1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mar 01, 2026, 4:32:11 PM
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Aajeevika Didi Herbal Gulal: होली का त्योहार नजदीक है और बाजारों में रंग-गुलाल की रौनक बढ़ने लगी है। लेकिन इस बार जामताड़ा की महिलाएं कुछ खास कर रही हैं। यहां झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) से जुड़ी आजीविका दीदियां फूलों और साग से हर्बल गुलाल तैयार कर रही हैं। केमिकल युक्त रंगों से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए उनका यह प्रयास लोगों को खूब पसंद आ रहा है।
पिछले दो वर्षों से महिलाएं प्राकृतिक सामग्रियों से गुलाल बना रही हैं और इस बार उनकी मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। जामताड़ा के अलावा दुमका, देवघर और धनबाद के बाजारों में भी इनके ‘पलाश’ ब्रांड के हर्बल गुलाल की जबरदस्त डिमांड है।
2 क्विंटल से 5 क्विंटल तक पहुंची डिमांड
जामताड़ा जिले के नाला प्रखंड की ‘जय श्रीराम आजीविका सखी मंडल’ की महिलाएं इस काम को आगे बढ़ा रही हैं। पिछले साल उन्होंने करीब 2 क्विंटल हर्बल गुलाल तैयार कर बेचा था। लेकिन इस साल अब तक 5 क्विंटल से ज्यादा की मांग मिल चुकी है।
मंडल की सदस्य चंद्रा महतो बताती हैं कि सिर्फ जिले के विभिन्न प्रखंडों से ही 3 क्विंटल की मांग आ चुकी है। वहीं धनबाद और देवघर से भी ऑर्डर मिल रहे हैं। बढ़ती मांग को देखते हुए महिलाएं उत्साह के साथ उत्पादन बढ़ा रही हैं।
फूलों और साग से बनता है गुलाल
इन दीदियों का गुलाल पूरी तरह प्राकृतिक होता है। इसे बनाने में गेंदा फूल, पलाश के फूल और पालक साग का इस्तेमाल किया जाता है। फूलों को सुखाकर और पीसकर रंग तैयार किया जाता है, जिससे त्वचा को कोई नुकसान नहीं होता।
महिलाओं का कहना है कि केमिकल वाले रंगों से एलर्जी और त्वचा रोग का खतरा रहता है, इसलिए लोग अब हर्बल गुलाल को ज्यादा पसंद कर रहे हैं।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से मिली ताकत
इन महिलाओं को आगे बढ़ाने में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) की अहम भूमिका है। इसी योजना के तहत महिलाओं को समूह बनाकर स्वरोजगार से जोड़ा गया। बैंक से जुड़कर उन्हें आर्थिक सहयोग भी मिला, जिससे वे छोटे स्तर से कारोबार शुरू कर सकीं।
आजीविका सखी मंडल की सदस्य राधा मंडल कहती हैं कि पहले वे घर तक सीमित थीं, लेकिन अब प्रखंड और जिला स्तर पर पहचान बना चुकी हैं। वे प्रधानमंत्री को धन्यवाद देते हुए कहती हैं कि इस योजना ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया है।
सरस मेला में भी दिखा जलवा
महिलाएं स्थानीय बाजारों के अलावा सरकारी सरस मेला में भी अपने उत्पाद बेचती हैं। गुलाल के अलावा वे साबुन, सरसों तेल, बरी, आटा और अन्य घरेलू उत्पाद भी तैयार करती हैं।
पिछले वर्ष मेले में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए उन्हें राज्यपाल के हाथों सम्मान भी मिला था। यह सम्मान उनके आत्मविश्वास को और मजबूत करता है।
अन्य महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा
सदस्य पुटू रविदास बताती हैं कि अब वे घर से बाहर निकलकर लोगों से बातचीत करती हैं, अपने उत्पाद के बारे में जानकारी देती हैं और अच्छी आमदनी कमा रही हैं। इससे न सिर्फ उनकी आर्थिक स्थिति सुधरी है, बल्कि परिवार और समाज में उनकी पहचान भी बनी है।