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‘क्या औचित्य है महिला आरक्षण बिल का जब..’, रोहिणी आचार्य के तीखे सवाल, देश में महिलाओं की हालत पर जताई चिंता

BiBihar Politics: लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पर चर्चा के बीच रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पर लंबा पोस्ट कर महिलाओं की स्थिति, सुरक्षा और समानता पर गंभीर सवाल उठाए।

Bihar Politics
रोहिणी का बड़ा हमला
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Mukesh Srivastava
5 मिनट

Bihar Politics: महिला आरक्षण बिल को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने अपनी प्रतिक्रिया में महिलाओं की वास्तविक स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए हैं। शुक्रवार को उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लंबा पोस्ट साझा किया।


रोहिणी आचार्य ने कहा कि जब समाज में महिलाओं को मायके और ससुराल के भेदभाव, सुरक्षा की चुनौतियों और बराबरी के अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा हो, तब महिला आरक्षण बिल का वास्तविक औचित्य क्या है। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि देश में बड़ी संख्या में गरीब महिलाएं शिक्षा से वंचित हैं और आर्थिक तंगी के कारण आत्मनिर्भर नहीं बन पा रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि महिलाओं के सामाजिक, सार्वजनिक और पेशेवर जीवन में अभी भी भेदभाव मौजूद है और उनके आगे बढ़ने में कई बाधाएं हैं।


रोहिणी आचार्य ने यह भी कहा कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में महिलाएं आज भी चूल्हा-चौका तक सीमित रहने को मजबूर हैं और कई स्थानों पर पर्दा प्रथा जैसी सामाजिक परंपराएं अब भी जारी हैं। उन्होंने महिलाओं के पहनावे को लेकर होने वाली आलोचना और सामाजिक दबाव पर भी सवाल उठाए। अपने पोस्ट में उन्होंने बढ़ते अपराधों का जिक्र करते हुए कहा कि महिलाएं दहेज, यौन उत्पीड़न, बलात्कार और घरेलू हिंसा जैसी घटनाओं का शिकार हो रही हैं, जबकि कई मामलों में उन्हें न्याय पाने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है।


उन्होंने यह भी कहा कि आत्मसम्मान के लिए आवाज उठाने पर महिलाओं को सोशल मीडिया ट्रोलिंग और घरेलू हिंसा जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। साथ ही उन्होंने समाज में पितृसत्तात्मक सोच के प्रभाव पर भी सवाल उठाए। रोहिणी आचार्य ने यह भी कहा कि आजादी के कई दशकों बाद भी महिलाओं को बराबरी का दर्जा पाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। उन्होंने संपत्ति में कानूनी अधिकार होने के बावजूद महिलाओं को उनके हक से वंचित रखने की प्रवृत्ति पर भी चिंता जताई।


रोहिणी ने एक्स पर लिखा, “क्या औचित्य है महिला आरक्षण बिल का जब: हमारे देश में महिलाओं की सुरक्षा , उनके वास्तविक सशक्तिकरण , उनको शिक्षित किए जाने, आत्म - निर्भर बनाए जाने की सार्थकता पर ही सवाल है , बड़ी गरीब आबादी वाले देश में गरीब महिलाओं को शिक्षा पाने से वंचित होना पड़ रहा है , महिलाओं के सामाजिक - सार्वजनिक व् पेशवर ( प्रोफेशनल ) प्रयासों में भेद- भाव है , उनके आगे बढ़ने के अवसरों में तमाम अड़चनें हैं , महिलाओं की बड़ी आबादी पढ़ने - लिखने के बाद भी चूल्हा - चौका करने को ही मजबूर है, देश के लगभग हरेक राज्य में अभी भी पर्दा करने की प्रथा का प्रचलन है , शहर से लेकर गाँव तक महिलाओं के द्वारा पहने जाने वाले कपड़ों पर ऐतराज है , निरंतर हो रहे बलात्कार , दहेज़ को लेकर किए जाने वाले अत्याचार, यौन उत्पीड़न एवं यौन शोषण की शिकार हो रहीं महिलाओं को न्याय पाने - मिलने से वंचित होना पड़ रहा है , आत्म - सम्मान के लिए अपनी आवाज उठाने पर महिलाओं को घरेलू हिंसा, आज के दौर के कुचलन सोशल मीडिया ट्रोलिंग से जूझना पड़ रहा है , मायके और ससुराल के भेद - भाव की अग्नि परीक्षा देनी पड़ रही है , पितृसत्तात्मक सोच के वर्चस्व के अधीन रहना पड़ रहा है , आजादी हासिल होने के लगभग आठ दशक के बाद भी हकीकत में बराबरी का दर्जा  पाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है , समाज - परिवार के लिए किए गए उनके त्याग को सौदा बता कर महिलाओं के आत्म - विश्वास को तोड़ा जा रहा है, माता - पिता की संपत्ति में बराबर का कानूनी हक़ हासिल होने के बावजूद महिलाओं - बेटियों को अपने हक़ से वंचित होना पड़ रहा है ???”

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FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता