उम्मीद जगी है। यह परियोजना भारतीय रेल नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। 


यह रेल परियोजना वर्ष 2008-09 में शुरू की गई थी। उस समय इसका शिलान्यास हुआ, लेकिन इसके बाद कई प्रशासनिक और तकनीकी कारणों से काम आगे नहीं बढ़ सका। करीब 17 वर्षों तक यह योजना फाइलों में ही सीमित रही। अब इस परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार कर रेलवे बोर्ड को भेज दी गई है। अंतिम स्वीकृति मिलने के बाद इसके क्रियान्वयन का रास्ता साफ हो जाएगा।


शुरुआत में इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 360 करोड़ रुपये आंकी गई थी। समय बीतने और निर्माण लागत बढ़ने के कारण अब इसका खर्च करीब 1852 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। प्रस्तावित रेल लाइन की लंबाई लगभग 51.6 किलोमीटर होगी। यह नई लाइन सीमांचल क्षेत्र के कई महत्वपूर्ण इलाकों को आपस में जोड़ेगी और मौजूदा रेल नेटवर्क को मजबूत बनाएगी।


इस रेल लाइन के निर्माण से क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। कटिहार और किशनगंज के बीच यात्रा समय कम होगा, जिससे लोगों को आवागमन में सुविधा होगी। साथ ही कृषि उत्पादों और स्थानीय व्यापार को बड़े बाजारों तक पहुंचाने में आसानी होगी। इससे किसानों और छोटे व्यापारियों को सीधा लाभ मिल सकता है। परियोजना के निर्माण और संचालन से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा होने की संभावना है।


पूर्णिया जिले के लिए यह परियोजना ऐतिहासिक महत्व रखती है। जानकारी के अनुसार, वर्ष 1928 के बाद इस क्षेत्र में कोई नई रेल लाइन नहीं बिछाई गई है। यदि यह योजना धरातल पर उतरती है तो लगभग एक सदी बाद पूर्णिया के रेल मानचित्र में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। प्रस्तावित योजना में आठ नए स्टेशनों के निर्माण का भी प्रावधान है, जिनमें खाताहाट, रौटा और महीनगांव जैसे इलाके शामिल हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों की कनेक्टिविटी में उल्लेखनीय सुधार होगा।


रणनीतिक दृष्टि से भी यह रेल लाइन अहम मानी जा रही है। भारत-बांग्लादेश सीमा के निकट स्थित चिकन नेक क्षेत्र के पास यह एक वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराएगी। किसी आपात स्थिति या मुख्य रेल मार्ग पर बाधा आने की स्थिति में यातायात को दूसरे रास्ते से संचालित किया जा सकेगा। इससे सुरक्षा और सुचारु परिवहन व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।


फिलहाल इस परियोजना का भविष्य केंद्र सरकार और रेलवे बोर्ड की अंतिम मंजूरी पर निर्भर है। क्षेत्र के जनप्रतिनिधि और स्थानीय लोग लंबे समय से इसकी स्वीकृति और बजट जारी करने की मांग कर रहे हैं। यदि सरकार की ओर से हरी झंडी मिलती है, तो यह परियोजना सीमांचल के विकास में मील का पत्थर साबित हो सकती है। यात्रियों, व्यापारियों और आम लोगों के लिए यह एक बड़ी राहत और नई उम्मीद लेकर आएगी।