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विजया एकादशी कब, व्रत के नियम और सावधानियां जानें

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। हर साल कुल 24 एकादशियां होती हैं, जिसमें प्रत्येक मास में दो बार यह पवित्र तिथि आती है। फाल्गुन मास की पहली एकादशी को विजया एकादशी कहा जाता है, जो इस वर्ष 24 फरवरी को पड़ रही है।

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© Vijaya Ekadashi
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Vijaya Ekadashi: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व होता है। सालभर में 24 एकादशी तिथियां आती हैं, जिनमें प्रत्येक माह दो बार यह व्रत रखा जाता है। फाल्गुन माह की पहली एकादशी ‘विजया एकादशी’ 24 फरवरी को पड़ रही है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से धन, सुख-समृद्धि और शत्रु पर विजय प्राप्त होती है।


क्या कहते हैं देवघर के ज्योतिषाचार्य?

देवघर के पागल बाबा आश्रम स्थित मुद्गल ज्योतिष केंद्र के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित नंदकिशोर मुद्गल के अनुसार, विजया एकादशी व्रत करने से व्यक्ति को हर क्षेत्र में सफलता मिलती है। साथ ही, रोग-बीमारी से मुक्ति और जीवन में सुख-समृद्धि की वृद्धि होती है। लेकिन, इस दिन कुछ गलतियों से बचना बेहद जरूरी है, वरना माता लक्ष्मी रुष्ट हो सकती हैं।


विजया एकादशी पर इन गलतियों से बचें

1. तुलसी को स्पर्श न करें

🔹 एकादशी के दिन तुलसी के पौधे को छूना या उसमें जल अर्पित करना वर्जित माना गया है।

🔹 तुलसी माता लक्ष्मी का प्रतीक मानी जाती हैं, इसलिए इसे स्पर्श करने से व्रत का पुण्य फल कम हो सकता है।


2. चावल का सेवन न करें

🔹 एकादशी के दिन चावल खाना निषेध माना गया है।

🔹 पौराणिक मान्यता के अनुसार, चावल में जल तत्व अधिक होता है, जो व्रत के प्रभाव को कम कर सकता है।


3. काले या नीले कपड़े न पहनें

🔹 काले और नीले रंग के कपड़े पहनना अशुभ माना जाता है।

🔹 इस दिन लाल, पीले या सफेद वस्त्र धारण करना शुभ होता है।


विजया एकादशी का महत्व

🔹 इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से दरिद्रता दूर होती है और धन-धान्य की वृद्धि होती है।

🔹 शत्रुओं पर विजय, कोर्ट-कचहरी से मुक्ति और मानसिक शांति के लिए भी यह व्रत अत्यंत प्रभावी माना गया है।