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EWS वर्ग के विद्यार्थियों के पक्ष में उतरे मंत्री संतोष सुमन, उच्च- व्यावसायिक शिक्षा में मिले समान वित्तीय सहायता, नीति बनाने की मांग

EWS Scholarship Scheme: बिहार सरकार के मंत्री संतोष सुमन ने EWS वर्ग के विद्यार्थियों के लिए बड़ी मांग उठाई है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में समान वि

EWS वर्ग के विद्यार्थियों के पक्ष में उतरे मंत्री संतोष सुमन, उच्च- व्यावसायिक शिक्षा में मिले समान वित्तीय सहायता, नीति बनाने की मांग
Ramakant kumar
4 मिनट

EWS Scholarship Scheme: बिहार सरकार में मंत्री संतोष सुमन अब EWS के विद्यार्थियों के पक्ष में उतर आए हैं. उन्होंने उच्च शिक्षा और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में आर्थिक रूप से कमजोर EWS विद्यार्थियों को भी समान वित्तीय सहायता देने के लिए व्यापक नीति बनाने की मांग की है. इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और सभी राज्य सरकारों से पहल करने की अपील की है.


मंत्री संतोष सुमन का कहना है कि केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्गों के पात्र विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति, परीक्षा शुल्क में छूट, नामांकन और ट्यूशन फीस में आर्थिक सहायता दी जाती है. वहीं EWS वर्ग के विद्यार्थियों को भी कुछ योजनाओं के तहत सुविधाएं मिलती हैं, लेकिन इनका दायरा अभी व्यापक और एकसमान नहीं है.


उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि IIT और NIT जैसे संस्थानों में पारिवारिक आय के आधार पर EWS विद्यार्थियों को ट्यूशन फीस में छूट मिलती है, लेकिन UPSC जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में EWS अभ्यर्थियों को आवेदन शुल्क में छूट नहीं मिलती. ऐसे में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों के लिए शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का खर्च बड़ी चुनौती बन जाता है.


UPSC, BPSC और NEET जैसी परीक्षाओं में फीस छूट की मांग

संतोष सुमन ने मांग की है कि EWS वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए ऐसी नीति बनाई जाए, जिसके तहत UPSC, BPSC, SSC, NEET और JEE जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के आवेदन शुल्क में आय के आधार पर रियायत मिले. इसके साथ ही कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में नामांकन शुल्क तथा ट्यूशन फीस में भी आर्थिक सहायता दी जाए.


उन्होंने IIT, मेडिकल, इंजीनियरिंग, प्रबंधन और अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में पढ़ने वाले जरूरतमंद विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति की व्यवस्था करने पर जोर दिया है. इसके अलावा हॉस्टल, मेस और अन्य जरूरी शैक्षणिक खर्चों में भी सहायता देने की मांग की है, ताकि आर्थिक तंगी के कारण किसी योग्य विद्यार्थी की पढ़ाई प्रभावित न हो.


किसी वर्ग की सुविधा कम करने की नहीं, समान अवसर देने की मांग


मंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी मांग किसी दूसरे वर्ग को मिलने वाली सुविधाओं में कटौती करने की नहीं है. उनका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर सभी वर्गों के विद्यार्थियों को शिक्षा के क्षेत्र में समान अवसर उपलब्ध कराना है.


उन्होंने कहा कि आरक्षण का अपना संवैधानिक और सामाजिक उद्देश्य है, जबकि आर्थिक सहायता का आधार जरूरतमंद परिवारों की वास्तविक आर्थिक स्थिति होनी चाहिए. ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ की भावना तभी पूरी होगी, जब सामाजिक न्याय के साथ आर्थिक न्याय भी सुनिश्चित किया जाए.


संतोष सुमन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से आग्रह किया है कि EWS वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए समग्र वित्तीय सहायता नीति बनाने पर गंभीरता से विचार किया जाए. उनका कहना है कि आर्थिक अभाव किसी भी प्रतिभाशाली विद्यार्थी की उच्च शिक्षा और बेहतर भविष्य के रास्ते में बाधा नहीं बनना चाहिए.