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07-Apr-2026 10:11 AM
By First Bihar
Bihar News : बिहार सरकार के नगर विकास एवं आवास विभाग ने सरकारी कर्मचारियों को लेकर एक अहम और सख्त फैसला लिया है। विभाग की ओर से जारी ताजा आदेश के अनुसार, अब विभाग के अधीन कार्यरत अधिकारी और कर्मचारी अपनी पूरी सेवा अवधि में केवल एक बार ही किसी प्रतियोगी परीक्षा में शामिल हो सकेंगे। यह आदेश 6 अप्रैल 2026 से तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
जारी आदेश में कहा गया है कि विभाग के कई कर्मचारी बार-बार प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने की अनुमति मांगते हैं। इससे न सिर्फ उनके नियमित कार्य प्रभावित होते हैं, बल्कि विभागीय कामकाज में भी बाधा उत्पन्न होती है। सरकार का मानना है कि लगातार परीक्षा की तैयारी और उसमें भाग लेने से कर्मचारियों का ध्यान उनके मूल दायित्वों से हट जाता है, जिससे सरकारी कार्यों के निष्पादन पर नकारात्मक असर पड़ता है।
आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि एक बार सरकारी सेवा में आने के बाद कर्मचारियों को वेतन और अन्य सुविधाएं मिलती हैं, इसलिए बार-बार प्रतियोगी परीक्षाओं में भाग लेना लोकहित के खिलाफ माना गया है। इसी को ध्यान में रखते हुए यह नया नियम लागू किया गया है, ताकि कर्मचारी अपने वर्तमान पद और जिम्मेदारियों पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित कर सकें।
सरकार ने यह भी व्यवस्था की है कि कर्मचारी अपने वर्तमान वेतन स्तर से उच्चतर पद के लिए केवल एक बार ही परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। यानी अगर कोई कर्मचारी अपने पद से ऊपर के स्तर पर जाना चाहता है, तो उसे केवल एक ही मौका मिलेगा। इसके बाद दोबारा परीक्षा देने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
आदेश में एक और महत्वपूर्ण प्रावधान जोड़ा गया है। यदि कोई कर्मचारी एक से अधिक बार प्रतियोगी परीक्षा में शामिल होना चाहता है, तो उसे सरकारी सेवा से त्यागपत्र देना होगा। यानी नौकरी में रहते हुए बार-बार परीक्षा देने का विकल्प अब खत्म कर दिया गया है।
विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस निर्णय के लिए सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति प्राप्त है और इसे पूरी तरह से लागू किया जाएगा। इसके साथ ही इस आदेश की प्रतिलिपि विभाग के सभी संबंधित अधिकारियों और संस्थानों को भेज दी गई है, ताकि नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जा सके।
इस फैसले के पीछे सरकार का उद्देश्य प्रशासनिक कार्यों को अधिक प्रभावी बनाना और कर्मचारियों की कार्यक्षमता को बढ़ाना बताया जा रहा है। लगातार परीक्षा की तैयारी में लगे रहने से कर्मचारियों की उत्पादकता प्रभावित होती है, जिसे सुधारने के लिए यह कदम उठाया गया है।