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12 बार मिली असफलता, लेकिन नहीं टूटा हौसला... पिता के एक ताने ने बदली किस्मत, अब SDM बनकर रचा इतिहास

Success Story: जयपुर के विकास चौधरी ने 12 बार असफलता के बाद राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) परीक्षा में शानदार सफलता हासिल कर SDM बनने का सपना पूरा किया। पिता के सम्मान की जिद ने उन्हें लगातार मेहनत करने की प्रेरणा दी और अंततः उन्होंने 23वीं और फिर...

12 बार मिली असफलता, लेकिन नहीं टूटा हौसला... पिता के एक ताने ने बदली किस्मत, अब SDM बनकर रचा इतिहास
Ramakant kumar
4 मिनट

Success Story: किसी ने खूब कहा है कि “कोशिश कर, रास्ता निकलेगा; आज नहीं तो कल निकलेगा…” यह कहावत राजस्थान के जयपुर से सामने आई विकास चौधरी की यह कहानी सिर्फ एक सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह संघर्ष, जिद और आत्मसम्मान की ऐसी मिसाल है, जो हर उस युवा को प्रेरित करती है जो बार-बार की असफलताओं से निराश हो जाता है। विकास ने 12 बार अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं में असफलता झेली, लेकिन कभी हार नहीं मानी। आखिरकार उन्होंने राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) परीक्षा पास कर SDM बनकर अपने पिता का सपना पूरा कर दिखाया।


साधारण सपना, असाधारण सफर

विकास चौधरी का सपना शुरू में बहुत बड़ा नहीं था। वे बस एक स्थिर सरकारी नौकरी चाहते थे ताकि अपने परिवार को आर्थिक सहारा दे सकें। लेकिन इस छोटे से सपने को पूरा करना भी उनके लिए आसान नहीं था। उन्होंने एक के बाद एक कई परीक्षाएं दीं—राजस्थान पुलिस SI, कॉन्स्टेबल, पटवारी, VDO, लैब असिस्टेंट, टीचर ग्रेड—लेकिन हर बार उन्हें असफलता का सामना करना पड़ा।


लगातार 12 बार फेल होना किसी भी इंसान को तोड़ सकता है। लेकिन विकास ने हर असफलता को सीख के रूप में लिया। उन्होंने कभी खुद पर से विश्वास नहीं खोया।


पिता के संघर्ष ने बदल दी सोच

विकास की जिंदगी में असली टर्निंग पॉइंट तब आया, जब उनके पिता एक जमीन विवाद में फंस गए। इस मामले को लेकर उन्हें बार-बार SDM ऑफिस के चक्कर लगाने पड़ रहे थे, लेकिन हर बार निराशा ही हाथ लगती थी।


एक दिन जब उनके पिता बेहद हताश होकर घर लौटे, तो उन्होंने एक बात कही—

“अगर हमारे घर में कोई SDM होता, तो हमें ये दिन नहीं देखने पड़ते।”

यह एक साधारण वाक्य नहीं था, बल्कि विकास के लिए यह जीवन बदलने वाला क्षण बन गया। उन्होंने उसी दिन ठान लिया कि अब वे सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि SDM बनकर ही दिखाएंगे।


पहली कोशिश और बड़ा झटका

विकास ने पूरी मेहनत के साथ RAS परीक्षा की तैयारी शुरू की। साल 2021 में उन्होंने पहली बार परीक्षा दी। लेकिन जब रिजल्ट आया, तो उन्हें 1010वीं रैंक मिली। यह उनके लिए बड़ा झटका था, क्योंकि इतने प्रयास के बाद भी वे अपने लक्ष्य से काफी दूर थे।


लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी कमजोरियों को पहचाना, अपनी तैयारी की रणनीति बदली और पहले से ज्यादा मेहनत करना शुरू कर दिया।


मेहनत रंग लाई, मिली शानदार सफलता

लगातार मेहनत और सही रणनीति का परिणाम साल 2023 में सामने आया, जब विकास चौधरी ने RAS परीक्षा में 23वीं रैंक हासिल कर ली। यह उनके जीवन का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट था।


हालांकि, उन्हें तुरंत SDM की पोस्टिंग नहीं मिली। लेकिन उन्होंने इसे अंत नहीं माना, बल्कि एक और अवसर के रूप में देखा।


फिर से परीक्षा, फिर से जीत

विकास ने एक बार फिर खुद को चुनौती दी और 2024 में RAS परीक्षा दोबारा दी। इस बार भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए 34वीं रैंक हासिल की।


इसी बीच उन्हें SDM पद भी अलॉट हो गया। जिस सपने को उन्होंने अपने पिता के एक वाक्य से जोड़ा था, वह आखिरकार हकीकत बन चुका था।


संघर्ष से सफलता तक का संदेश

आज विकास चौधरी एक SDM अधिकारी हैं और उनकी कहानी लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है। उन्होंने यह साबित कर दिया कि असफलता कोई अंत नहीं होती, बल्कि यह सफलता की ओर जाने का रास्ता होती है।


युवाओं के लिए प्रेरणा

विकास की कहानी हर उस छात्र के लिए एक संदेश है जो बार-बार फेल होने के बाद हार मान लेता है। यह कहानी बताती है कि असली जीत उसी की होती है, जो आखिरी तक डटा रहता है। उन्होंने यह भी साबित किया कि सफलता केवल टैलेंट से नहीं, बल्कि लगातार मेहनत और मजबूत इरादों से मिलती है।

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रिपोर्टर / लेखक

Ramakant kumar

FirstBihar न्यूज़ डेस्क

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