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Bihar News: सृजन घोटाला की किंगपिन मनोरमा देवी की बहू को बड़ी राहत, सुप्रीम कोर्ट से रजनी प्रिया समेत तीन आरोपी को मिली बेल

Bihar News: बिहार के हजारों करोड़ के सृजन घोटाला में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रही ईडी के केस में घोटाले की किंगपिन मनोरमा देवी की बहू रजनी प्रिया समेत तीन आरोपी को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दे दी है.

Bihar News
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Mukesh Srivastava
3 मिनट

Bihar News: बिहार के भागलपुर में हुए 2200 करोड़ के सृजन घोटाला की किंगपिन मनोरमा देवी की बहू रजनी प्रिया को बड़ा राहत में मिली है। पिछले कई महीनों से जेल में बंद रंजनी प्रिया समेत तीन आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट ने बेल दे दिया है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि सात दिनों के भीतर इन आरोपियों को ट्रायल कोर्ट में पेश किया जाए। इसके बाद उन्हें जमानत दे दी जाएगी।


दरअसल, हजारों करोड़ रुपए के सृजन घोटाला में अरेस्ट मुख्य आरोपी मनोरमा देवी की बहू रजनी प्रिया और अन्य आरोपियों ने जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इन आरोपियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने रजनी प्रिया समेत तीन आरोपी को बेल देने का फैसला लिया है। कोर्ट ने यह निर्देश इस बाद को ध्यान में रखते हुए दिया कि आरोपी लंबे समय से जेल में बंद हैं और मामले में अभी सुनवाई शुरू होनी है।


दरअसल, भागलपुर केसृजन महिला सहयोग विकास समिति में करीब 2200 करोड़ रुपए का घोटाला हुआ था। मनोरमा देवी इस एनजीओ की संचालिका थी। कई सरकारी संस्थानों का पैसा सृजन के खाते में पहुंचता था, जिसे मनोरमा देवी ऋण के रूप में बांटती थीं। मनोरमा देवी के निधन के बाद बैंकों का पैसा वापस नहीं मिल सका। बाद में इसकी जांच शुरू हुई तो हड़कंप मच गया।


सीबीआई ने 25 अगस्त 2017 को सृजन घोटाले की जांच शुरू की। इस मामले में मनोरमा देवी, उसके बेटे अमित कुमार, बहू रजनी प्रिया, सतीश चंद्र झा समेत कई लोगों को आरोपी बनाया गया था। सीबीआई लगातार इस मामले की जांच में जुटी है। सीबीआई के साथ साथ ईडी भी इस केस में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रही है। करीब 22 सौ करोड़ के इस सृजन घोटाले में अबतक कई आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।


सृजन महिला सहयोग समिति एक गैर सरकारी संगठन है, जिसके खाते में 2004 से 2014 के बीच कथित तौर पर बड़ी राशि घोखाधड़ी से स्थानांतरित किया गया था। इसका कार्यालय भागलपुर के सबौर ब्लॉक में स्थित है। यह गैरसरकारी संस्था महिलाओं को व्यवसायिक प्रशिक्षण देता था। एनजीओ पर सरकारी कर्मियों और बैंककर्मियों की मिलीभगत से विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के लिए सरकारी राशि के गबन का आरोप है।

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FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता

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