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Bihar Assembly : यह काम किए बगैर कर्ज बांटना पड़ेगा भारी, 3 साल के लिए जाना पड़ सकता है जेल; जानिए सरकार का नया नियम

बिहार विधानसभा ने सूदखोरी और जबरन वसूली रोकने के लिए बिहार सूक्ष्म वित्त संस्थाएं विधेयक 2026 पास किया। बिना पंजीकरण कर्ज देना अपराध होगा।

27-Feb-2026 11:40 AM

By First Bihar

Bihar Assembly : बिहार में ऊंचे ब्याज और जबरन वसूली से परेशान लोगों को बड़ी राहत मिली है। गुरुवार को बिहार विधानसभा ने “बिहार सूक्ष्म वित्त संस्थाएं विधेयक 2026” को ध्वनिमत से पारित कर दिया। इस कानून के लागू होने के बाद राज्य में बिना पंजीकरण के कर्ज बांटना और दबाव बनाकर वसूली करना दंडनीय अपराध माना जाएगा। सरकार का कहना है कि यह कानून खासकर गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को अवैध सूदखोरी और रिकवरी एजेंटों की प्रताड़ना से बचाने के लिए लाया गया है।


विधेयक के प्रावधानों के मुताबिक अब राज्य में काम करने वाली सभी माइक्रोफाइनेंस कंपनियों को केवल भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से लाइसेंस लेना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि राज्य के वित्त विभाग से पंजीकरण कराना भी अनिवार्य होगा। यदि कोई संस्था बिना राज्य स्तरीय पंजीकरण के ऋण वितरित करती है, तो उसके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे फर्जी और अवैध रूप से संचालित सूक्ष्म वित्त संस्थाओं पर लगाम लगेगी।


कानून में सबसे अहम प्रावधान यह है कि सूदखोरी या कर्ज के दबाव में उत्पीड़न और आत्महत्या से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए हर जिले में विशेष अदालत का गठन किया जाएगा। इन अदालतों की स्थापना पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की सहमति से होगी और इनकी अध्यक्षता प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी करेंगे। विशेष अदालतें अवैध ऋण और वसूली से जुड़े मामलों की त्वरित सुनवाई करेंगी, जिससे पीड़ितों को वर्षों तक न्याय के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।


विधेयक में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी व्यक्ति ने बिना पंजीकृत संस्था से कर्ज लिया है या निर्धारित सीमा से अधिक ब्याज चुका दिया है, तो वह अतिरिक्त रकम लौटाने के लिए बाध्य नहीं होगा। इतना ही नहीं, पहले से चुकाई गई अतिरिक्त राशि को वह 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ वापस पाने का हकदार होगा। यह प्रावधान कर्जदारों को आर्थिक राहत देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


कर्ज वसूली के नाम पर दबंगई और आपराधिक तत्वों के इस्तेमाल पर भी सख्त रोक लगाई गई है। यदि कोई सूक्ष्म वित्त संस्था या सूदखोर वसूली के लिए आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों, यानी तथाकथित ‘रिकवरी एजेंटों’ की मदद लेता है, तो उसे तीन साल तक की सजा और पांच लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। सरकार का कहना है कि इससे कर्जदारों को मानसिक और सामाजिक प्रताड़ना से मुक्ति मिलेगी।


विधानसभा में विधेयक पेश करते हुए वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि अब बच्चों के स्कूल जाकर अभिभावकों को अपमानित करना, पड़ोसियों पर दबाव बनाना या सामाजिक समारोहों में बाधा डालकर वसूली करने जैसे हथकंडे बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कानून उधारकर्ताओं के आत्मसम्मान और गरिमा की रक्षा के लिए ढाल का काम करेगा।


पिछले कुछ वर्षों में राज्य के विभिन्न हिस्सों से ऊंचे ब्याज दरों और जबरन वसूली से जुड़े कई मामले सामने आए थे। कई बार कर्जदारों को सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा किया गया, जिससे सामाजिक तनाव और मानसिक दबाव की स्थिति पैदा हुई। सरकार का दावा है कि नया कानून ऐसी घटनाओं पर रोक लगाएगा और वित्तीय व्यवस्था में पारदर्शिता लाएगा।


कुल मिलाकर, “बिहार सूक्ष्म वित्त संस्थाएं विधेयक 2026” को राज्य में वित्तीय अनुशासन और सामाजिक न्याय की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। इससे न केवल अवैध सूदखोरी पर अंकुश लगेगा, बल्कि जरूरतमंद लोगों को सुरक्षित और सम्मानजनक तरीके से ऋण उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी मजबूत होगी।