1st Bihar Published by: Updated Sep 08, 2020, 9:12:44 AM
- फ़ोटो
PATNA : 14 साल से केस लड़ रहे सिपाही को हाईकोर्ट से तो जीत मिल गई, लेकिन वह लाचार सिस्टम से हार गया है. अब उसने अपने पास कोई और रास्ता नहीं देखकर सुसाइड करने की सोचने पर मजबूर हो गया है.
मामला छपरा के दाउदनगर निवासी नाग नारायण राय से जुड़ा है. नाग नारायण राय ने सिपाही पद के लिए 1989 में प्रकाशित विज्ञापन के तहत आवेदन दिया था। उसे 19 जून 1990 को सफल घोषित किया गया लेकिन वरीय अधिकारियों ने 24 अप्रैल 2003 को उसे कारण बताओ नोटिस जारी किया और 17 जुलाई 2003 को उसे नौकरी से बर्खास्त करने का आदेश जारी कर दिया.
उसने आदेश की वैधता को हाईकोर्ट में चुनौती दी, जो मामला 14 सालों तक कोर्ट में चला और फिर 19 अप्रैल 2019 को आवेदक के अर्जी को मंजूर करते हुए कोर्ट ने माना कि वरीय पुलिस पदाधिकारी ने गलत तरीका अपनाकर उसे नौकरी से हटाया है.कोर्ट ने नौकरी से हटाए जाने की तारीख से पुनः नौकरी में बहाल करने तथा उसी दिन से वेतन व अन्य सुविधा देने का आदेश दिया लेकिन विभाग ने हाईकोर्ट के आदेश के अलोक में सिपाही को नौकरी में पुनः बहाल करने का आदेश जारी नहीं किया. इसके बाद आवेदक ने हाईकोर्ट में अवमानना का केस फरवरी माह में दायर किया लेकिन कोरोना महामारी के कारण उसके केस पर सुनवाई नहीं हो सकी है.
अब सिपाही अपने लाचार सिस्टम से हार गया है. उसने बताया कि वह बेहद गरीब है. मात्र डेढ़ कट्ठा जमीन है और आठ सदस्यों वाले परिवार का पालन करना दुश्वार हो गया है. अब हमारे पास मरने के अलावा और कोई दूसरा विकल्प नहीं है. अब अगर न्याय नहीं मिला तो हाईकोर्ट परिसर में आत्महत्या करेगा.