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19-Mar-2026 04:35 PM
By First Bihar
AURANGABAD:बिहार के औरंगाबाद जिले से एक भावुक और प्रेरणादायक प्रेम कहानी सामने आई है, जहां एक युवती ने परिवार के विरोध, सामाजिक दबाव और कानूनी बाधाओं के बावजूद अपने प्यार और अपनी बेटी के अधिकार के लिए लंबा संघर्ष किया।
दरअसल, युवती का अपने ही पास के गांव के एक युवक के साथ प्रेम संबंध था। दोनों चोरी-छिपे मिलते और फोन पर बातचीत करते थे, लेकिन उनके रिश्ते को परिवार वालों की मंजूरी नहीं थी। इसी बीच नाबालिग युवक अपनी प्रेमिका को लेकर दिल्ली भाग गया। इधर लड़की के परिजनों ने युवक के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज कराया। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए महज आठ दिनों में दोनों को दिल्ली से बरामद कर लिया। इसके बाद युवक को जेल भेज दिया गया, जबकि युवती को उसके घर वापस लाया गया।
घर लौटने के कुछ समय बाद युवती को पता चला कि वह गर्भवती है। इस कठिन परिस्थिति में भी उसने समाज के तानों और दबाव की परवाह किए बिना बच्चे को जन्म देने का फैसला किया और अपनी बेटी को जन्म दिया। समय के साथ यह मामला केवल प्रेम कहानी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि एक मां की अपने बच्चे के अधिकार के लिए लड़ाई बन गया। युवती ने ठान लिया कि वह अपनी बेटी को पिता का नाम दिलाकर ही रहेगी। इसके लिए उसने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और अपने प्रेमी की रिहाई के लिए गुहार लगाई।
सुनवाई के दौरान मानवीय रुख अपनाते हुए कोर्ट ने कहा कि यदि दोनों परिवार शादी के लिए सहमत होकर लिखित समझौता प्रस्तुत करते हैं, तो युवक को जमानत दी जा सकती है। कोर्ट के इस फैसले से युवती को नई उम्मीद मिली।आखिरकार करीब आठ महीने बाद युवक को जमानत मिल गई। इसके बाद न्यायालय परिसर में स्थित मंदिर में दोनों की शादी कराई गई। यह शादी सिर्फ एक औपचारिकता नहीं थी, बल्कि एक लंबे संघर्ष, धैर्य और एक मां के अटूट हौसले की जीत का प्रतीक थी। इस खास मौके पर उनकी 9 महीने की मासूम बेटी भी मौजूद रही, जो इस नई शुरुआत की गवाह बनी।