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‘जीजा-साली का बात करना कोई जुर्म नहीं बल्कि मानवाधिकार’ केस की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सुनाया फैसला

MUZAFFARPUR: अपहरण के एक मामले में आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि जीजा और साली के बीच हुई बातचीत कोई जुर्म नहीं है बल्कि मानवाधिकार है। अग्रिम जमानत याचिक

‘जीजा-साली का बात करना कोई जुर्म नहीं बल्कि मानवाधिकार’ केस की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सुनाया फैसला
Mukesh Srivastava
2 मिनट

MUZAFFARPUR: अपहरण के एक मामले में आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि जीजा और साली के बीच हुई बातचीत कोई जुर्म नहीं है बल्कि मानवाधिकार है। अग्रिम जमानत याचिका पर अदालत में बहस पूरी होने पर एडीजे-8 की कोर्ट ने आरोपी को जमानत दे दी। सुनवाई के दौरान पीड़ित पक्ष भी अदालत में मौजूद था।


दरअसल, दो साल पहले पारू थाना क्षेत्र की रहने वाली एक लड़की का अपहरण हो गया था। इस संबंध में पीड़ित पक्ष ने पारू थाने में अपहरण का केस दर्ज कराया था। पुलिस की जांच आगे बढ़ी तो पुलिस ने लड़की के मोबाइल नंबर पर उसके जीजा का आखिरी कॉल पाया। कॉल डिटेल और शक के आधार पर पुलिस ने अगवा लड़की के जीजा को आरोपी बना दिया।


इसके बाद पुलिस ने आरोपी जीजा की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी शुरू कर दी। पुलिस की दबिश से परेशान आरोपी जीजा ने कोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका दाखिल की। आरोपी की याचिका पर मुजफ्फरपुर की कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई। इस दौरान पीड़ित पक्ष भी कोर्ट में मौजूद रहा। मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पुलिस से पूछा की किसी जीजा का अपनी साली से बात करना कौन सा जुर्म है? पुलिस द्वारा जवाब नहीं देने पर कोर्ट ने आरोपी जीजा को अग्रिम जमानत दे दी।

रिपोर्टिंग
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रिपोर्टर

MANOJ KUMAR

FirstBihar संवाददाता

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