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baba baidyanathdham temple deoghar : देवघर मंदिर में शिवलिंग के ऊपर पोता गया सीमेंट, पंडा समाज में आक्रोश; प्रशासन ने दिया जांच का आदेश

DEVGHAR : देश के अंदर महादेव के 12 ज्योतिर्लिंग काफी फेमस हैं। यहां हर समय भक्तों कि लंबी भीड़ लगी रहती है। काफी संख्या में भक्त अपनी मुराद लेकर भगवान भोले शंकर के पास आते हैं। इसी

baba baidyanathdham temple deoghar : देवघर मंदिर में शिवलिंग के ऊपर पोता गया सीमेंट, पंडा समाज में आक्रोश; प्रशासन ने दिया जांच का आदेश
Tejpratap
Tejpratap
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DEVGHAR : देश के अंदर महादेव के 12 ज्योतिर्लिंग काफी फेमस हैं। यहां हर समय भक्तों कि लंबी भीड़ लगी रहती है। काफी संख्या में भक्त अपनी मुराद लेकर भगवान भोले शंकर के पास आते हैं। इसी 12 ज्योतिर्लिंग का नाम है बाबा बैधनाथ मंदिर जो झारखंड के देवघर में है। इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यह त्रेतायुग का मंदिर है। ऐसे में अब इस ज्योतिर्लिंग को लेकर अब बड़ी खबर सामने आई है। 


खबर यह है कि बाबा मंदिर में शिवलिंग के ऊपर सीमेंट पोता गया है। इसके बाद अब इस मामले को लेकर पंडा समाज में काफी आक्रोश है। ऐसा कहा जा रहा है कि यह काम जिला प्रसाशन के तरफ से किया गया है। ऐसे में पंडा धर्म रक्षिणी सभा ने कहा कि मंदिर में पौराणिक और परंपरागत नियमों को ताक पर रखकर जिला प्रशासन काम कर रही है।जिसकी जितनी भी निंदा की जाए कम है। वहीं देवघर के बाबा मंदिर के गर्भ गृह में बने शिवलिंग को लेकर इस तरह के मामले सामने के बाद इनलोगों ने काफी आपति भी जताई है। 


पंडा धर्म रक्षिणी सभा की तरफ से चंद्र शेखर खवाड़े ने कहा कि मंदिर के गर्भ गृह में जिला प्रशासन जो भी निर्माण कर रही है।वह श्रद्धालुओं के आस्था को सीधा ठेस पहुंचता है। पांडा धर्म रक्षिणी सभा जिला प्रशासन के इस कार्य की घोर निंदा करती है और जल्द से जल्द राज्य के मुख्यमंत्री और उच्च अधिकारियों से संज्ञान लेने की मांग करती है।


वही पूरे मामले पर देवघर के उपायुक्त विशाल सागर ने ट्वीट के माध्यम से कहा कि जैसे ही उन्हें जानकारी मिली वैसे ही मंदिर प्रभारी को जांच कर प्रतिवेदन जमा करने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा उपायुक्त ने निर्देश देते हुए कहा कि जिनके द्वारा भी बिना सूचना के मंदिर के गर्भ गृह में कार्य किया जा रहा है।उनपर नियमसंगत कार्रवाई भी की जाएगी।


बता दे कि मंदिर के गर्भ गृह में किसी भी तरह की कार्य किए जाने से पहले श्राइन बोर्ड और जिला प्रशासन के उच्च अधिकारियों को दी जाती है उसके बाद ही कोई काम किया जाता है। ऐसे में बिना किसी ठोस निर्णय और आदेश के इस तरह के काम किए जाने को लेकर काफी आक्रोश का भावना कायम हो गया है। फिलहाल जांच कि बात कही जा रही है। 


गौरतलब हो कि, सभी ज्योतिर्लिंग में त्रिशूल विराजमान है, लेकिन देवघर के बाबा बैजनाथ धाम मंदिर के शिखर पर पंचशूल विराजमान है. साल में एक बार इस पंचशूल की पूजा भी की जाती है।  शास्त्र में ऐसा उल्लेख है कि बाबा बैद्यनाथ धाम पूर्वोत्तर के क्षेत्र में विराजमान है और यह एकमात्र ऐसा ज्योतिर्लिंग है, जहां बाबा बैद्यनाथ के साथ मां भगवती भी विराजमान हैं। 


 इस मंदिर परिसर में बैद्यनाथ मंदिर के साथ कुल 22 मंदिर हैं, जिसके शिखर पर पंचशूल विराजमान है। चशूल के पीछे की कथा बताते हुए तीर्थ पुरोहित कहते हैं कि लंकापति रावण ने अपने गुरु शुक्राचार्य से पंचवक्त्रम निर्माण की विद्या सीखी थी। इसी कारण रावण ने लंका के चारों ओर पंचशूल लगाया था. पंचशूल लगाने से रावण की शक्ति बढ़ गई. रावण ने उसी पंचशूल को बाबा बैद्यनाथ मंदिर के शीर्ष पर भी लगाया था, ताकि मंदिर को कोई क्षति न पहुंचे। बाद में अगस्त मुनि ने श्रीराम को पंचशूल ध्वस्त करने की विधि बताई थी।