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Shani Dev: शनिदेव की कृपा पाने के उपाय, जानें मंत्र

शनिदेव को न्याय के देवता और कर्मफल दाता के रूप में पूजा जाता है। उनकी कृपा पाने के लिए शनिवार का दिन विशेष महत्व रखता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शनिदेव अपने भक्तों को उनके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Feb 07, 2025, 8:47:41 PM

Shani Dev Puja

Shani Dev Puja - फ़ोटो Shani Dev Puja

Shani Dev: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शनि देव न्याय के देवता कहलाते हैं। साथ ही वह कर्मफल दाता भी हैं, क्योंकि शनि देव लोगों को उनके कर्मों के लिए फल प्रदान करते हैं। ऐसे में अगर आप चाहते हैं कि शनि देव की दया दृष्टि आपके ऊपर बनी रहे, तो इसके लिए आप शनिवार के दिन शनिदेव के मंत्रों का जप कर सकते हैं।


शनिवार के दिन क्या करें?

शनिवार के दिन सुबह उठकर स्नान आदि करने के बाद काले रंग के वस्त्र धारण करें। इसके बाद किसी शनि मंदिर में जाकर तिल या सरसों के तेल का दान करें। शनिदेव की पूजा के दौरान उनके मंत्रों का जप भी जरूर करना चाहिए। ऐसा करने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं।

अधिक लाभ पाने के लिए शनि चालीसा का पाठ भी एक बेहतर विकल्प है। इसके अलावा, पीपल के पेड़ पर शनिवार की शाम को सरसों के तेल का दीपक जलाएं। ऐसा करने से शनिदशा का प्रभाव कम हो सकता है।


शनिदेव के मंत्र

शनिवार के दिन निम्न मंत्रों का जप करना विशेष फलदायी होता है:

ऊँ शं शनैश्चाराय नमः।

ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनये नमः।

ॐ नीलाजंन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्।छाया मार्तण्ड सम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्।

ऊँ शन्नो देवीरभिष्टडआपो भवन्तुपीतये।

ऊँ भगभवाय विद्महैं मृत्युरुपाय धीमहि तन्नो शनिः प्रचोद्यात्।

ऊँ श्रां श्रीं श्रूं शनैश्चाराय नमः।

ऊँ हलृशं शनिदेवाय नमः।

ऊँ एं हलृ श्रीं शनैश्चाराय नमः।


विशेष मंत्र और प्रार्थना

शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए निम्न प्रार्थना का पाठ करें:

"अपराधसहस्त्राणि क्रियन्तेहर्निशं मया।दासोयमिति मां मत्वा क्षमस्व परमेश्वर।।गतं पापं गतं दु:खं गतं दारिद्रय मेव च।आगता: सुख-संपत्ति पुण्योहं तव दर्शनात्।"


साढ़ेसाती का प्रभाव कम करने का उपाय

शनि की साढ़ेसाती के प्रभाव को कम करने के लिए शनिवार के दिन महामृत्युंजय मंत्र का जप करना भी एक बेहतर उपाय है। इससे आपको अपनी स्थिति में लाभ देखने को मिल सकता है।


महामृत्युंजय मंत्र:

"ऊँ त्रयम्बकं यजामहे सुगंधिम पुष्टिवर्धनम।उर्वारुक मिव बन्धनान मृत्योर्मुक्षीय मा मृतात।"