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कोर्ट के आदेश पर दखल-दिहानी के दौरान हंगामा, सीओ की गाड़ी का घेराव, मंत्री से पैसा खाने का आरोप

अंजार अंसारी का कहना है कि हमारे जमीन पर अवैध रूप से कब्जा किया गया है। सीओ साहब मंत्री रत्नेश सदा से पैसा खाये हैं। प्रमोशन के लोभ में सीओ हमारा काम नहीं कर रहे हैं। वो गरीब आदमी का काम नहीं कर रहे है, ये लिखित रूप से नहीं देंगे तो हम इनके सामने..

बिहार न्यूज
सीओ पर गंभीर आरोप
© रिपोर्टर
Jitendra Vidyarthi
5 मिनट

SAHARSA: सहरसा जिले के कहरा अंचलाधिकारी निरंजन कुमार मिश्रा की गाड़ी का लोगों ने घेराव कर दिया। सीओ कोर्ट के आदेश पर जमीन पर कब्जा दिलाने पहुंचे थे। तभी लोग सीओ के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने लगे। उन पर पक्षपात रवैय्या अपनाने का आरोप लगाने लगे। हालांकि सीओ ने अपने ऊपर लगे आरोप को बेबुनियाद बताया। इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। पीड़ित मोहम्मद अंजार अंसारी का कहना है कि हमारे जमीन पर अवैध रूप से कब्जा किया गया है। सीओ साहब मंत्री रत्नेश सदा से पैसा खाये हैं। प्रमोशन के लोभ में सीओ हमारा काम नहीं कर रहे हैं। वो गरीब आदमी का काम नहीं कर रहे है, ये लिखित रूप से नहीं देंगे तो हम इनके सामने आत्मदाह कर लेंगे। हम उनसे पूछ रहे हैं कि कितना पैसा में डील किये है, तो वो जबाव नहीं दे रहे हैं। 


क्या है पूरा मामला जानिये? 

दरअसल, बरियाही वार्ड नंबर 11 निवासी 72 वर्षीय मोहम्मद इदरीश अंसारी और सहरसा नगर निगम के वार्ड नंबर 41 निवासी 70 वर्षीय प्रमोद कुमार पासवान ने वर्ष 1982 में पंचगछिया निवासी वेदानंद झा और निर्मला देवी पति बम भोला झा से अलग-अलग सात कट्टा 18 धुर 5 धुरकी जमीन अपने नाम से केवला सहरसा नगर निगम के वार्ड नंबर 41 स्थित मोहल्ले में जमीन रजिस्ट्री करवाया था। मोहम्मद इदरीश अंसारी ने बताया कि उनके जमीन पर अवैध तरीके से 10-12 से परिवार जबरदस्ती बसे हुए हैं।


इस मामले पर प्रमोद कुमार पासवान ने कहा कि उनकी खरीदगी की गई जमीन पर उन्होंने बाउंड्री दीवार देकर रहना शुरू कर दिया था। लेकिन उस जमीन पर महादलित परिवार के 8-9 लोगो ने जबरन उनके घर में आग लगाकर उनकी जमीन और मकान को हथिया लिया। उन्होंने अपनी जमीन अवैध कब्जा को लेकर सहरसा व्यवहार न्यायालय के सिविल कोर्ट में केस दर्ज किया। इसके बाद एक अगस्त 1998 में सहरसा कोर्ट के राज किशोर लाल सब जज तृतीय ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया।


 वही महादलित परिवार ने हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की जहां से केस खारिज कर दिया गया। वही सहरसा अंचल के द्वारा बिहार सरकार की जमीन बताकर हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की गई। जहां कोर्ट ने उसे भी खारिज कर दिया। प्रमोद कुमार पासवान ने बताया कि उन्होंने अपनी जमीन पर से अवैध कब्जा खाली करने को लेकर सहरसा सब जज 1 के कोर्ट मे केस दर्ज करवाया। जहां 30 सितंबर 2024 को कोर्ट ने सहरसा जिला प्रशासन को प्रमोद कुमार पासवान और मोहम्मद इदरीश के पक्ष में फैसला सुनाते हुए अवैध जमीन को खाली करने और पीड़ित परिवार को दखल दिहानी के लिए आदेश दिया।


आदेश के 4 महीने बाद 5 जनवरी 2025 को सहरसा कहरा प्रखंड के तत्कालीन अंचला अधिकारी मौके पर पहुंचकर सिर्फ मुआयना करके यह कहकर चली गई कि अमीन के द्वारा नापी करवाकर दखल दिहानी करवाई जाएगी। प्रमोद पासवान और मोहम्मद इदरीश ने कहा कि थक हार कर फिर कोर्ट का दरवाजा खटखटा। जिसके बाद 11 मई 2026 को सहरसा कोर्ट ने कहरा प्रखंड के अंचलाधिकारी और जिला प्रशासन को पीड़ित के भूमि उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। इस आलोक में 26 जुलाई 2026 को जिला प्रशासन ने कोर्ट के आदेश पर कहरा अंचलाधिकारी निरंजन कुमार मिश्रा के नेतृत्व में पुलिस कर्मियों की प्रतिनियुक्ति करके भूमि खाली करने का कहा गया। 


लेकिन इस दौरान कोर्ट के निर्धारित समय 11:00 बजे सभी पहुंच गए। लेकिन मजिस्ट्रेट के रूप में अंचलाधिकारी समय पर नहीं पहुंचे। डेढ़ बजे अंचलाधिकारी पहुंचे तब तक कोर्ट के कई अधिकारी बैरंग वापस लौट गए। इसी से नाराज पीड़ित परिवार और स्थानीय लोगों ने अंचलाधिकारी के गाड़ी को घेराव करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। 


पीड़ित इदरीश अंसारी ने आरोप लगाया कि जिस भूमि पर महादलित परिवार अवैध कब्जा जमाए हुए हैं उसमें बिहार सरकार के आपदा प्रबंधन मंत्री रत्नेश सादा का मकान भी शामिल है। वह अपने पहले भी और मंत्री पद का दुरुपयोग करके कोर्ट के फैसले को भी अपने पावर से रोक रहे हैं। पीड़ित परिवार वालों ने आरोप लगाया कि वह इसकी शिकायत राज्य के डीएम, सीएम, राज्यपाल और गृह मंत्री तक से कर चुके हैं बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।


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रिपोर्टर

RITESH HUNNY

FirstBihar संवाददाता