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11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत, जानें कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और सामग्री

Shardiya Navratri 2026: शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर से शुरू हो रही है। जानें कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त, मां शैलपुत्री की पूजा विधि, आवश्यक पूजा सामग्री और नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा का महत्व।

Shardiya Navratri 2026
प्रतिकात्मक तस्वीर
Mukesh Srivastava
4 मिनट

Shardiya Navratri 2026: शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर से हो रही है। नवरात्रि के पहले दिन घरों और पूजा पंडालों में मां दुर्गा की आराधना की जाएगी। इस दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा का विधान है। नवरात्रि के दौरान घर में घटस्थापना करने वाले श्रद्धालुओं के लिए कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त, पूजा सामग्री और सही विधि जानना जरूरी है।



कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त

11 अक्टूबर को कलश स्थापना के लिए सुबह 6 बजकर 19 मिनट से 10 बजकर 12 मिनट तक का समय बताया जा रहा है। इस तरह श्रद्धालुओं को घटस्थापना के लिए करीब 3 घंटे 53 मिनट का समय मिलेगा। भक्त इस अवधि में अपने घरों में विधि-विधान से कलश स्थापना कर मां दुर्गा की पूजा शुरू कर सकते हैं।



पहले दिन होती है मां शैलपुत्री की पूजा

नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की आराधना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां शैलपुत्री पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं। उनका वाहन वृषभ है और उनके एक हाथ में त्रिशूल तथा दूसरे हाथ में कमल सुशोभित रहता है। भक्त मां शैलपुत्री की पूजा कर सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं।



कलश स्थापना के लिए पूजा सामग्री

घटस्थापना से पहले पूजा की सभी आवश्यक सामग्री जुटा लेना बेहतर रहता है। इसके लिए श्रद्धालुओं को कलश और साफ जल, नारियल और आम के पत्ते, रोली, अक्षत और मौली, फूल, फल और भोग सामग्री, धूप, दीपक और घी, पूजा के लिए चौकी और साफ कपड़ा, जौ बोने के लिए मिट्टी और पात्र की जरूरत पड़ेगी। पूजा सामग्री को पहले से व्यवस्थित कर लेने से घटस्थापना के समय किसी तरह की परेशानी नहीं होती।



कलश स्थापना और मां शैलपुत्री की पूजा विधि

नवरात्रि के पहले दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करें। इसके बाद चौकी पर साफ कपड़ा बिछाकर मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। यदि आपके घर में जौ बोने की परंपरा है, तो मिट्टी के पात्र में मिट्टी डालकर जौ बो दें। इसके बाद कलश में साफ जल भरें। परंपरा के अनुसार, कलश में सुपारी, अक्षत या सिक्का रखा जा सकता है। कलश के मुख पर आम के पत्ते लगाएं और उसके ऊपर नारियल स्थापित करें। इसके बाद कलश को पूजा स्थल पर रखें।


घटस्थापना के बाद मां दुर्गा का ध्यान करें और पूजा का संकल्प लें। फिर मां शैलपुत्री को फूल, अक्षत, फल और भोग अर्पित करें। धूप-दीप जलाकर मां की आरती करें। परिवार की परंपरा के अनुसार, मंत्र जाप या दुर्गा चालीसा का पाठ भी किया जा सकता है।



नवरात्रि में नौ दिनों तक होती है नौ स्वरूपों की पूजा

शारदीय नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। प्रत्येक दिन देवी के एक विशेष स्वरूप की आराधना का विधान है।


पहला दिन: मां शैलपुत्री

दूसरा दिन: मां ब्रह्मचारिणी

तीसरा दिन: मां चंद्रघंटा

चौथा दिन: मां कूष्मांडा

पांचवां दिन: मां स्कंदमाता

छठा दिन: मां कात्यायनी

सातवां दिन: मां कालरात्रि

आठवां दिन: मां महागौरी

नौवां दिन: मां सिद्धिदात्री



नवरात्रि के दौरान श्रद्धालु नौ दिनों तक व्रत, पूजा-पाठ और मंत्र जाप के माध्यम से मां दुर्गा की आराधना करते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से मां की पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि और शांति आती है।



नोट: कलश स्थापना का मुहूर्त स्थान और पंचांग के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। पूजा करने से पहले स्थानीय पंचांग या योग्य पुरोहित से समय की पुष्टि कर लें।

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FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता