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सूबे में पुलिसकर्मियों की कमी पर हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी, राज्य सरकार को आम जनता की सुरक्षा की फिक्र नहीं, मुख्य सचिव और गृह सचिव को हाजिर होने को कहा

PATNA: सूबे में पुलिसकर्मियों की कमी के मामले पर पटना हाईकोर्ट ने एक ऐसी टिप्पणी कर दी जो सरकार के लिए शर्म की वजह हो सकती है। राज्य के पुलिस महकमे में खाली पड़े पदों को नहीं भरे जाने

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PATNA: सूबे में पुलिसकर्मियों की कमी के मामले पर पटना हाईकोर्ट ने एक ऐसी टिप्पणी कर दी जो सरकार के लिए शर्म की वजह हो सकती है। राज्य के पुलिस महकमे में खाली पड़े पदों को नहीं भरे जाने से नाराज हाईकोर्ट ने आज सीधे कह डाला कि राज्य सरकार को आम जनता की सुरक्षा का ख्याल नहीं है। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ए पी शाही और न्यायाधीश अंजना मिश्रा की खंडपीठ ने यह टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट की तरफ से भेजे गए एक मामले की मॉनिटरिंग करते हुए दी। सुप्रीम कोर्ट ने एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए देश के सभी राज्य सरकारों को निर्देश दिया था कि वह अपने पुलिस महकमे के तमाम खाली पदों को चयन प्रक्रिया चला कर भरें। अप्रैल 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु समेत सभी राज्य सरकारों को अगस्त 2020 तक खाली पदों को भरने का डेडलाइन दिया था। बिहार सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट को आश्वस्त किया था कि वह 2020 तक खाली पड़े सभी पदों को भरने की लेकिन हकीकत यह है कि अभी भी बड़ी संख्या में पुलिस विभाग के अंदर पद रिक्त पड़े हैं। हाईकोर्ट की नाराजगी इस बात को लेकर बढ़ी की बिहार सरकार के गृह विभाग ने हाईकोर्ट में एक हलफनामा देकर यह जानकारी दी कि पुलिस विभाग के अंदर खाली पड़े पदों को 2023 तक भर लिया जाएगा। राज्य सरकार ने कहा कि सारी नियुक्तियां तीन चरणों में हो पाएंगी। इस हलफनामे पर खंडपीठ ने कड़ी आपत्ति जताते हुए पूछा कि एक साल के अंदर खाली पड़े पदों को क्यों नहीं भरा जा सकता? हाईकोर्ट ने इस मामले में 13 अगस्त को राज्य के मुख्य सचिव और गृह विभाग के प्रधान सचिव को सुनवाई के दौरान कोर्ट में को कहा है।
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