1st Bihar Published by: First Bihar Updated Feb 28, 2026, 2:57:48 PM
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CBSC 12th Board Digital Evaluation: कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाओं का डिजिटल माध्यम से मूल्यांकन अनिवार्य करने के फैसले पर शिक्षकों ने चिंता जताई है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के इस निर्णय के खिलाफ दिल्ली के सरकारी स्कूलों के शिक्षकों का प्रतिनिधित्व करने वाले गवर्नमेंट स्कूल टीचर्स एसोसिएशन (GSTA) ने बोर्ड को पत्र लिखकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं।
शिक्षक संघ का कहना है कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को अचानक अनिवार्य करना सही नहीं है, क्योंकि अधिकांश शिक्षकों को इसके लिए पर्याप्त और औपचारिक प्रशिक्षण नहीं दिया गया है। ऐसे में बिना पूरी तैयारी के नई व्यवस्था लागू करने से मूल्यांकन प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है और छात्रों के परिणामों की सटीकता पर भी असर पड़ सकता है।
GSTA के महासचिव अजय वीर यादव ने बताया कि डिजिटल मूल्यांकन एक अच्छी पहल हो सकती है, लेकिन इसके लिए मजबूत तकनीकी ढांचे और प्रशिक्षित शिक्षकों की जरूरत है। उनका कहना है कि अभी तक बड़े स्तर पर न तो मॉक प्रैक्टिस कराई गई है और न ही शिक्षकों को प्रमाणित प्रशिक्षण दिया गया है। कई स्कूलों में शिक्षक डिजिटल कार्यों के लिए आईटी असिस्टेंट पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में उनसे पूरी तरह ऑनलाइन माध्यम से कॉपियां जांचने की अपेक्षा करना व्यावहारिक नहीं है।
शिक्षकों को आशंका है कि यदि जल्दबाजी में इस प्रणाली को लागू किया गया तो तकनीकी दिक्कतों, इंटरनेट समस्याओं और अनुभव की कमी के कारण मूल्यांकन में देरी या त्रुटियां हो सकती हैं। इसका सीधा असर छात्रों के रिजल्ट पर पड़ सकता है। संघ का मानना है कि बोर्ड परीक्षा जैसे संवेदनशील मामले में किसी भी तरह की चूक से छात्रों का भविष्य प्रभावित हो सकता है, इसलिए सावधानी जरूरी है।
GSTA ने अपने पत्र में सुझाव दिया है कि इस वर्ष डिजिटल मूल्यांकन को अनिवार्य बनाने के बजाय सीमित स्तर पर पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया जाए। हाल ही में नियुक्त वे शिक्षक, जिन्होंने अपनी भर्ती प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यम से पूरी की है और जो तकनीकी रूप से अधिक सहज हैं, उन्हें स्वेच्छा से इस प्रक्रिया में शामिल किया जा सकता है। इससे नई प्रणाली का परीक्षण भी हो जाएगा और संभावित समस्याओं की पहचान कर उन्हें समय रहते दूर किया जा सकेगा।
संघ ने यह भी प्रस्ताव रखा है कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को पूरी तरह लागू करने से पहले शिक्षकों को चरणबद्ध तरीके से प्रशिक्षण दिया जाए। साथ ही स्कूलों में आवश्यक तकनीकी संसाधन, बेहतर इंटरनेट सुविधा और समुचित तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराया जाए। यदि इन तैयारियों के साथ अगले शैक्षणिक सत्र से इस व्यवस्था को लागू किया जाता है, तो यह अधिक पारदर्शी और त्रुटिरहित साबित हो सकती है।
फिलहाल शिक्षक संघ ने बोर्ड से अनुरोध किया है कि इस सत्र में डिजिटल मूल्यांकन की अनिवार्यता पर पुनर्विचार किया जाए। उनका कहना है कि छात्रों के हित और परिणामों की विश्वसनीयता को ध्यान में रखते हुए किसी भी नई व्यवस्था को लागू करने से पहले पूरी तैयारी और परीक्षण जरूरी है।