नीतीश से गुहार: तेजस्वी ने कहा- तबाही का मंजर साफ दिख रहा, पिछले साल जैसी गलती दोबारा मत करिए

1st Bihar Published by: Updated Wed, 28 Apr 2021 02:08:58 PM IST

नीतीश से गुहार: तेजस्वी ने कहा- तबाही का मंजर साफ दिख रहा, पिछले साल जैसी गलती दोबारा मत करिए

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PATNA : बिहार में तेजी से बढ़ते कोरोना के मामले पर विपक्ष ने चिंता जाहिर करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से अपील की है. नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सरकार से कहा कि राज्य में तबाही का मंजर साफ दिख रहा है. ऐसे में अप्रोच बदलने की आवश्यकता है. केंद्र सरकार से बिहार को वाजिब हक़ मांगना चाहिए. 


बुधवार को तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया के माध्यम से लिखा कि "आदरणीय नीतीश जी, कोरोना के Caseload कम दिखाने के चक्कर में आप बिहार का नुक़सान कर रहे है। वाइरस का चेन बढ़ता जा रहा है. कम आँकड़ों दिखाने की वजह से केंद्र से ऑक्सीजन, वैक्सीन, इंजेक्शन रेमडेसिविर, O2 Concentrators, वेंटिलेटर इत्यादि अन्य जरूरी सहायता भी नहीं मिल रहा है और आप कुछ बोल भी नहीं रहे. संक्रमण गाँव-गाँव फैल चुका है. अब भी अपना अप्रोच बदलिये वरना तबाही का मंजर साफ दिख रहा है. केंद्र से बिहार का वाजिब हक माँगिये। हमसे छोटे राज्यों का आवंटन ज़्यादा हो रहा है. अन्य राज्यों का अनुसरण कर देश-विदेश की कंपनियों से सम्पर्क कर medical supplies,वैक्सीन इत्यादि सीधा खरीदिये."


उन्होंने आगे लिखा कि "नीतीश जी, आपसे विनम्र निवेदन है कि पिछले साल जैसी गलती दोबारा मत करिए. आँकड़ो में हेराफेरी कर छवि बचाने से ज़्यादा जरूरी लोगों का स्वास्थ्य है. आप जाँच घटा रहे है लेकिन पॉजिटिविटी रेट बढ़ गया है. जाँच कम होने से संक्रमण की वास्तविकता नहीं मालूम होगी, उसका फैलाव बढ़ता जाएगा. एक साल बाद भी बिहार की कुल कोरोना जाँच में Anti-gen tests की संख्या 65-70% है. जबकि RT-PCR सबसे कम मात्र 30-35% ही है. RT-PCR जाँच की रिपोर्ट आने में 14-15 लग रहे है. Asymptomatic मरीज़ों की जाँच ही नहीं हो रही है. ऑक्सिजन, वेंटिलेटर की छोड़िए बिहार अभी जाँच के स्तर पर ही जूझ रहा है."


तेजस्वी ने सीएम की बैठक पर सवाल उठाते हुए कहा कि "ये समझ नहीं आता कि नीतीश जी की तथाकथित हाई लेवल क्राइसिस ग्रूप की मीटिंग में कोरोना बचाव पर चर्चा होती है या छवि बचाव पर. अभी तक एक भी ऐसा ठोस कदम या निर्णय नहीं लिया गया है, जिससे कोरोना संक्रमण को कम किया जाए, मरीज़ों का उचित इलाज हो सके, अस्पतालों का क्षमतावर्धन हो सके."