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क्या नीतीश ले रहे हैं RJD के अंदरूनी फैसले, लालू–तेजस्वी के सरेंडर से जगदा बाबू के बाद अनंत सिंह पर संकट

PATNA : विपक्ष में रहते हुए सबसे ज्यादा मजबूत और एकजुट नजर आने वाली राष्ट्रीय जनता दल को आखिर नीतीश कुमार के साथ सत्ता में जाते ही क्या हो गया? बिहार के राजनीतिक गलियारे में इ

क्या नीतीश ले रहे हैं RJD के अंदरूनी फैसले, लालू–तेजस्वी के सरेंडर से जगदा बाबू के बाद अनंत सिंह पर संकट
First Bihar
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PATNA : विपक्ष में रहते हुए सबसे ज्यादा मजबूत और एकजुट नजर आने वाली राष्ट्रीय जनता दल को आखिर नीतीश कुमार के साथ सत्ता में जाते ही क्या हो गया? बिहार के राजनीतिक गलियारे में इन दिनों यह सवाल हर तरफ चर्चा का कारण बना हुआ है. नीतीश कुमार के साथ लालू यादव ने भले ही बिहार में सरकार बना ली हो लेकिन नई सरकार के अंदर आरजेडी के एक के बाद एक दो मंत्रियों का इस्तीफा कराया जा चुका है. पहले अनंत सिंह के करीबी कार्तिक सिंह का इस्तीफा हुआ और उसके बाद जगदानंद सिंह के बेटे सुधाकर सिंह को इस्तीफा देना पड़ा. इन दोनों मामलों में नीतीश कुमार ने अपनी शर्तों से समझौता नहीं किया. सीएम नीतीश कार्तिकेय सिंह के मसले पर दागी वाली इमेज को लेकर कोई समझौता करते नहीं दिखे तो वही कैबिनेट की बैठक के दौरान खुद से भिड़ने वाले मंत्री सुधाकर सिंह को भी आखिरकार चलता करवा ही दिया.



तेजस्वी यादव ने 2020 के विधानसभा चुनाव के दौरान जिस ए टू जेड वाले फार्मूले की बात कही थी और वो जहां उपचुनाव होते होते तेजस्वी अपने साथ भूमिहार वोटरों को लाने में सफल दिखे थे. नीतीश कुमार ने तेजस्वी के इसी समीकरण को अनंत सिंह और कार्तिक सिंह के बहाने साध लिया. वहीं दूसरी तरफ जगदानंद सिंह जो लालू यादव के सबसे बड़े थिंक टैंक माने जाते रहे, तेजस्वी यादव के सबसे भरोसेमंद नेता के तौर पर जिनकी पहचान होती रही, लालू यादव खुद अपने बेटे तेज प्रताप यादव को जगदानंद सिंह के ऊपर ज्यादा तरजीह नहीं देते नजर आए, उन्हीं जगदानंद सिंह को अब पार्टी में अगर हास्य पर लगा दिया गया है तो इसके पीछे भी नीतीश कुमार की माने जा रहे हैं. नीतीश कुमार की राजनीति को लेकर यह चर्चा हो रही है कि नीतीश ही अब आरजेडी के अंदर के फैसले ले रहे हैं. आरजेडी के अंदर किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि लालू यादव और तेजस्वी यादव से जगदानंद सिंह की दूरी ऐसी बढ़ जाएगी. नीतीश कुमार की राजनीतिक झप्पी का ही असर है कि जगदा बाबू आज लालू यादव से दूर जा चुके हैं और तेजस्वी नीतीश के हर फैसले के साथ खड़े नजर आ रहे. सुधाकर सिंह के मामले में तो कम से कम यह बात कही जा सकती है.



जगदा बाबू के साथ साथ अनंत सिंह को एक झटका पहले लालू और तेजस्वी से दिलवा चुके हैं, लेकिन अब अनंत सिंह के लिए दूसरे झटके की बारी हो सकती है. दरअसल मोकामा विधानसभा उपचुनाव को लेकर अब तक आरजेडी ने अपने उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है. हालांकि इस सीट पर आरजेडी की तरफ से अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी को सबसे प्रबल दावेदार माना जा रहा है, लेकिन अनंत सिंह की पत्नी की उम्मीदवारी नीतीश कुमार और उनकी पार्टी के नेताओं को हजम नहीं हो रही. ऐसे में नया सवाल यह है कि क्या वाकई नीतीश इस बार भी आरजेडी के अंदरूनी फैसले पर अपनी मुहर लगा पाएंगे? क्या अनंत सिंह के पाले में आरजेडी का टिकट नहीं जाएगा और तेजस्वी और लालू यादव नीतीश के मुताबिक वहां से उम्मीदवार में बदलाव कर सकते हैं?




अगर ऐसा होता है तो वाकई नीतीश कुमार अपनी राजनीतिक शैली से लालू यादव और तेजस्वी यादव को पॉलीटिकल पॉलिटिकल हिप्टोनाइज करने में सफल माने जाएंगे. नीतीश की राजनीति का अंदाज भी यही रहा है. बीजेपी के साथ रहते हुए उन्होंने यही किया था. अब लालू और उनकी पार्टी के साथ भी नीतीश उसी अंदाज में आगे बढ़ रहे हैं.

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