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बिहार में उपचुनाव: जेडीयू के दो विधायकों की मौत को ही तेजस्वी ने बना लिया चुनावी मुद्दा, पूछा-किस मुंह से वोट मांगेंगे नीतीश

PATNA: बिहार में विधानसभा की दो सीटों पर उप चुनाव हो रहे हैं। दोनों सीटों पर उप चुनाव इसलिए हो रहे हैं क्योंकि वहां के जेडीयू विधायकों की मौत हो गयी है। दो सीटों पर उप चुनाव नीतीश

बिहार में उपचुनाव: जेडीयू के दो विधायकों की मौत को ही तेजस्वी ने बना लिया चुनावी मुद्दा, पूछा-किस मुंह से वोट मांगेंगे नीतीश
Jitendra Vidyarthi
5 मिनट

PATNA: बिहार में विधानसभा की दो सीटों पर उप चुनाव हो रहे हैं। दोनों सीटों पर उप चुनाव इसलिए हो रहे हैं क्योंकि वहां के जेडीयू विधायकों की मौत हो गयी है। दो सीटों पर उप चुनाव नीतीश कुमार के लिए जीवन मरण का सवाल बन गया है। वहीं राजद भी अपना सब कुछ झोंक कर मैदान में उतरा है। दिलचस्प बात ये है कि राजद और तेजस्वी यादव ने जेडीयू के विधायकों की मौत को ही चुनावी मुद्दा बना लिया है। तेजस्वी ने आज चुनाव प्रचार किया लोगों से कहा-जो नीतीश कुमार अपने विधायकों की जान नहीं बचा सके, वे जनता से वोट किस मुंह से मांगेंगे।


विधायकों की मौत ही चुनावी मुद्दा

दरअसल जिन दो सीटों पर उप चुनाव हो रहे हैं उनमें मुंगेर जिले का तारापुर औऱ दरभंगा जिले का कुशेश्वरस्थान सीट शामिल है. तारापुर के विधायक मेवालाल चौधरी तो कुशेश्वरस्थान के विधायक शशिभूषण हजारी हुआ करते थे. दोनों की मौत बीमारी से हुई. तेजस्वी उनकी मौत की कहानी लोगों को सुना रहे हैं. उनका सवाल है कि बिहार सरकार अपने विधायकों का इलाज नहीं करा पायी, वह आम जनता के साथ क्या सलूक कर रही है ये बताने की जरूरत नहीं है।


इलाज के लिए तड़प कर हुई थी मेवालाल चौधरी की मौत

मुंगेर के तारापुर से जेडीयू के विधायक मेवालाल चौधरी की मौत कोरोना का शिकार बन कर हो गयी थी. उनकी मौत की दर्दनाक कहानी सामने आयी थी. मेवालाल चौधरी जब कोरोना पीडित हो कर तड़प रहे थे तो सरकारी सिस्टम समय पर उनका कोविड टेस्ट रिपोर्ट भी नहीं दे पाया. जब कोरोना पॉजिटिव हुए तो चौथे दिन उनकी जांच रिपोर्ट आय़ी।


तब तक उनकी हालत औऱ बिगड़ गयी थी. पटना के आईजीआईएमएस में उन्हें भर्ती नहीं किया गया था. आईजीआईएमएस कह रहा था कि वह बिना जांच रिपोर्ट के भर्ती ही नहीं लेगा. विधायक मेवालाल चौधरी किसी तरह पटना के एक निजी अस्पताल में भर्ती हुए. वहां भी उन्हें आईसीयू में बेड नहीं मिला. जब बेड मिला तब हालत इतनी बिगड़ गयी थी कि उनकी जान ही चली गयी।


तेजस्वी विधायक मेवालाल चौधरी की मौत का मुद्दा उठा रहे हैं. आज जनसंपर्क के दौरान उन्होंने लोगों से कहा कि वे नीतीश कुमार से पूछें कि उस सीट पर उप चुनाव क्यों हो रहा है. क्यों उनके विधायक मेवालाल चौधरी की मौत हो गयी. क्या राज्य सरकार उनके इलाज का इंतजाम करा पायी. अगर सरकार अपने विधायक का ही इलाज नहीं करा पाये तो आम लोगों का क्या होगा।


वहीं कुशेश्वरस्थान से जेडीयू के विधायक रहे शशिभूषण हजारी की भी मौत बीमारी से हुई. शशिभूषण हजारी को इलाज के लिए दिल्ली जाना पड़ा. तेजस्वी लोगों से कह रहे हैं कि विधायक के लिए जब बिहार सरकार ने इलाज का इंतजाम नहीं किया तभी उन्हें दिल्ली जाना पडा. दिल्ली जाने में देर हुई और इसके कारण उनकी मौत हो गयी. उनकी मौत से भी आम लोगों की हालत का अंदाजा लगाया जा सकता है.


नीति आयोग की रिपोर्ट का भी हवाला

तेजस्वी यादव बिहार में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर नीति आयोग की रिपोर्ट का भी हवाला दे रहे हैं। दरअसल नीति आयोग ने बिहार में सरकारी स्वास्थ्य सुविधा को देश में सबसे बदतर करार दिया है. तेजस्वी कह रहे हैं कि केंद्र में उसी एनडीए की सरकार है जिसकी बिहार में भी सरकार है. उसके बावजूद केंद्र सरकार की ही एजेंसी कह रही है कि बिहार में स्वास्थ्य सुविधा सबसे बदतर है तो इसके लिए कौन जिम्मेवार है।


नीतीश को वोट मांगने का हक नहीं

तेजस्वी ने कहा कि नीतीश कुमार को उप चुनाव में वोट मांगने का हक नहीं है. वे जनता के सामने सिर्फ झूठा दावा करते रहे. लेकिन विधायकों की मौत और नीति आयोग की रिपोर्ट ने उनकी पोल खोल दी है। लिहाजा अगर बिहार के मुख्यमंत्री उप चुनाव में वोट मांगने आते हैं तो जनता को उनसे सवाल पूछना चाहिये।