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94 लाख गरीब परिवारों को 10 हजार महीना गरीबी भत्ता दे सरकार, बोली BJP..जातीय सर्वे रिपोर्ट में दिख रहा बदहाल बिहार की सच्चाई

PATNA: बिहार विधान सभा में नेता प्रतिपक्ष विजय कुमार सिन्हा ने राज्य के 94 लाख गरीब परिवारों को 2-2 लाख रुपये की सहायता देने की योजना में लाभुकों को लघु उद्यमी बनाने की शर्तों को छ

 94 लाख गरीब परिवारों को 10 हजार महीना गरीबी भत्ता दे सरकार, बोली BJP..जातीय सर्वे रिपोर्ट में दिख रहा बदहाल बिहार की सच्चाई
Jitendra Vidyarthi
3 मिनट

PATNA: बिहार विधान सभा में नेता प्रतिपक्ष विजय कुमार सिन्हा ने राज्य के 94 लाख गरीब परिवारों को 2-2 लाख रुपये की सहायता देने की योजना में लाभुकों को लघु उद्यमी बनाने की शर्तों को छलावा बताया है। उन्होंने कहा कि 6000 रुपये से कम मासिक आय वाले परिवार 2 लाख रुपया में कैसे लघु उद्यमी बनेंगे, यह समझ से परे है। 6000 रुपये की मासिक आमदनी के साथ 5 आदमी के परिवार को चलाने में कर्ज में पूरा परिवार डूब जाता है औऱ अब 2 लाख रुपये देकर उद्यमी बनाना राज्य के गरीबों के साथ मजाक किया जा रहा है।


विजय सिन्हा ने सरकार से मांग की है कि 94 लाख गरीब परिबारों को सरकार प्रतिमाह10 हज़ार रुपया ग़रीबी भत्ता दे ताकि वे इज्जत पूर्बक अपने जीवन का निर्बाह कर सके। कहा कि सरकार राज्य की सभी योजनाओं और भुगतान का नियम बनाने के समय सुनिश्चित करती है कि भुगतान से पूर्व लाभुकों से किस प्रकार अवैध राशि की उगाही की जाय। राज्य में रोज हत्या, बलात्कार, लूट, डकैती के कारण निवेशक आने से डर रहे है। 33 वर्षों में राज्य का औद्योगिक विकास इसी कारण नहीं हो रहा है। अब 2 लाख की छोटी राशि से उद्यमी बनाने की बात हास्यास्पद है।


उन्होंने कहा कि बिहार में राज करना ही सरकार की प्राथमिकता है। विकास से इन्हें कोई लेना देना नहीं है। राज्य में केन्द्रीय योजनाओं के कारण पथों का विस्तार दिखता है। सरकार ने शिक्षा, कृषि, स्वास्थ्य, सिंचाई, ग्रामीण कार्य सहित अन्य कार्य विभागों को चुनावी फंड इकट्ठा करने का स्त्रोत बना लिया है। राज्य में कार्यरत बाहरी एजेन्सियों मालोमाल हो गई है। उन्हें बिना काम का भुगतान होता है और आउटसोर्सिग के नाम पर वे लूट मचाये हुये है। अधिकारी को प्रत्येक माह फिक्स कमीशन के द्वारा  एजेंसियां अपने कार्य की निरन्तरता बरकरार रखते है।


विजय सिन्हा ने कहा कि सरकार द्वारा जारी जातीय सर्वे रिपोर्ट में बिहार की बदहाल स्थिति उजागर हो गई है। अनेक आर्थिक मानकों पर बिहार देश में नीचे से प्रथम अथवा द्वितीय हैं। अभी तक राज्य की आर्थिक प्रगति का सरकार ढिढ़ोरा पीट रही थी। अब देश के सामने वास्तविक स्थिति उजागर हो गई है।