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Bihar APAR ID : बिहार में 64 लाख छात्रों ने अभी तक नहीं करवाया यह काम, इन योजनाओं का अब नहीं मिलेगा लाभ

बिहार में 2 करोड़ से अधिक छात्रों के लिए बनने वाले APAR ID में बड़ी देरी हो रही है। अब तक 64 लाख से ज्यादा छात्रों का अपार कार्ड नहीं बन पाया है। जानें किन जिलों में सबसे खराब और सबसे बेहतर स्थिति है।

13-Mar-2026 08:22 AM

By First Bihar

Bihar APAR ID : बिहार में स्कूली छात्रों के लिए अनिवार्य बनाए जा रहे अपार कार्ड (ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री) को लेकर स्थिति अभी भी संतोषजनक नहीं है। शिक्षा विभाग के लगातार निर्देशों के बावजूद राज्य के लाखों छात्रों का अपार आईडी अब तक नहीं बन पाया है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार राज्य के सरकारी और निजी स्कूलों के कुल 2 करोड़ 6 लाख 25 हजार 297 छात्र-छात्राओं का अपार कार्ड बनाया जाना है, लेकिन 10 मार्च तक केवल 1 करोड़ 42 लाख 16 हजार 873 छात्रों का ही अपार आईडी बन सका है। इसका मतलब है कि अभी भी 64 लाख 8 हजार 424 छात्रों का अपार कार्ड बनना बाकी है।


अपार कार्ड नहीं बनने की वजह से छात्रों को सरकार की कई शैक्षणिक योजनाओं का लाभ मिलने में परेशानी हो सकती है। शिक्षा विभाग ने इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए सभी जिलों के अधिकारियों को तेजी से अपार आईडी बनाने का निर्देश दिया है। इसके बावजूद कई जिलों में इसकी प्रगति काफी धीमी बनी हुई है।


आंकड़ों के मुताबिक लगभग 17 लाख ऐसे छात्र भी हैं, जिनका आधार कार्ड सत्यापित होने के बाद भी उनका अपार आईडी तैयार नहीं हो सका है। यह स्थिति प्रशासनिक लापरवाही और तकनीकी समस्याओं की ओर इशारा करती है। विभाग लगातार स्कूल प्रबंधन और जिला अधिकारियों को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराकर प्रक्रिया तेज करने को कह रहा है।


सरकारी और निजी स्कूलों की स्थिति की तुलना करें तो निजी स्कूलों में अपार कार्ड बनने की स्थिति अधिक खराब है। सरकारी स्कूलों में कुल लगभग 1.65 करोड़ छात्र नामांकित हैं, जिनमें से 1.26 करोड़ छात्रों के अपार कार्ड बन चुके हैं। यानी सरकारी स्कूलों के करीब 24 प्रतिशत छात्रों का अपार कार्ड अभी भी नहीं बन पाया है। दूसरी ओर निजी स्कूलों में कुल 35 लाख 49 हजार छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं, लेकिन इनमें से केवल 13 लाख 58 हजार छात्रों के ही अपार कार्ड बने हैं। इसका मतलब है कि निजी स्कूलों में करीब 68 प्रतिशत छात्रों का अपार कार्ड अभी भी बनना बाकी है।


जिलावार आंकड़ों पर नजर डालें तो कई जिलों में अपार कार्ड बनने की गति काफी धीमी है। पटना में 56.50 प्रतिशत, पूर्वी चंपारण में 56.62 प्रतिशत, भोजपुर में 60.92 प्रतिशत, नवादा में 61.18 प्रतिशत, लखीसराय में 61.85 प्रतिशत, गया में 61.99 प्रतिशत, सीवान में 62.83 प्रतिशत, बक्सर में 63.80 प्रतिशत, सारण में 64.74 प्रतिशत और गोपालगंज में 65.31 प्रतिशत छात्रों के ही अपार कार्ड बन पाए हैं।


वहीं कुछ जिले इस मामले में बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। मुजफ्फरपुर 82.18 प्रतिशत के साथ पहले स्थान पर है। इसके बाद शेखपुरा 82.10 प्रतिशत, भागलपुर 80.86 प्रतिशत, शिवहर 78.50 प्रतिशत, वैशाली 77.91 प्रतिशत, पूर्णिया 76.49 प्रतिशत, दरभंगा 76.22 प्रतिशत, मुंगेर 74.72 प्रतिशत, कटिहार 73.99 प्रतिशत और सुपौल 72.70 प्रतिशत के साथ टॉप 10 जिलों में शामिल हैं।


अपार कार्ड नहीं बनने के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। सबसे बड़ा कारण यह है कि अभी भी कई बच्चों का आधार कार्ड नहीं बना है। अपार आईडी आधार से लिंक होती है, इसलिए आधार बनने के बाद ही अपार कार्ड बनाया जा सकता है। इसके अलावा आधार कार्ड में नाम, जन्मतिथि या अन्य जानकारी में त्रुटि होने पर भी अपार आईडी बनने में समस्या आती है। कई मामलों में अभिभावकों द्वारा आवश्यक दस्तावेज और जानकारी समय पर उपलब्ध नहीं कराने के कारण भी प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।


दरअसल, अपार भारत सरकार द्वारा शुरू की गई छात्रों की 12 अंकों की यूनिक डिजिटल पहचान है, जिसे “वन नेशन वन स्टूडेंट आईडी” के नाम से भी जाना जाता है। यह आईडी छात्रों के प्री-प्राइमरी से लेकर उच्च शिक्षा तक के सभी शैक्षणिक रिकॉर्ड को डिजिटल रूप में सुरक्षित रखने का काम करती है।


अपार आईडी के माध्यम से छात्रों की मार्कशीट, सर्टिफिकेट, डिग्री और अन्य शैक्षणिक दस्तावेज एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहेंगे। इससे एक स्कूल से दूसरे स्कूल या कॉलेज में नामांकन के दौरान दस्तावेजों के ट्रांसफर की प्रक्रिया आसान होगी। साथ ही छात्रों के शिक्षा क्रेडिट स्कोर को ट्रैक करना भी आसान होगा।


इसके अलावा नौकरी या उच्च शिक्षा के लिए आवेदन करते समय छात्रों को अपने दस्तावेज फिजिकल रूप में ले जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। ऐसे में शिक्षा विभाग का लक्ष्य है कि जल्द से जल्द राज्य के सभी छात्रों का अपार आईडी बनाकर उन्हें इस डिजिटल व्यवस्था से जोड़ा जाए।