Bihar Politics: बिहार के जमुई में छात्रा के साथ हुई घटना और आरोपी नंदन यादव के एनकाउंटर के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री और हम के संरक्षक जीतन राम मांझी ने एक तरफ तेजस्वी यादव पर तीखा तंज किया तो दूसरी ओर तेजस्वी की बड़ी बहन रोहिणी आचार्य ने जीतन राम मांझी पर पलटवार किया है।
दरअसल, जमुई में पुलिस ने छात्रा से छेड़खानी करने वाले आरोपी नंदन यादव का एनकाउंटर किया है। नंदन यादव के पैर में गोली लगी है। पुलिस के इस एक्शन के बाद जीतन राम मांझी ने आरोपी की जाति का जिक्र करते हुए एक्स पर लिखा कि अब तो तेजस्वी यादव यही कहेंगे कि सम्राट चौधरी ने उनके भाई को गोली मरवा दी। अब रोहिणी आचार्य ने मांझी पर हमला बोला है।
रोहिणी आचार्य ने एक्स पर लिखा, “बिहार से आने वाले एक उम्रदराज केंद्रीय मंत्री का सोशल मीडिया पर एक पोस्ट देख कर ऐसा लगता है कि बढ़ती उम्र के साथ - साथ उनका मानसिक संतुलन और राजनीतिक विवेक भी पूरी तरह से डगमगा चुका है। जमुई जैसी संवेदनशील और घिनौनी घटना पर दुःख जताने या सख्त कार्रवाई की बात करने की बजाय ओछी और घटिया बयानबाजी पर उतर आए हैं मंत्री महोदय l
किसी अपराधी का कोई धर्म या उसकी कोई जाति नहीं होती, लेकिन मंत्री महोदय ने जिस तरह से एक अपराधी की हरकत को पूरी 'यादव' जाति से जोड़ कर कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की है, वह उनकी बेहद ओछी और जहरीली मानसिकता को दिखाता है। क्या कोई अपराधी किसी जाति विशेष का प्रतिनिधि होता है?
बिहार और देश के हर राजनीतिक दल में हर जाति के लोग शामिल हैं। यादव समाज के लोग सिर्फ एक पार्टी में नहीं, बल्कि बीजेपी, जदयू , हम और हर राजनीतिक दल में मौजूद हैं, तो क्या ऐसे में किसी एक अपराधी के गुनाह के लिए उस पूरी जाति या उस जाति के तमाम नेताओं और उस दल को जिम्मेदार ठहरा दिया जाएगा?
एक संवैधानिक या मंत्री पद पर बैठे किसी व्यक्ति के द्वारा विभाजनकारी और निचले स्तर की भाषा की जितनी भी निंदा की जाए, वो कम है। मंत्री महोदय को अपनी इस बिगड़ती दिमागी हालत और ओछी बयानबाजी की बीमारी का इलाज कराना चाहिए, क्योंकि न्याय का मतलब अपराधियों को सजा देना होता है, किसी पूरी जाति को बदनाम और टारगेट करना नहीं।





