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Bihar Boat Accident : वैशाली नाव हादसे पर DM वर्षा सिंह का बड़ा एक्शन, थानाध्यक्ष-C0 को शो-कॉज, जवाब नहीं तो निलंबन!

वैशाली के राघोपुर में 13 लोगों की मौत के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। DM वर्षा सिंह ने थानाध्यक्ष अवधेश कुमार और CO दीपक कुमार से रात में निजी नाव परिचालन को लेकर शो-कॉज किया है। जवाब संतोषजनक नहीं हुआ तो निलंबन होगा।

Bihar Boat Accident : वैशाली नाव हादसे पर DM वर्षा सिंह का बड़ा एक्शन, थानाध्यक्ष-C0 को शो-कॉज, जवाब नहीं तो निलंबन!
Tejpratap
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हाजीपुर/वैशाली: बिहार के वैशाली जिले के राघोपुर में हुए दर्दनाक नाव हादसे के बाद अब प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। एक तरफ हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के घरों में मातम पसरा है, तो दूसरी तरफ जिला प्रशासन ने घटना की जिम्मेदारी तय करने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। वैशाली की जिलाधिकारी वर्षा सिंह ने राघोपुर थाना प्रभारी अवधेश कुमार और अंचल अधिकारी दीपक कुमार से शो-कॉज किया है।

डीएम की इस कार्रवाई के बाद प्रशासनिक महकमे में भी हलचल तेज हो गई है। दोनों अधिकारियों से मुख्य तौर पर यह जवाब मांगा गया है कि आखिर रात के समय निजी नाव के परिचालन की अनुमति कैसे मिली और इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासनिक स्तर पर क्या निगरानी की जा रही थी।

मामला सिर्फ एक नाव के डूबने का नहीं है, बल्कि इस हादसे ने नदी में रात के समय नाव परिचालन और सुरक्षा व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस नाव पर लोग सवार होकर रात में भोज में शामिल होने जा रहे थे, उसी दौरान नाव हादसे का शिकार हो गई। देखते ही देखते खुशियों का माहौल चीख-पुकार में बदल गया और कई परिवारों के घरों में हमेशा के लिए अंधेरा छा गया।

बताया जा रहा है कि हादसे में 13 लोगों की दर्दनाक मौत हुई है, जिनमें बड़ी संख्या में बच्चे शामिल हैं। हादसे के बाद से राघोपुर के संबंधित गांव में मातम पसरा हुआ है। जिन घरों में कुछ घंटे पहले तक भोज और पारिवारिक आयोजन की तैयारी थी, वहां अब अपनों को खोने का गम है।

हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि रात के समय निजी नाव का परिचालन आखिर कैसे हो रहा था? क्या नाव की स्थिति की जांच की गई थी? क्या उस पर सवार लोगों की संख्या और सुरक्षा मानकों की निगरानी हुई थी? क्या नाविक के पास जरूरी अनुमति और सुरक्षा उपकरण थे? इन तमाम सवालों के बीच डीएम वर्षा सिंह ने अब संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया है।

प्रशासन की ओर से किए गए शो-कॉज में रात में निजी नाव के परिचालन को लेकर जवाब मांगा गया है। अधिकारियों को यह स्पष्ट करना होगा कि उनके क्षेत्र में ऐसी गतिविधि की जानकारी थी या नहीं और यदि थी तो उसे रोकने अथवा सुरक्षा मानकों का पालन कराने के लिए क्या कदम उठाए गए।

संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो होगी कार्रवाई

डीएम की कार्रवाई को गंभीर इसलिए माना जा रहा है क्योंकि मामला सिर्फ स्पष्टीकरण तक सीमित नहीं है। अगर राघोपुर थानाध्यक्ष अवधेश कुमार और सीओ दीपक कुमार की ओर से दिया गया जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो उनके खिलाफ निलंबन के साथ विभागीय कार्रवाई भी की जा सकती है।यानी नाव हादसे के बाद अब प्रशासन सिर्फ राहत और बचाव तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि यह भी पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि आखिर ऐसी स्थिति पैदा होने के पीछे किस स्तर पर लापरवाही हुई।

हादसे ने खोल दी सुरक्षा व्यवस्था की पोल

राघोपुर की घटना ने एक बार फिर बिहार में नदी और नाव परिवहन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासकर रात के समय निजी नावों के परिचालन को लेकर निगरानी कितनी प्रभावी है, यह सवाल अब प्रशासन के सामने है।13 लोगों की मौत ने कई परिवारों को जिंदगी भर का दर्द दे दिया है। ऐसे में डीएम की कार्रवाई से उम्मीद जगी है कि हादसे की जिम्मेदारी तय होगी और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे।फिलहाल सबकी नजर इस बात पर है कि थानाध्यक्ष और सीओ अपने शो-कॉज का क्या जवाब देते हैं और प्रशासन आगे क्या कार्रवाई करता है। राघोपुर के इस हादसे ने यह सवाल जरूर छोड़ दिया है कि अगर रात में नाव परिचालन पर पहले से सख्ती और निगरानी होती, तो क्या इतने परिवारों को अपने अपनों को खोना पड़ता?