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03-Feb-2026 07:47 AM
By First Bihar
Bihar economy : बिहार में विकास की तस्वीर एक समान नहीं है। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में जारी आंकड़े यह साफ तौर पर दिखाते हैं कि राज्य के जिलों के बीच आर्थिक समृद्धि को लेकर गहरी खाई मौजूद है। जहां कुछ जिले तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, वहीं कई जिले अब भी बुनियादी आर्थिक मजबूती से जूझ रहे हैं। सर्वेक्षण के अनुसार पटना बिहार का सबसे समृद्ध जिला बनकर उभरा है, जबकि शिवहर को सबसे गरीब जिला बताया गया है।
आर्थिक सर्वेक्षण में प्रति व्यक्ति आय के आधार पर बिहार के सभी 38 जिलों की रैंकिंग जारी की गई है। इसके अनुसार राज्य की औसत प्रति व्यक्ति आय 76,490 रुपये दर्ज की गई है। इसके मुकाबले राजधानी पटना की प्रति व्यक्ति आय 1,31,332 रुपये है, जो राज्य के औसत से कहीं अधिक है। यही नहीं, पटना की आय सबसे गरीब जिले शिवहर की तुलना में छह गुना से भी अधिक है। यह अंतर बिहार में असमान विकास की गंभीर स्थिति को उजागर करता है।
अमीरी के मामले में पटना के बाद बेगूसराय दूसरे स्थान पर है, जहां प्रति व्यक्ति आय 61,566 रुपये दर्ज की गई है। वहीं मुंगेर तीसरे स्थान पर है, जिसकी प्रति व्यक्ति आय 54,469 रुपये बताई गई है। ये जिले औद्योगिक गतिविधियों, रोजगार के अवसरों और बुनियादी सुविधाओं के कारण अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में हैं।
इसके विपरीत, बिहार के सबसे गरीब जिलों की सूची में शिवहर सबसे नीचे है, जहां प्रति व्यक्ति आय मात्र 18,980 रुपये है। शिवहर के बाद अररिया (19,795 रुपये) दूसरे और सीतामढ़ी (21,448 रुपये) तीसरे स्थान पर हैं। इन जिलों में औद्योगिक निवेश की कमी, सीमित रोजगार अवसर और कमजोर बुनियादी ढांचा आर्थिक पिछड़ेपन की बड़ी वजह माने जा रहे हैं।
आर्थिक सर्वेक्षण में जिलों की संपन्नता का आकलन केवल आय के आधार पर नहीं किया गया है, बल्कि पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की खपत, साथ ही प्रति व्यक्ति लघु बचत जैसे संकेतकों को भी शामिल किया गया है। इन मानकों से यह पता चलता है कि किन जिलों में लोगों की क्रय शक्ति अधिक है और कहां जीवन स्तर अपेक्षाकृत कमजोर है।
विशेषज्ञों का मानना है कि राजधानी पटना में प्रशासनिक केंद्र, शिक्षा संस्थान, स्वास्थ्य सुविधाएं और निजी क्षेत्र की भागीदारी अधिक होने से आर्थिक गतिविधियां तेज हैं। वहीं सीमावर्ती और ग्रामीण जिलों में अब भी आधारभूत सुविधाओं और निवेश की कमी विकास की रफ्तार को रोक रही है।
आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के ये आंकड़े राज्य सरकार के लिए एक चेतावनी और अवसर दोनों हैं। चेतावनी इसलिए कि क्षेत्रीय असमानता लगातार बढ़ रही है, और अवसर इसलिए कि पिछड़े जिलों पर विशेष ध्यान देकर संतुलित विकास की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकते हैं। यदि योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन हुआ, तो आने वाले वर्षों में बिहार के विकास की तस्वीर और बेहतर हो सकती है।