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12-Dec-2025 11:08 AM
By First Bihar
Bihar News: बिहार सरकार अब शहरी संरचना को पूरी तरह बदलने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। राज्य सरकार ने पटना, भागलपुर, मुजफ्फरपुर, गया, दरभंगा, मुंगेर, सारण, सहरसा, पूर्णिया और मधुबनी जैसे प्रमुख शहरों में ग्रीनफील्ड सिटी विकसित करने की महत्वाकांक्षी योजना को हरी झंडी दे दी है। यह प्रोजेक्ट नगर विकास एवं आवास विभाग तथा उद्योग विभाग के संयुक्त प्रयासों से आकार लेगा, यहां रहन-सहन, शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापार की सभी सुविधाएं एक ही परिसर में उपलब्ध होंगी। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और बिहार को राष्ट्रीय स्तर पर एक आधुनिक राज्य के रूप में स्थापित करने में मदद भी मिलेगी।
ये ग्रीनफील्ड शहर दो मुख्य भागों में विभाजित होंगे। इसका आंतरिक हिस्सा पूरी तरह आवासीय और पर्यावरण-केंद्रित होगा और यहां कुल क्षेत्र का 40 प्रतिशत से अधिक हिस्सा हरियाली से भरा हुआ होगा। यहां स्कूल, अस्पताल, पार्क, बाजार और छोटे-छोटे जंगल जैसे तत्व शामिल किए जाएंगे ताकि निवासियों को शुद्ध हवा और प्राकृतिक वातावरण मिल सके। बाहरी हिस्से में आईटी सेक्टर को प्राथमिकता देते हुए बड़े औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए जाएंगे और साथ ही शहर की परिधि में टेक्सटाइल, फर्नीचर और खाद्य प्रसंस्करण जैसे उद्योग स्थापित होंगे।
इस प्रोजेक्ट के लिए लगभग 15 हजार एकड़ भूमि की पहचान की जा रही है, जिसमें मुख्य सड़कों, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशनों से निकटता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इससे नए शहर पुराने शहरी ढांचे से जुड़े रहेंगे, जबकि निर्माण के दौरान क्षेत्र को प्रतिबंधित घोषित कर तेजी से काम पूरा किया जाएगा। सरकार केवल 10 से 15 प्रतिशत भूमि का अधिग्रहण करेगी, शेष को विकसित कर नीलामी से धन जुटाएगी, जिससे आगे का निर्माण वित्तपोषित होगा। योजना के अनुसार, 2026 के अंत तक इसका काम शुरू हो जाएगा।
इस मॉडल की जरूरत इसलिए पड़ी क्योंकि बिहार को औद्योगिक राज्य बनाने के लिए निवेशकों की अपेक्षाएं पूरी करनी हैं। उद्योग मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय कंपनियां ऐसे स्थानों पर निवेश करती हैं जहां शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवहन की सुविधाएं एक साथ उपलब्ध हों। गुरुग्राम, बेंगलुरु या चंडीगढ़ जैसे शहरों की तर्ज पर विकसित ये क्लस्टर बिहार को वैश्विक मानचित्र पर लाएंगे। पर्यावरण संरक्षण को मूल में रखते हुए 40 प्रतिशत हरियाली बड़े उद्योगों के बीच सांस लेने की जगह प्रदान करेगी, जिससे सतत विकास सुनिश्चित हो सकेगा।