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06-Apr-2026 07:51 AM
By First Bihar
Bihar Jobs : बिहार में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिलने वाला है। राज्य सरकार ने 209 नए डिग्री कॉलेजों में प्राचार्य, शिक्षक और गैर-शैक्षणिक कर्मियों सहित कुल 9196 पदों पर बहाली की प्रक्रिया शुरू करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। यह फैसला न केवल युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा, बल्कि ग्रामीण और प्रखंड स्तर पर उच्च शिक्षा की पहुंच को भी मजबूत करेगा।
प्रस्तावित बहाली में प्राचार्य के 209 पद, सहायक प्राध्यापकों के 6479 पद और लिपिक सहित गैर-शैक्षणिक कर्मियों के 2508 पद शामिल हैं। उच्च शिक्षा विभाग ने इन सभी पदों के सृजन और स्थायी नियुक्ति के लिए वित्त विभाग को प्रस्ताव भेज दिया है। अब वित्त विभाग इस प्रस्ताव को प्रशासी पदवर्ग समिति के पास अनुमोदन के लिए भेजेगा। इसके साथ ही विधि विभाग से भी इस पर परामर्श लिया जाएगा। सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद इसे राज्य कैबिनेट की मंजूरी के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। कैबिनेट से हरी झंडी मिलने के बाद नियुक्ति प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो जाएगी।
नियुक्ति प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए अलग-अलग आयोगों की भूमिका तय की गई है। प्राचार्य और शिक्षकों का चयन बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग के माध्यम से किया जाएगा, जबकि लिपिक, तकनीकी और अन्य गैर-शैक्षणिक कर्मियों की भर्ती राज्य कर्मचारी चयन आयोग और राज्य तकनीकी सेवा आयोग द्वारा की जाएगी।
इन नए डिग्री कॉलेजों की खास बात यह है कि इन्हें प्रखंड स्तर पर स्थापित किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों को अपने ही इलाके में उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। प्रत्येक कॉलेज में विज्ञान, कला और वाणिज्य संकाय के तहत कुल 15 विषयों में दो-दो सहायक प्रोफेसर के पद सृजित किए गए हैं। इसके अलावा हर कॉलेज में एक प्राचार्य और एक व्यावसायिक विषय के शिक्षक की भी नियुक्ति होगी।
गैर-शैक्षणिक ढांचे को भी मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया गया है। हर कॉलेज में 12 गैर-शैक्षणिक कर्मियों की नियुक्ति होगी, जिनमें लिपिक, प्रयोगशाला सहायक, कंप्यूटर ऑपरेटर और चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी शामिल होंगे। इससे कॉलेजों के संचालन में सुचारुता आएगी और छात्रों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।
विषयों की बात करें तो कला संकाय में इतिहास, भूगोल, राजनीतिशास्त्र, समाजशास्त्र, हिन्दी, अंग्रेजी, संस्कृत, मनोविज्ञान और अर्थशास्त्र शामिल हैं। वहीं विज्ञान संकाय में गणित, भौतिकी, रसायन, जीव विज्ञान और वनस्पति विज्ञान के पद सृजित किए गए हैं। इसके अलावा वाणिज्य संकाय में भी एक विषय रखा गया है।
सरकार का लक्ष्य है कि शैक्षणिक सत्र 2026-30 से इन नए कॉलेजों में पढ़ाई शुरू कर दी जाए। हालांकि शुरुआती चरण में केवल कला संकाय के कुछ प्रमुख विषयों—जैसे इतिहास, भूगोल, राजनीतिशास्त्र, समाजशास्त्र, हिन्दी और अंग्रेजी—में ही नामांकन लिया जाएगा। बाद में अन्य विषयों को भी चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जाएगा।
इन कॉलेजों की स्थापना के लिए संबंधित जिलों ने प्रखंड स्तर पर जमीन चिह्नित कर शिक्षा विभाग को सौंप दी है। इससे निर्माण कार्य और अन्य आवश्यक तैयारियों को तेजी से पूरा किया जा सकेगा। कुल मिलाकर यह पहल बिहार में शिक्षा और रोजगार दोनों क्षेत्रों में बड़ा बदलाव लाने वाली साबित हो सकती है। जहां एक ओर युवाओं को बड़े पैमाने पर सरकारी नौकरी के अवसर मिलेंगे, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च शिक्षा का विस्तार होगा, जिससे राज्य के समग्र विकास को गति मिलेगी।