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Bihar land : बिहार में जमीन रजिस्ट्री से पहले देने होगी यह जानकारी, 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा नया नियम

बिहार में 1 अप्रैल 2026 से जमीन रजिस्ट्री से पहले खरीदारों को 13 तरह की जानकारी देना अनिवार्य होगा। नई व्यवस्था से जमीन विवाद कम होंगे।

17-Feb-2026 07:36 AM

By First Bihar

Bihar land : बिहार में जमीन खरीदने और रजिस्ट्री कराने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और विवाद रहित बनाने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब रैयती जमीन के निबंधन से पहले खरीदारों को जमीन से जुड़ी पूरी आधिकारिक जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। यह नया नियम वित्तीय वर्ष 2026-27 यानी 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा। सरकार का यह फैसला सात निश्चय-3 के तहत “सबका सम्मान, जीवन आसान” योजना के अंतर्गत लिया गया है, जिसका उद्देश्य दस्तावेज निबंधन की प्रक्रिया को अधिक जनोन्मुखी और पारदर्शी बनाना है।


इस संबंध में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव सीके अनिल और मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग के सचिव अजय यादव ने संयुक्त रूप से राज्य के सभी जिलाधिकारियों (समाहर्ताओं) को पत्र भेजकर निर्देश जारी किए हैं। पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि जमीन से संबंधित पूरी जानकारी के अभाव में कई बार विवाद उत्पन्न हो जाते हैं, जिससे खरीदार और विक्रेता दोनों को परेशानी झेलनी पड़ती है। इन समस्याओं को रोकने के लिए यह नई व्यवस्था लागू की जा रही है।


नई व्यवस्था के तहत जमीन खरीदने वाले आवेदकों को ई-निबंधन पोर्टल पर अपना अकाउंट बनाकर लॉगइन करना होगा। इसके बाद जिस जमीन की रजिस्ट्री करानी है, उससे जुड़ी 13 तरह की जानकारी पोर्टल पर दर्ज करनी होगी। इसमें निबंधन कार्यालय का नाम, संबंधित अंचल, मौजा, थाना, खाता संख्या, खेसरा संख्या, भूमि का कुल रकबा, चौहद्दी, जमाबंदी, जमाबंदी धारक का नाम, क्रेता और विक्रेता का नाम तथा भूमि का प्रकार शामिल रहेगा।


सरकार ने आवेदकों को विकल्प दिया है कि यदि वे जमीन की अद्यतन और आधिकारिक जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो संबंधित विकल्प का चयन कर सकते हैं। यदि आवेदक यह विकल्प नहीं चुनते हैं तो पहले से निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जमीन की रजिस्ट्री की कार्रवाई जारी रहेगी। लेकिन यदि आवेदक जमीन की आधिकारिक जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो उनकी ओर से अपलोड की गई जानकारी संबंधित अंचल अधिकारी या राजस्व अधिकारी के लॉगइन में भेज दी जाएगी। साथ ही आवेदक को इसकी सूचना एसएमएस के माध्यम से भी दी जाएगी।


नियम के अनुसार अंचल अधिकारी या संबंधित राजस्व अधिकारी अपलोड की गई जानकारी की जांच-पड़ताल करेंगे और 10 दिनों के भीतर आवेदक को जमीन से जुड़ी पूरी जानकारी एसएमएस के माध्यम से उपलब्ध कराएंगे। यदि निर्धारित 10 दिनों के भीतर अधिकारी जानकारी उपलब्ध नहीं कराते हैं तो यह माना जाएगा कि आवेदक द्वारा दी गई जानकारी सही है। इसके बाद मामला स्वतः निबंधन कार्यालय को भेज दिया जाएगा और आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इस स्थिति की जानकारी अंचल अधिकारियों को भी एसएमएस के जरिए दी जाएगी।


राज्य सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था से जमीन खरीद-बिक्री से जुड़े विवादों में काफी कमी आएगी और आम लोगों को पारदर्शी व सुरक्षित तरीके से रजिस्ट्री कराने में सुविधा मिलेगी। साथ ही डिजिटल प्रक्रिया को बढ़ावा मिलने से सरकारी कार्य प्रणाली भी अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनेगी।