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03-Apr-2026 03:49 PM
By First Bihar
Bihar News: बिहार की पहचान अब सिर्फ इतिहास, संस्कृति और राजनीति तक सीमित नहीं रही, बल्कि अब यह राज्य तेजी से फिल्म इंडस्ट्री का नया हॉटस्पॉट बनता जा रहा है। नई फिल्म प्रोत्साहन नीति के लागू होने के बाद यहां फिल्मों की जैसे ‘बाढ़’ आ गई है। हालात ऐसे हैं कि अब बिहार के अलग-अलग शहरों में हर दिन कहीं न कहीं शूटिंग चलती नजर आ रही है।
अगर देखा जाए तो फिल्मकारों का रुझान बिहार की ओर तेजी से बढ़ा है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, अब तक कुल 45 फिल्म प्रोजेक्ट्स को बिहार में शूटिंग की मंजूरी मिल चुकी है। इनमें से 39 फिल्मों की शूटिंग पूरी भी हो चुकी है, जो अपने आप में एक बड़ा रिकॉर्ड माना जा रहा है।
हर कोने में शूटिंग, बिहार बना नया फिल्म हब
आज बिहार के शहरों और पर्यटन स्थलों पर कैमरे, लाइट्स और कलाकारों की चहल-पहल आम बात हो गई है। राजगीर की खूबसूरत पहाड़ियां, पटना के गंगा घाट, बोधगया का ऐतिहासिक मंदिर और गांवों की सादगी—ये सभी लोकेशन फिल्म निर्माताओं को अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं।
फिल्मों की शूटिंग के लिए अब निर्माता बिहार को एक सुरक्षित, सस्ता और विविध लोकेशन वाला राज्य मान रहे हैं। यही वजह है कि बड़े-बड़े प्रोडक्शन हाउस भी यहां शूटिंग करने के लिए आगे आ रहे हैं।
हिंदी फिल्मों का दबदबा, लेकिन क्षेत्रीय सिनेमा भी मजबूत
अगर इन 45 प्रोजेक्ट्स की बात करें तो सबसे ज्यादा क्रेज हिंदी फिल्मों का देखने को मिल रहा है। कुल 22 हिंदी फिल्मों को मंजूरी दी गई है, जो यह दिखाता है कि बॉलीवुड भी अब बिहार की जमीन पर भरोसा जता रहा है।
इसके अलावा भोजपुरी की 19 फिल्में, 1 मगही, 1 हिंदी-मैथिली और 1 इंग्लिश-भोजपुरी फिल्म भी इस लिस्ट में शामिल हैं। खास बात यह है कि सिर्फ फिल्में ही नहीं, बल्कि 6 डॉक्यूमेंट्री और एक वेब सीरीज की शूटिंग भी बिहार में हो रही है।
इससे यह साफ हो जाता है कि बिहार अब सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी फिल्म निर्माण का केंद्र बन रहा है।
सरकार की नीति बनी गेम चेंजर
फिल्मकारों को बिहार लाने में सबसे बड़ा रोल राज्य सरकार की फिल्म प्रोत्साहन नीति का है। इस नीति के तहत फिल्म निर्माताओं को कई तरह की सुविधाएं दी जा रही हैं।
सबसे खास है ‘सिंगल विंडो सिस्टम’, जिसके जरिए शूटिंग की सभी मंजूरियां एक ही जगह से मिल जाती हैं। इसके अलावा सरकार फिल्म निर्माताओं को आर्थिक सब्सिडी भी दे रही है, जिससे उनकी लागत कम हो जाती है।
साथ ही प्रशासन की ओर से सुरक्षा और सहयोग मिलने से भी फिल्मकारों का भरोसा बढ़ा है। यही कारण है कि जुलाई 2024 से लेकर अब तक 39 फिल्मों की शूटिंग सफलतापूर्वक पूरी हो चुकी है।
बिहार की कहानी अब दुनिया तक पहुंचेगी
इन फिल्मों के जरिए बिहार की असली पहचान अब देश ही नहीं, बल्कि दुनिया तक पहुंचेगी। यहां की संस्कृति, परंपरा, ऐतिहासिक धरोहर और आम जीवन की झलक अब बड़े पर्दे पर देखने को मिलेगी।
‘संघतिया’, ‘बिहार का जलवा’, ‘चंपारण सत्याग्रह’, ‘सुहागिन के सेनुर’, ‘रजनी की बारात’ और ‘महाबोधि मंदिर’ जैसे प्रोजेक्ट्स इस दिशा में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
इन फिल्मों की शूटिंग पटना, राजगीर, बोधगया, मुंगेर और चंपारण जैसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध इलाकों में की जा रही है।
रोजगार और पर्यटन को मिलेगा बड़ा फायदा
फिल्मों की इस बढ़ती संख्या का सीधा फायदा राज्य के लोगों को भी मिल रहा है। स्थानीय कलाकारों, तकनीशियनों, मजदूरों और छोटे कारोबारियों को रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं।
इसके अलावा जिन जगहों पर शूटिंग हो रही है, वहां पर्यटन को भी बढ़ावा मिल रहा है। लोग अब उन लोकेशनों को देखने के लिए आ रहे हैं, जिन्हें उन्होंने फिल्मों में देखा है।
बिहार की नई पहचान बनता फिल्म इंडस्ट्री
अब वह समय दूर नहीं जब बिहार को सिर्फ इतिहास और राजनीति के लिए नहीं, बल्कि फिल्म इंडस्ट्री के लिए भी जाना जाएगा। जिस तरह से यहां फिल्मों की संख्या बढ़ रही है, उससे उम्मीद लगाया जा सकता है कि आने वाले समय में बिहार देश के बड़े फिल्म हब के रूप में उभर सकता है।