Bihar News: करप्शन किंग प्रभात कुमार झा को सस्पेंड कर दिया गया है. सहरसा नगर निगम में बतौर कमिश्नर पदस्थापन के दौरान करप्शन के आरोप लगे. नगर विकास विभाग की जांच में आरोप प्रमाणित पाये गए. जांच टीम ने आरोपी कमिश्नर प्रभात कुमार झा के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की थी. इसके बाद आज 3 नवंबर को आरोपी अधिकारी प्रभात कुमार झा को सस्पेंड कर दिया गया है.
सहरसा नगर निगम के नगर आयुक्त प्रभात कुमार झा के खिलाफ 8 करोड़ 44 लाख रुपए की चार बड़ी परियोजनाओं में गड़बड़ी का आरोप लगा. इसके बाद नगर विकास विभाग ने पांच सदस्यीय जांच टीम गठित की. जांच समिति ने 21 सितंबर 2026 को रिपोर्ट दिया, जिसमें पाया गया कि नगर निगम की चार बड़ी परियोजनाओं को 68 छोटी परियोजनाओं में बांटकर काम करवाया गया, ताकि टेंडर की प्रक्रिया से बचा जा सके.
जांच टीम ने नगर निगम के कमिश्नर प्रभात कुमार झा को दोषी बताया. इनके खिलाफ विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई करने की अनुशंसा की गई. इस आरोप में सामान्य प्रशासन विभाग ने सहरसा नगर निगम के कमिश्नर प्रभात कुमार झा को अगले आदेश तक निलंबित कर दिया है. इस अवधि में इनका मुख्यालय आयुक्त कार्यालय मगध प्रमंडल निर्धारित किया गया है.
पूर्व मंत्री ने की थी शिकायत, पांच सदस्यीय टीम ने की जांच
पूर्व मंत्री आलोक रंजन ने सहरसा नगर निगम के नगर आयुक्त के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी. इस आलोक में नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव ने जांच के आदेश दिए थे. पूरे मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय जांच टीम गठित की गई. नगर विकास विभाग ने संयुक्त सचिव संजय कुमार को कमेटी का अध्यक्ष बनाया था. जबकि अधीक्षण अभियंता हरेंद्र कुमार उपाध्याय को सदस्य, आंतरिक वित्तीय सलाहकार सुभाष कुमार को सहयोगकर्ता बनाया गया था. जबकि उप सचिव परमानंद पांडेय और सहायक अभियंता सौरभ कुमार को सदस्य के रूप में नामित किया गया था. जांच दल ने 20 से 22 अगस्त 2026 तक सहरसा में आरोपों से संबंधित बिंदुओं पर जांच की थी. जांच में सहरसा नगर निगम के कमिश्नर प्रभात कुमार झा की पूरी पोल-पट्टी खुल गई है. जांच टीम में पाया कि भारी पैमाने पर गड़बड़ी की गई है.
21 सितंबर 2026 को सौंपी गई थी जांच रिपोर्ट
पांच सदस्यीय जांच टीम ने अपनी अंतिम समीक्षा रिपोर्ट 21 सितंबर 2026 को नगर विकास विभाग को सौंप दिया था. रिपोर्ट में घोर अनियमितता पाये जाने का बिंदुवार जिक्र किया गया.. रिपोर्ट में कहा गया है कि नगर आयुक्त प्रभात कुमार झा द्वारा विभाग के निर्देश की अवहेलना कर प्राथमिकी दूसरे व्यक्ति पर दर्ज करा दिया. साथ ही इसकी भ्रामक सूचना विभाग को उपलब्ध कराया.
निविदा में जमकर किया खेल, चहेते को पहुंचाया लाभ
जांच में पाया गया कि, टेंडर की एनआईटी नियम का स्पष्ट उल्लंघन किया गया. निजी लाभ के लिए विभागीय आदेशों की अनदेखी की गई. उप विकास आयुक्त सहरसा के जांच प्रतिवेदन से स्पष्ट होता है कि शहर के 10 अन्य जगहों से अवैध वसूली की जा रही थी. एक ही योजना को कई विभिन्न योजनाओं में तोड़कर निविदा कराये गए। अपने चहेते व्यक्ति को अभिकर्ता बनाकर निजी लाभ दिया गया. टीम ने सिफारिश किया कि, विभिन्न योजनाओं में हुई भारी अनियमितता के आलोक में संबंधित पर विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाय. साथ ही अधिक राशि की रिकवरी की जाए.
नगर निगम के 6 कर्मियों को बना दिया ठेकेदार और कराया गया 421 काम
जांच टीम ने पाया कि वर्तमान नगर आयुक्त प्रभात कुमार झा 21 जून 2025 को पदभार ग्रहण किये. इसके बाद जुलाई 2025 से फरवरी 2026 तक 8 महीने की अवधि में इन्होंने 421 विभागीय कार्य कराए. इसके लिए 6 विभागीय कर्मियों को अभिकर्ता बना दिया और भारी पैमाने पर गड़बड़ी की गई .
कमिश्नर प्रभात कुमार झा पर विभागीय-कानूनी कार्रवाई की सिफारिश
जांच टीम ने सिफारिश की, नगर आयुक्त प्रभात कुमार झा एवं अन्य संबंधित पर लगे आरोप, स्थल जांच एवं अभिलेखों को देखने से आरोप प्रमाणित पाए गए हैं . इस आलोक में विभागीय जांच समिति कमिश्नर प्रभात कुमार झा पर विभागीय व कानूनी कार्रवाई करने की अनुशंसा करती है .





