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बिहार में रहस्यमयी बीमारी का प्रकोप, एक महीने में 377 लोग बने शिकार; अब WHO की टीम करेगी पड़ताल

GAYA : बिहार के गया जिले से एक सनसनीखेज मामला निकल कर सामने आया है। यहां जिले में रहस्यमयी बीमारी प्रशासन के लिए सिरदर्द बन गई है। जिसकी पड़ताल अब WHO की टीम करेगी। इस बीमारी के लक

बिहार में रहस्यमयी बीमारी का प्रकोप, एक महीने में 377 लोग बने शिकार; अब WHO की टीम करेगी पड़ताल
Tejpratap
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GAYA : बिहार के गया जिले से एक सनसनीखेज मामला निकल कर सामने आया है। यहां जिले में रहस्यमयी बीमारी प्रशासन के लिए सिरदर्द बन गई है। जिसकी पड़ताल अब WHO की टीम करेगी। इस बीमारी के लक्षण चिकनगुनिया से मिलते-जुलते हैं। बुखार, जोड़ों के दर्द के साथ मौतें हो रही हैं।  जहां एक महीने के भीतर 377 लोग बीमार पड़ चुके हैं। ऐसे में अब डब्ल्यूएचओ की टीम इस बीमारी की पड़ताल करेगी।


दरअसल,  गया के सिविल सर्जन डॉ. रंजन कुमार सिंह ने जानकारी देत हुए बताया कि बीमारी के लक्षण चिकनगुनिया से मिलते-जुलते हैं। बुखार, चकत्ते और जोड़ों के दर्द के साथ मौतें हो रही हैं। ऐसे में अब डब्ल्यूएचओ की टीम इस क्षेत्र की जांच करेगी और चिकनगुनिया के फैलने के कारणों का पता लगाएगी। हालांकि, पिछले एक सप्ताह में कोई सक्रिय मामला सामने नहीं आया है। ऐसे में एकत्र किए गए नमूनों को पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल की वायरोलॉजी प्रयोगशाला में भेजा गया, जिसने वेक्टर जनित बीमारी की पुष्टि की है।


मालूम हो कि, दिवाली के इस क्षेत्र में ये रहस्यमयी बीमारी फैली। जिसमें 2-4 दिनों के लिए बुखार और चकत्ते के अलावा ऊपरी और निचले अंगों और जोड़ों का दर्द देखा गया। कुछ मामलों में  घुटनों और टखने पर भी असर पड़ता। लोगों की शिकायत पर जिला स्वास्थ्य अधिकारियों ने तुरंत कार्रवाई की थी। डॉक्टरों की टीम ने इलाके से 10 ब्लड सैंपल्स जमा किए हैं। उसके बाद इसे PMCH की वायरोलॉजी लैब में भेजा गया है।


आपको बताते चलें कि, पटवा डोली इलाके में बढ़ते मामलों के बाद जिला प्रशासन ने मच्छर के काटने से होने वाली बीमारी को फैलने से रोकने के लिए मेलाथियोन और टैमीफोस लार्विसाइडल का छिड़काव किया गया है। साथ ही मेडिकल टीमों को भी तैनात किया है। जिन्होंने घर-घर जाकर पेरासिटामोल, सूजन-रोधी दवाएं मुफ्त में बांटी। 

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FirstBihar न्यूज़ डेस्क

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